जानें आखिर क्यों इस बार श्राद्ध के तुरंत बाद शुरू नहीं होंगे नवरात्र, ये है कारण

know why navratri will not start next day from shradh  - Sakshi Samachar

इस बार चार नहीं पांच माह का होगा चातुर्मास 

श्राद्ध के तुरंत बाद शुरू नहीं होगी नवरात्रि 

20 से 25 दिन बाद शुरू होगी नवरात्रि 

हम सब जानते ही हैं कि हर साल श्राद्ध पक्ष के खत्म होते ही अगले दिन से नवरात्रि शुरू हो जाती है। श्राद्ध के अगले दिन ही नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि होती है पर इस बार ऐसा नहीं होगा। हर बार तो श्राद्ध खत्म होते ही अगले दिन ही कलश स्थापना की जाती है लेकिन इस साल ऐसा नहीं हो रहा है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस बार ऐसा क्या खास होने वाला है जो श्राद्ध के बाद नवरात्रि नहीं शुरू होगी। 

तो चलिए यहां हम आपको बताते हैं ....

श्राद्ध के खत्म होते ही लगेगा अधिकमास 

तो आप यह जान लें कि इस बार श्राद्ध समाप्त होते ही अधिकमास लग जाएगा। अधिकमास लगने से नवरात्रि 20-25 दिन आगे खिसक जाएगी। 

क्यों हो रहा है ऐसा 

दरअसल लीप वर्ष होने के कारण ऐसा हो रहा है। इसलिए इस बार चातुर्मास जो हमेशा चार महीने का होता है, इस बार पांच महीने का होगा। ज्योतिष की मानें तो 160 साल बाद लीप ईयर और अधिकमास दोनों ही एक साल में हो रहे हैं। 

चातुर्मास में रुक जाएंगे मांगलिक कार्य

चतुर्मास लगने से विवाह, मुंडन, कर्ण छेदन जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे। इस काल में पूजन पाठ व्रत उपवास और साधना का विशेष महत्व होता है। इस दौरान देव सो जाते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद ही देव जागते हैं। 

इस दिन से शुरू होगा अधिकमास

इस साल 17 सितंबर 2020 को श्राद्ध खत्म होंगे। इसके अगले दिन अधिकमास शुरू हो जाएगा, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। इसके बाद 17 अक्टूबर से नवरात्रि व्रत रखें जाएंगे। इसके बाद 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी होगी। जिसके साथ ही चातुर्मास समाप्त होंगे। इसके बाद ही शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन आदि शुरू होंगे।

चातुर्मास में योगनिद्रा में लीन होते हैं भगवान विष्णु

विष्णु भगवान के निद्रा में जाने से इस काल को देवशयन काल माना गया है। चतुर्मास में नकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं। इस मास में दुर्घटना, आत्महत्या आदि जैसी घटनाओं की अधिकता होती है। दुर्घटनाओं से बचने के लिए मनीषियों ने चतुर्मास में एक ही स्थान पर गुरु यानी ईश्वर की पूजा करने को महत्व दिया है। इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीरसागर में योग निद्रा पर निवास करते हैं। इस दौरान ब्रह्मांड की सकारात्मक शक्तियों को बल पहुंचाने के लिए व्रत पूजन और अनुष्ठान का भारतीय संस्कृत में अत्याधिक महत्व है। सनातन धर्म में सबसे ज्यादा त्यौहार और उल्लास का समय भी यही है। चतुर्मास के दौरान भगवान विष्णु की पूजा होती है।

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