'गुड फ्राइडे' पर विशेष : आज के दिन चर्च में घंटे नहीं बजते, लकड़ी के खटखटे बजाकर की जाती है विशेष प्रार्थना

On 'Good Friday' Christians do not Ring the Church Bell, they knock Wood - Sakshi Samachar

क्या है 'मोन्डी थर्सडे'

क्यों है यह गुड फ्राइडे

क्या खास होता है इस दिन

हैदराबाद : आज यानि 10 अप्रैल को 'गुड फ्राइडे' है। वह दिन जब ईशा मसीह को सूली पर चढ़ा दिया गया था। क्रिश्चियन मान्यता के अनुसार यह दिन उनके लिए बेहद खास है क्योंकि इसी दिन प्रभु यीशु ने मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। बाइबिल के अनुसार सूली पर चढ़ाने के तीन दिन बाद ईसा मसीह फिर से जीवित हो गए थे, इस दिन को 'ईस्टर' के रूप में मनाया जाता है। 'गुड फ्राइडे' से ठीक एक दिन पहले 'मोन्डी थर्सडे' मनाया जाता है और इसके दो दिन बाद यानि रविवार को ईस्टर। 

क्या है 'मोन्डी थर्सडे'
क्रिश्चियन मान्यता के अनुसार 'मोन्डी थर्सडे' के दिन भगवान यीशु मसीह ने अपने सभी शिष्यों के पैर धोकर उन्हें एक-दूसरे से प्यार करने के लिए कहा था। खुद यीशु अपने शिष्यों से भी बहुत प्यार करते थे। यीशु के वचनों पर चलते हुए 'गुड फ्राईडे' से एक दिन पहले इस दिन को घरों में बड़ों के पैर धोकर मनाया जाता है। वहीं, इस दिन धर्मगुरु चर्च के 12 सदस्यों के पैर धोते हैं। हालांकि इस बार कोरोना वायरस के चलते देश भर में 'लॉकडाउन' है। ऐसे में 'गुड फ्राइडे' पर होने वाले सभी कार्यक्रमों को पहले ही रद्द किया जा चुका है। इस बार लोग चर्च जाकर प्रार्थना सभा में शामिल नहीं हो पाएंगे लेकिन अपने-अपने घरों में रहकर ही प्रभु यीशु को याद करेंगे और त्‍योहार मनाएंगे। 

न कहें 'हैप्पी गुड फ्राईडे'
ईसाई मान्यताओं के मुताबिक, 'गुड फ्राइडे' के दिन ही प्रभु यीशु को यातनाओं के बाद सूली पर चढ़ाया गया था इसलिए इस दिन को 'ब्लैक फ्राइडे' या 'ग्रेट फ्राइडे' भी कहते हैं। जानकारी के आभाव में कई बार लोग अन्य त्यौहारों की तरह इस दिन को भी 'हैप्पी गुड फ्राइडे' बोलकर विश करने लग जाते हैं, जो बिलकुल गलत है। दरअसल, इस दिन को लेकर लोगों के मन में यह सवाल भी होता है कि अगर इस दिन भगवान की मौत हुई थी तो इसे 'गुड फ्राईडे' क्यों कहते हैं? 

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क्यों है यह गुड फ्राइडे
एक धर्मगुरू के अनुसार, भगवान यीशु ने दुनिया के पापों को माफ़ करने के लिए अपनी जान दी थी। भगवान के इस प्यार और बलिदान को देखकर ही लोगों ने इसे 'गुड फ्राइडे' का नाम दे दिया। चूंकि इस दिन ईसाईयों के प्रभु यीशु की मौत हुई थी, ऐसे में इस दिन 'हैप्पी गुड फ्राईडे' न कहें। कुछ लोगों का ऐसा भी कहना है कि मृत्यु के बाद प्रभु यीशु ने दोबारा जन्म लिया था। यही कारण है कि इस दिन को 'गुड फ्राइडे' कहा जाता है। 

क्या खास होता है इस दिन
असल में यीशु ने अपने बलिदान से दुनिया को आपस में प्रेम और क्षमा करने का संदेश दिया था। 'गुड फ्राइडे' के दिन लोग चर्च में घंटे नहीं बजाते हैं बल्कि इस दिन विशेष प्रार्थना की जाती है और लकड़ी के खटखटे से आवाज की जाती है। बता दें कि अमूमन सफ़ेद लिबास में रहने वाले चर्च के पादरी इस दिन काले रंग के कपड़े पहनते हैं। शायद इसके पीछे की वजह शोक प्रकट करने का दिन हो। तभी तो इस दिन लोग व्रत भी रखते हैं।

