श्रावण 2020 : जानें कैसे हुई सावन माह की शुरुआत, ये है कथा और शिव पूजा के नियम

know from when sawan month started shiva puja rules  - Sakshi Samachar

भगवान शिव को प्रिय है सावन का महीना

तो इसलिए शिव को प्रिय है जलाभिषेक 

6 जुलाई सोमवार से शुरू हो रहा है सावन 

यह तो हम जानते ही हैं कि सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है और इस महीने में विशेष पूजा अर्चना, व्रत से शिव-शंकर बेहद प्रसन्न होते हैं। इस बार सावन का महीना 6 जुलाई, सोमवार से शुरू हो रहा है। 

शिव भक्त सावन के महीने में भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए सावन सोमवार का व्रत रखते हैं और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करने के लिए कांवड़ यात्रा करते हैं। 

यहां सवाल यह उठता है कि आखिर भगवान शिव का जलाभिषेक क्यों किया जाता है तो इससे जुड़ी धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन से सभी तरह की परेशानियों से छुटकारा मिलता है। भगवान शंकर जी का जलाभिषेक करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हो जाती है। 

इस कथा से जानें शिव को क्यों प्रिय है है जलाभिषेक 

सृष्टि को बचाने के लिए देवासुर संग्राम में समुद्र मंथन से निकले विष को शिव जी ने पी लिया था। इससे उनका शरीर बहुत ही ज्यादा गर्म हो गया जिससे शिवजी को काफी परेशानी होने लगी थी। 

तब इंद्रदेव ने जमकर बारिश करवाई तो उन्हें काफी शांति मिली। तभी से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाने लगा।  

कहते हैं कि यह घटना सावन माह में घटी थी। इस प्रकार से शिव जी ने विषपान करके सृष्टि की रक्षा की थी। तभी से यह मान्यता है कि सावन के महीने में शिव जी अपने भक्तों का कष्ट अति शीघ्र दूर कर देते हैं। 

ये है भगवान शिव की पूजा के नियम

सावन में पड़ने वाले सोमवार के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा होती है। इस साल सावन में अद्भुत संयोग बन रहा है। श्रावण माह की शुरूआत सोमवार से हो रही है और इसका अंत भी सोमवार के दिन होगा। सावन में इस बार पांच सोमवार पड़ रहे हैं। 

- बिल्व पत्र चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा दूध, दही, गंगाजल और शहद से भी उन्हें प्रसन्न किया जाता है। 
- वहीं कुछ चीजें ऐसी भी होती है जिन्हें भूलकर भी शिवजी को नहीं अर्पित करना चाहिए। शिव जी की पूजा में केतकी के फूलों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि केतकी के फूल चढ़ाने से शिव जी नाराज हो जाते हैं। 
- न ही कभी तुलसी के पत्तों को शिवजी को चढ़ाना चाहिए। इसके अलावा शिवलिंग पर कभी भी नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। 
- ध्यान रखें भगवान भोलेनाथ को हमेशा पीतल और कांस्य के बर्तन से ही जल चढ़ाना चाहिए।

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