जानें कब, क्यों और कैसे मनाई जाती है कजरी तीज, व्रत के नियम और पूजा विधि

know when why and how kajri teej is celebrated  - Sakshi Samachar

भादो मास में मनाई जाती है कजरी तीज

कजरी तीज को कजली तीज भी कहते हैं

ऐसे करते हैं कजरी तीज की पूजा

सावन मास के खत्म होते ही भादो शुरू हो जाएगा और भादो के कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजरी तीज का त्योहार मनाया जाता है। हरियाली तीज की तरह ही कजरी तीज का पर्व भी महिलाओं के लिए बहुत खास होता है।

इस बार कजरी तीज का त्योहार 6 अगस्त, गुरुवार को मनाया जाएगा। यह त्योहार भी खासतौर पर उत्तर भारत का है और उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान सहित कई राज्यों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। 

कजरी तीज को कजली तीज, बूढ़ी तीज, बड़़ी तीज व सातूड़ी तीज भी कहते हैं। जिस तरह से हरियाली तीज, हरतालिका तीज का पर्व महिलाओं को लिए बहुत मायने रखता है। उसी तरह कजरी तीज भी सुहागन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण त्योहार है। 

ये है कजरी तीज का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि..

कजरी तीज का त्योहार 6 अगस्त को मनाया जाएगा। 
5 अगस्त को रात 10:50 मिनट पर तृतीया तिथि आरंभ हो जाएगी। 
जो 7 अगस्त की रात 12:14 बजे तक रहेगी। 

ऐसे रखा जाता है कजरी तीज का व्रत

कजरी तीज के दिन महिलाएं नीमड़ी माता की पूजा करती हैं। यह व्रत सुहागन स्त्रियां सुख-समृद्धि की कामना के लिए करती हैं। यह व्रत निर्जला रखा जाता है। गर्भवती महिलाएं जल और फलाहार ले सकती हैं। कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। गाय की पूजा करने के बाद गाय को आटे की सात लोईयों पर गुड़ और घी रखकर खिलाया जाता है। उसके बाद व्रत का पारण किया जाता है।

यूं करें कजरी तीज पर पूजा 

पूजन करने के लिए मिट्टी व गोबर से दीवार के किनारे तालाब के जैसी आकृति बनाई जाती है। घी और गुड़ से पाल बांधा जाता है और उसके पास नीम की टहनी को रोपा जाता है। जो तालाब के जैसी आकृति बनाई जाती है। उसमें कच्चा दूध और जल डाला जाता है। फिर दिया प्रज्वलित किया जाता है। 
थाली में नींबू, ककड़ी, केला, सेब, सत्तू, रोली, मौली, अक्षत आदि पूजा सामाग्री रखी जाती है। 

-सबसे पहले पूजा की शुरूआत नीमड़ी माता को जल व रोली के छींटे देने से करें। फिर अक्षत चढ़ाएं। अनामिका उंगली से नीमड़ी माता के पीछे दीवार पर मेहंदी, रोली की 13 बिंदिया लगाएं। साथ ही  काजल की 13 बिंदी भी लगाएं, काजल की बिंदियां तर्जनी उंगली से लगाएं।

-  नीमड़ी माता को मोली चढ़ाएं और उसके बाद मेहंदी, काजल और वस्त्र भी अर्पित करें। फिर उसके बाद जो भी चीजें आपने माता को अर्पित की हैं, उसका प्रतिबिंब तालाब के दूध और जल में देखें। तत्पश्चात गहनों और साड़ी के पल्ले आदि का प्रतिबिंब भी देखें।

ऐसे दें चंद्रमा को अर्घ्य 

कजरी तीज पर संध्या को पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य  दिया जाता है। फिर उन्हें भी रोली, अक्षत और मौली अर्पित करें। चांदी की अंगूठी और गेंहू के दानों को हाथ में लेकर चंद्रमा के अर्घ्य  देते हुए अपने स्थान पर खड़े होकर परिक्रमा करें। 

Advertisement
Back to Top