कब मनाया जाता है ईस्टर
क्रिचियन मान्यता के अनुसार, 'मोन्डी थर्सडे' फ्राइडे और शनिवार के दिन लोग उपवास और प्रार्थनाएं करते हैं शनिवार रात को ईस्टर विजिल होता है जब समुदाय के लोग चर्च जाकर प्रभु यीशु के दोबारा जी उठने का उत्सव मनाते हैं। रविवार यानि 'ईस्टर संडे' इसलिए मनाया जाता है क्योंकि क्रिश्चियन अपने प्रभु यीशु के दोबारा जीने का जश्न मनाते हैं। 

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कब होता है गुड फ्राइडे
गुड फ्राइडे हर साल मार्च, अप्रैल या मई महीने में मनाया जाता है। इस बार यह त्‍योहार 10 अप्रैल को है।

क्‍या है गुड फ्राइडे
गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्‍लैक फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे के नाम से भी जाना जाता है। ईसाई धर्म ग्रंथों के अनुसार यीशु का कोई दोष नहीं था फिर भी उन्‍हें क्रॉस पर लटका कर मारने का दंड दिया गया। अपने हत्‍यारों की उपेक्षा करने के बजाए यीशु ने उनके लिए प्रार्थना करते हुए कहा था, 'हे ईश्‍वर! इन्‍हें क्षमा कर क्‍योंकि ये नहीं जानते कि ये क्‍या कर रहे हैं।' जिस दिन ईसा मसीह को क्रॉस पर लटकाया गया था, उस दिन फ्राइडे यानि कि शुक्रवार था। तब से उस दिन को गुड फ्राइडे कहा जाता है। क्रॉस पर लटकाए जाने के तीन दिन बाद यानी कि रविवार को ईसा मसीह फिर से जीव‍ित हो उठे थे। इस दिन को 'ईस्‍टर संडे' कहा जाता है। 

ईसा मसीह को क्रॉस पर क्‍यों लटकाया गया
ईसाई धर्म के अनुसार ईसा मसीह परमेश्वर के पुत्र थे। उन्‍हें मृत्‍यु दंड इसलिए दिया गया था क्‍योंकि वो अज्ञानता के अंधकार को दूर करने के लिए लोगों को श‍िक्षित और जागरुक कर रहे थे। उस वक्‍त यहूदियों के कट्टरपंथी रब्‍बियों यानि कि धर्मगुरुओं ने यीशु का पुरजोर विरोध किया। कट्टरपंथ‍ियों ने उस समय के रोमन गवर्नर पिलातुस से यीशु की श‍िकायत कर दी। रोमन हमेशा इस बात से डरते थे कि कहीं यहूदी क्रांति न कर दें। ऐसे में कट्टरपंथ‍ियों को खुश करने के लिए पिलातुस ने यीशु को क्रॉस पर लटकाकर जान से मारने का आदेश दे दिया। मौत से पहले यीशु को ढेरों यातनाएं दी गईं। उनके सिर पर कांटों का ताज रखा गया। इसके बाद यीशु को गोल गोथा नाम की जगह ले जाकर सूली पर चढ़ा दिया गया। प्राण त्‍यागने से पहले यीशु ने कहा था, 'हे ईश्‍वर! मैं अपनी आत्‍मा को तेरे हाथों में सौंपता हूं।'

कैसे मनाते हैं गुड फ्राइडे
वैसे तो गुड फ्राइडे की तैयारी प्रार्थना और उपवास के रूप में 40 दिन पहले ही शुरू हो जाती है। इस दौरान शाकाहारी और सात्विक भोजन पर जोर दिया जाता है। फिर गुड फ्राइडे के दिन ईसाई धर्म को मानने वाले अनुयायी गिरिजाघर जाकर प्रभु यीशु को याद करते हैं। इस दिन भक्त उपवास के साथ प्रार्थना और मनन करते हैं। चर्च और घरों से सजावट की वस्तुएं हटा ली जाती हैं या उन्हें कपडे़ से ढक दिया जाता है। गुड फ्राइडे के दिन ईसा के अंतिम सात वाक्यों की विशेष व्याख्या की जाती है, जो क्षमा, मेल-मिलाप, सहायता और त्याग पर केंद्रित हैं। कुछ जगहों पर लोग काले कपड़े धारण कर यीशु के बलिदान दिवस पर शोक भी व्यक्त करते हैं।

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ईसा मसीह को आखिर क्यों कहा जाता है मसीहा। आइये जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें

