श्रावण 2020: बेहद खास है सावन का चौथा सोमवार, ऐसे पूजा करें और सुख-संपत्ति का वरदान पाएं

fourth sawan somwar in auspicious yoga puja method  - Sakshi Samachar

सावन का चौथा सोमवार आज है 

चौथे सावन सोमवार पर बन रहे विशेष योग

पूरे विधि-विधान से व्रत-पूजा का मिलेगा शुभ फल

भगवान शिव शंकर का प्रिय मास सावन चल रहा है और सावन के प्रत्येक सोमवार का बड़ा महत्व होता है तभी तो भक्तजन इस दिन व्रत रखने के साथ ही विशेष रूप से पूजा-पाठ करते हैं ताकि भोलेनाथ की कृपा के पात्र बन सकें। 

माना जाता है कि सावन के सभी सोमवार को व्रत करने से वर्ष के पूरे सोमवार के व्रत करने पुण्य फल मिलता है। इसीलिए तो भक्तजन सोमवार को व्रत के साथ-साथ भगवान शिव शंकर की पूजा-अर्चना करते हैं। 

सावन के चौथे पर बना विशेष योग 

सावन का चौथा सोमवार 27 जुलाई को है। इस दिन सप्तमी तिथि है तथा अष्टमी तिथि का क्षय रहेगा। इसी दिन चित्रा नक्षत्र का भी संयोग बन रहा है। इस दिन पूजा से शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है। 

सावन सोमवार पूजा का शुभ मुहूर्त 

चौथे सोमवार का पूजन का शुभ समय सुबह 6:00 से 7:30 तक, 9:00 से 10:30 तक, 3:31 से 6:41 तक रहेगा और राहुकाल प्रात: 7:30 से 9:00 बजे तक रहेगा। अत: इस समय पूजन करने से बचना चाहिए।

ऐसे करें सावन सोमवार को पूजा 

* सोमवार को प्रात:काल ही स्नान करें।

* सुबह स्नान करके सफेद वस्त्र पहनें तथा काम, क्रोध, लोभ, चुगलबाजी आदि का त्याग करें।

* स्नान के उपरांत भोलेनाथ का ध्यान करके अपने घर में बने मंदिर या देवालय में श्रीगणेश के साथ शिव-पार्वती तथा नंदी की पूजा की करें।

* इस दिन आटे की पिन्नी बनाकर नंदी बैल का पूजन करें।

* सावन के प्रति सोमवार को गाय को हरा चारा खिलाएं।

* सावन सोमवार को मंदिर जाकर भोलेनाथ को प्रसादस्वरूप गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, चीनी, जल, जनेऊ, भस्म, भांग-धतूरा, चंदन-रोली, बेलपत्र, नीलकमल, कनेर, शमीपत्र, कुशा, कमल, राई और फूल धूप-दीप और श्रीफल अर्पित करें तथा दक्षिणा चढ़ाएं।

* संध्या अथवा रात्रि के समय घी-कपूर सहित धूप की आरती करके शिव का गुणगान करें।

* जितना हो सके अधिक से अधिक 'ॐ नम: शिवाय' का जाप करना चाहिए।

सावन का पांचवां व अंतिम सोमवार 3 अगस्त पूर्णिमा के दिन है। 

शिवलिंग पूजा से मिलता हो मनोवांछित फल

शिवलिंग का पूजन-अभिषेक करने से सभी देवी-देवताओं के अभिषेक का फल उसी क्षण प्राप्त हो जाता है। श्री लिंग पुराण के अनुसार शिवलिंग के मूल में ब्रह्मा, मध्य में तीनों लोकों के ईश्वर श्रीविष्णु तथा ऊपरी भाग में प्रणवसंज्ञक महादेव रूद्र सदाशिव विराजमान रहते हैं। लिंग की वेदी महादेवी अम्बिका हैं, वे (सत,रज,तम) तीनों गुणों से तथा त्रिदेवों युक्त रहती हैं। जो प्राणी उस वेदी के साथ लिंग की पूजा करता है वह शिव-पार्वती की कृपा सहजता से प्राप्त कर लेता है।

शिवलिंग पर जल से अभिषेक करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि, दूध से उत्तम संतान की प्राप्ति, गन्ने के रस से यश, मनोनुकूल पति/पत्नी की प्राप्ति, शहद से कर्ज मुक्ति, कुश के जल से रोग मुक्ति, पंचामृत से अष्टलक्ष्मी व तीर्थों के जल से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इसी प्रकार तरह-तरह के सभी शिवलिंगों की पूजा सुख-सौभाग्य एवं सिद्धि प्रदान करने वाली होती है।

इन शिव मंत्रों के जाप से पाए भगवान शिव का आशीर्वाद ....

शिव मूल मंत्र   

ॐ नमः शिवाय॥

महामृत्युंजय मंत्र

 
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

उर्वारुकमिव बन्धनानत् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

रुद्र गायत्री मंत्र

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

शिवलिंग पर भांग, धतूर बेलपत्र, पंचामृत, आदि चढाने एवं सर्पों को दूध पिलाने से जातकों की जन्मकुंडली में मारकेश ग्रहदशा, ग्रहण, पितृ एवं कालसर्प-दोष से ग्रसित पापदोषों से मुक्ति मिलती है और साधक के वंश का विस्तार होता है। 

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