यहां 400 सालों से मनाया जा रहा है दशहरा महोत्सव, दुनियाभर में है पॉपुलर

Know The History of famous Mysore Dussehra Festival  - Sakshi Samachar

400 साल से ज्यादा पुराना इतिहास

मोहत्सव पर कोरोना का असर

मैसूर : कर्नाटक के ऐतिहासिक शहर मैसूर का दशहरा महोत्सव दुनियाभर में मशहूर हैं। इसे देखने के लिए विश्वभर के कोने-कोने से लोग आते हैं। 10 दिन तक चलने वाला दशहरा महोत्सव कर्नाटक की संस्कृति को प्रतिबिंबित करता है।

इन दस दिनों में मैसूर पैलेस, चामुंडीहिल्स दीपों की रोशनी से जगमगाते हैं, जिसे देखने के लिए मैसूर पैलेस और उसके आस-पास के इलाकों में लोगों की भारी भीड़ जमा हो जाती है। कोरोना के कारण राज्य सरकार ने इस बार मैसूर दशहरा महोत्सव के सामान्य आयोजन का फैसला किया है, जिससे सैकड़ों साल पुराना यह महोत्सव इस बार सिर्फ औपचारिक बनकर रहने की पूरी संभावना है।

400 साल से ज्यादा पुराना इतिहास

मैसूर दशहरा महोत्सव का इतिहास 400 साल से ज्यादा पुराना है। यहां दशहरा महोत्सव को 'नाड़हब्बा' (state Festival) के नाम से बुलाया जाता है। दशहरे पर मैसूर की चामुंडेश्वरी देवी को पूजने की परंपरा है। ऐतिहासिक घटनाक्रमों के मुताबिक यह महोत्सव  विजयनगर राजाओं के शासनकाल में 15वीं सदी में शुरू हुआ था।

पर्शियन राजदूत अब्दुल रज्जाक ने अपनी किताब में विजयनगर के राजाओं द्वारा आयोजित किए जाने वाले दशहरा महोत्सव के बारे में लिखा है। विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद मैसूर के राजा बने उडयार-1 ने सन 1610 में  मैसूर के निकट स्थित श्रीरंगपट्टणम में दशहरा महोत्सव शुरू किया। 1805 में कृष्णराजू उडयार III के समय से दशहरे के दिन मैसूर पैलेस में विशेष राजदरबार का आयोजन शुरू किया गया। उसके बाद यह एक परंपरा बन गई।

पर्व से एक महीने पहले से....
दशहरे का मतलब ही दस दिन का त्योहार होता है, लेकिन मैसूर महोत्सव बहुत ही खास है। एक महीने पहले से पूरे मैसूर में त्योहार का माहौल बना होता है। बच्चों का दशहरा, किसानों का दशहरा, महिलाओं का दशहरा, युवाओं का दशहरा... इस तरह मैसूर में हर कोई अलग-अलग दशहरा मनाता है। मैसूर के आस-पास के गांवों में दशहरा महोत्सव भव्य रूप से मनाया जाता है और कर्नाटक सरकार अधिकारिक रूप से  इस महोत्सव का आयोजन करती है। इस मौके पर खेल, गायन प्रतिस्पर्दा, प्रदर्शन, युवा महोत्सवा, फूड फेस्टिवल के साथ धुमधाम से मनाया जाता है।

मोहत्सव पर कोरोना का असर
इस बारमैसूर दशहरा महोत्सव पर कोरोना वायरस का खासा असर देखने को मिल रहा है। साधारण परिस्थितियों में यह महोत्सव धुमधाम से होता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। गत शनिवार को बहुत ही सामान्य माहौल में महोत्सव शुरू हुआ। दिव्य मुहूर्त में चामुंडीहिल्स पर चामुंडेश्वरी देवी की विशेष पूजा आयोजित कर उत्सव का आगाज किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और कुछ अन्य प्रमुखों ने भाग लिया।

इसे भी पढ़ें : 

नवरात्रि स्पेशल: यहां गिरा था माता सती का दाहिना हाथ, 51 शक्तिपीठों में से एक है देवी पाटन मंदिर

Related Tweets
Advertisement
Back to Top