  • ईसा ने अंतिम भोजन के समय अपने शिष्यों को यह आज्ञा दी थी कि तुम एक-दूसरे को प्रेम करो, जैसे मैंने तुमसे प्रेम किया है। यदि तुम आपस में प्रेम रखोगे तो सब जानेंगे कि तुम मेरे शिष्य हो। निर्दोष होने के बावजूद जब उन्हें क्रूस पर लटका कर मारने का दंड दिया गया तो उन्होंने सजा देने वालों को कुछ नहीं कहा। उन्होंने प्रार्थना करते हुए कहा कि हे ईश्वर इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं।
  • बाल्टिमोर कैटेशिज्म के अनुसार गुड फ्राइडे को गुड इसलिए कहा जाता है क्योंकि ईसा मसीह ने अपनी मृत्यु के बाद पुन: जीवन धारण किया और यह संदेश दिया कि हे मानव मैं सदा तुम्हारे साथ हूं और तुम्हारी भलाई करना मेरा उद्देश्य है। यहां गुड का मतलब होली (अंग्रेजी शब्द) यानि पवित्र से है। इसलिए इस गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे भी कहते हैं।
  • गुड फ्राइडे के दिन ईसाई धर्म को मानने वाले अनुयायी गिरिजाघर जाकर प्रभु यीशु को याद करते हैं। चूंकि गुड फ्राइडे प्रायश्चित्त और प्रार्थना का दिन है। अतः इस दिन गिरिजाघरों में घंटियां नहीं बजाई जातीं। लोग ईसा मसीह के प्रतीक क्रॉस को चूमकर अपने भगवान को याद करते हैं। गुड फ्राइडे के दौरान दुनियाभर के ईसाई चर्च में सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए दान देते हैं।

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ईसा मसीह की यादगार कहानियां :

1. भटके हुए लोगों की ओर ज्यादा ध्यान देना चाहिए
भटके लोगों से जुड़े एक प्रसंग के अनुसार एक गडरिया अपनी सबसे छोटी भेड़ को अपने कंधे पर उठाकर जा रहा था। थोड़ी देर बाद उसने भेड़ को कंधे से उतारा, उसे नहलाया, उसके बालों को सुखाया। गडरिए ने छोटी भेड़ को हरी खास खिलाई। वह गडरिया बहुत खुश था। ये सब ईसा मसीह देख रहे थे। वे गडरिए के पास पहुंचे और उससे पूछा कि तुम इस भेड़ की देखभाल करके बहुत खुश हो, ऐसा क्यों?

गडरिया बोला कि जब भी मैं इसे छोड़ता हूं, ये जंगल में जाकर भटक जाती है। मेरी अन्य भेड़ें रोज शाम घर आ जाती हैं, लेकिन ये ही भेड़ अपने आप वापस नहीं आती है। ये रास्ता भटक जाती है। इसी वजह से मैं इस पर खास ध्यान देता हूं, इसकी देखभाल करता हूं, ताकि ये मेरे पास ही रहे और रास्ता न भटके।

ईसा मसीह ने गडरिए की बात बहुत ध्यान से सुनी। उन्होंने शिष्यों से कहा कि इनकी बात में एक गहरा रहस्य छिपा है। एक बात ध्यान रखें कि भटके हुए लोगों पर हमें ज्यादा ध्यान देना चाहिए। जैसा ये गडरिया इस भेड़ के साथ व्यवहार करता है, वैसा ही व्यवहार भटके हुए लोगों के साथ करना चाहिए। इसी तरह रास्ता भटके लोग सही राह पर लौट सकते हैं।

2. बुरे लोग बीमार व्यक्ति की तरह होते हैं
एक अन्य प्रसंग के अनुसार एक दिन ईसा मसीह बुरे लोगों के साथ बैठकर खाना खा रहे थे। कुछ लोगों ने ईसा मसीह के शिष्यों से कहा कि तुम्हारे गुरु कैसे हैं? बुरे लोगों साथ भोजन कर रहे हैं।

शिष्यों को भी ये बात सही नहीं लगी। उन्होंने ईसा मसीह से पूछा कि आप बुरे लोगों के साथ बैठकर भोजन क्यों कर रहे हैं? प्रभु यीशू बोले कि एक बात बताओ स्वस्थ और बीमार व्यक्ति में से सबसे ज्यादा वैद्य की जरूरत किसे होती है?

सभी लोगों ने जवाब दिया कि बीमार व्यक्ति को वैद्य की जरूरत होती है। ईसा मसीह ने कहा कि मैं भी एक वैद्य ही हूं। बुरे लोग रोगी की तरह हैं। उन लोगों की बीमारी दूर करने के लिए मैं उनके साथ बैठकर खाना खाता हूं, उनके साथ रहता हूं। जिससे वे भी अच्छे इंसान बन सकें। अच्छे लोगों से पहले बुरे लोगों को सही रास्ता बताना चाहिए, क्योंकि उन्हें सही-गलत की जानकारी नहीं होती है।

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संकलन : सुषमाश्री (स्रोत : सोशल मीडिया)

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