आज कालाष्टमी पर ऐसे करें काल भैरव की पूजा, नहीं सताएगा भय व दूर होंगे रोग

importance of kalashtami vrat puja muhurat - Sakshi Samachar

कालाष्टमी का महत्व व मुहूर्त

काल भैरव की पूजा से दूर होते हैं संकट

यह तो हम जानते ही हैं कि हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव के अंश स्वरूप काल भैरव की पूजा-उपासना की जाती है। खासकर तंत्र विद्या में सिद्धि पाने के लिए साधक कालाष्टमी व्रत को जरूर करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि निशिथ काल में काल भैरव देव की पूजा करने से साधक की मनोकामना यथाशीघ्र पूरी हो जाती है। इस व्रत को करने से सभी दुःख, संकट और क्लेश दूर हो जाते हैं। इस बार ये अष्टमी 13 जून शनिवार को है।

भगवान भैरव का जन्म अष्टमी तिथि पर प्रदोष काल यानी दिन-रात के मिलन की घड़ी में हुआ था इसलिए इस दिन भी शाम को ही भगवान भैरव की पूजा करना ज्यादा शुभ माना गया है। भगवान काल भैरव की पूजा से बीमारियां दूर होती हैं और मृत्यु का डर भी नहीं रहता है।

ऐसे करें कालाष्टमी की पूजा 

- काल भैरव अष्टमी पर शाम को विशेष पूजा से पहले नहाएं और किसी भैरव मंदिर में जाएं।
- सिंदूर, सुगंधित तेल से भैरव भगवान का श्रृंगार करें। लाल चंदन, चावल, गुलाब के फूल, जनेऊ, नारियल चढ़ाएं।
- भैरव पूजा में ऊँ भैरवाय नम: बोलते हुए चंदन, चावल, फूल, सुपारी, दक्षिणा, नैवेद्य लगाकर धूप-दीप जलाएं।
- तिल-गुड़ या गुड़-चने का भोग लगाएं। सुगंधित धूप बत्ती और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद भैरव भगवान को प्रणाम करें।
- इसके बाद भैरव भगवान के सामने धूप, दीप और कर्पूर जलाएं, आरती करें, प्रसाद ग्रहण करें। भैरव भगवान के वाहन कुत्तों को प्रसाद और रोटी खिलाएं।
- भैरव भगवान के साथ ही शिवजी और माता-पार्वती की भी पूजा जरूर करें। इस दिन अधार्मिक कामों से बचना चाहिए।

कालाष्टमी पर शक्ति पूजा भी होती है 

नारद पुराण के अनुसार कालाष्टमी पर काल भैरव और मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। इस रात देवी काली की भी विशेष पूजा का विधान है। शक्ति पूजा करने से काल भैरव की पूजा का पूरा फल मिलता है। इस दिन व्रत करने वाले को फलाहार ही करना चाहिए। इस व्रत के दिन कुत्ते को भोजन करवाना शुभ माना जाता है। भगवान काल भैरव की पूजा

रोग दूर करता है ये व्रत

कालाष्टमी पर्व शिवजी के रुद्र अवतार कालभैरव के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। कालाष्टमी व्रत बहुत ही फलदायी माना जाता है। इस दिन व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति के सारे कष्ट मिट जाते हैं और काल उससे दूर हो जाता है। इसके अलावा व्यक्ति रोगों से दूर रहता है। साथ ही उसे हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है।

कालाष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त और तिथि

व्रती आज के दिन किसी समय पूजा-आराधना कर सकते हैं। जबकि अष्टमी की तिथि 12 जून को रात में 10 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी, जो 13 जून की मध्य रात्रि में 12 बजकर 58 मिनट पर समाप्त होगी।

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