...जब शम्मी कपूर ने गुस्से में मारा था सायरा बानों को थप्पड़, उनके जीवन के 5 किस्से

Shammi Kapoor Birthday Special Five Unheard Life Facts  - Sakshi Samachar

जूनियर आर्टिस्ट होने के दौरान मिलते थे 50 रुपए

20 रुपए में डांस सीखने जाते थे शम्मी कपूर

सायरा बानों को गुस्से में मार दिया था थप्पड़

21 अक्टूबर 1931को मुंबई में जन्में बॉलीवुड के एवरग्रीन एक्टर शम्मी कपूर की बर्थ एनिवर्सरी है। उनका पूरा नाम शमशेर राज कपूर था। बॉलीवुड के सुपरकूल एक्टर कहे जाने वाले शम्मी कपूर दिलफेंक थे, रिबेल थे, मस्तमौला थे, गर्दन हिला -हिलाकर अपनी यूनिक डांसिंग स्टाइल और किंग लुक से वे लोगों को अपना दीवाना बना लेते थे। सेट पर उनकी एनर्जी से पूरी टीम में जोश भर जाता था। शम्मी एक ऐसे एक्टर थे, जो बॉलीवुड में बदलाव की बयार लेकर आए। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के दूसरे कलाकारों की तरह एक जैसे किरदारों को निभाने के बजाए, हमेशा नए नए एक्सपेरीमेंट किए।

जूनियर आर्टिस्ट होने के दौरान मिलते थे 50 रुपए
साल 1931 को मुंबई में जन्मे शम्मी कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर फिल्म इंडस्ट्री के नामी एक्टर थे। घर में फिल्मी माहौल होने पर शम्मी कपूर का इंट्रेस्ट भी एक्टिंग की ओर हो गया और वह भी एक्टर बनने का सपना देखने लगे थे। वे बचपन में अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के साथ नाटकों में  चाइल्ड एक्टर का रोल करते थे। वे  थिएटर में रोल करते इतना थक जाते थे कि अगली सुबह जब स्कूल जाते तो क्लास में इस्पको लेने लगते थे।  एक दिन टीचर ने उन्हें झपकी लेते देख लिया। उन्होने शम्मी को कहा कि मैं अपने पिता को लेकर आएं। पृथ्वीराज काफी व्यस्त रहते थे तो वे अपने बड़े भाई राज कपूर को लेकर स्कूल पहुंचे। यहां पर राज कपूर और टीचर से बहस हो गई। उन्होंने कहा जिस स्कूल में कला की की इज्जत नहीं, वहां उनका भाई नहीं पढ़ेगा। उसके बाद शम्मी कपूर का एडमिशन दूसरे स्कूल में करवाया गया। साल 1948 में शमी ने सिनेमा की दुनिया में  बतौर जूनियर आर्टिस्ट अपना पहला कदम रखा। यहां उन्हें महीने का 50 रूपए मिलता था। करीब 4 साल तक शम्मी ने पृथ्वीराज थिएटर में काम किया। 1952 में कुछ फिल्मों में उन्होने क्या किया पर पर उन्हें क्रेडिट नहीं मिला।1953 में आई जीक्न ज्योति उनकी ऑफिशियल डेब्यू फिल्म बनी।

20 रुपए घंटे पर सीखते थे डांस
 शम्मी कपूर को उनकी डांसिंग स्टाइल के लिए भी जाना जाता था। उनके डांसिंग स्टाइल की खास बातें यह थीं कि वे गाने की बीट के साथ गर्दन और हांथों और पैरों  की मूवमेंट करते थे। हलांकि कि फिल्मों में आने से पहले उन्हें डांस करना बिल्कुल पसंद नहीं था।  एक इंटरव्यू में उन्होंने शम्मी ने बताया कि डांस नापसंद होने के बावजूद भी वे माटुंगा में जहां रहते थे वहां एक हॉल था जहां एक लड़की उन्हें 20 रुपए में डांस सिखाया करती थी। 

साल 1953 में रिलीज हुई फिल्म ‘जीवन ज्योति' से बतौर एक्टर शम्मी कपूर ने बॉलीवुड में कदम रखा। उन्होंने इंडस्ट्री को 'तुमसा नहीं देखा', 'कश्मीर की कली', 'जानवर' और 'पगला कहीं का' जैसी कई शानदार फिल्में दी हैं। 1950 से लेकर 1970 तक अपनी एक्टिंग और डांसिंग के जरिए सभी को दीवाना बनाने वाले शम्मी कपूर नेशनल अवॉर्ड भी जीत चुके हैं। अपनी दमदार एक्टिंग से दर्शकों के दिलों पर खास पहचान बनाने वाले शम्मी कपूर 14 अगस्त 2011 को इस दुनिया को अलविदा कह गये। उनक आखिरी फिल्म ‘रॉकस्टार’ थी जिसमें वो अपने पोते रणबीर कपूर के साथ नजर आए थे।

डांस के बीच हाथी ने सूंड में लपेट कर पटक दिया
1964 में आई फिल्म राजकुमार के  गाने 'यहां के हम हैं राजकुमार' की शूटिंग के दौरान शम्मी हाथी की  गर्दन को पकड़कर अपने ही अंदाज में डांस कर रहे थे। उसी समय हाथी ने अपनी गर्दन हिला दी। और शम्मी का पैर सूंड से लपेटकर पटक दिया। इससे उनका पैर टूट गया था। इस हादसे के बाद शम्मी कपूर  करीब तीन-चार महीने शूटिंग नहीं कर पाए। इससे पहले भी वे एक बार जंगली' फिल्म के केन अपना पैर तुड़वा चुके थे।

मधुबाला की वजह से बढ़ाया था वजन
शम्मी कपूर के शुरुआती दिनों में काफी दुबले-पतले दिखते थे। वे मधुबाला से फिल्म 'रेल का डिब्बा ' के सेट पर पहली बार मिले थे। उन दिनों शम्मी ने एक इंटरव्यू में इस बात की जानकारी दी थी कि जब मैं मधुबाला से पहली बार फिल्म के सेट पर मिला तो मैं उन्हें देखकर अपनी नजरें ही नहीं हटा पा रहा था। मुझे सचमुच ऐसा लगा जैसे मैं कि तूफान मे टकरा गया। इसके बाद शम्मी को मधुबाला के अपोजिट फिल्म  'बॉयफ्रेंड' में  कास्ट किया गया। एक दिन मधुबाला ने शम्मी से कहा कि आपके साथ काम करके मुझे लगता ही नहीं कि मैं आपकी हीरोइन हूं। मुझे लगता है आपको अपना वजन चढ़ा लेना चाहिए। शम्मी ने इस गंभीरता से ले लिया और उन्होंने जमकर बीयर पीना शुरू कर दिया। 

नरगिस ने किया शम्मी को किस देने का वादा
शम्मी कपूर को पहाड़ी गाने काफी पसंद थे। जब भी वे खाली होते थे तो वे पहाड़ी गाने गुनगुनाते हुए देखे जाते थे। बचपन में क्लासिकल गानों की भी ट्रेनिंग ली थी। हालांकि वेस्टर्न म्यूजिक से उनका वास्ता नरगिस ने कराया था। नरगिस उन दिनों फिल्म बरसात की शूटिंग कर रही थी। तभी शम्मी कपूर वहां पहुंच गए। इस दौरान शम्मी कपूर से नरगिस ने कहा कि वे दुआ करें कि उन्हे राजकुमार के साथ फिल्म 'आवारा' में काम करने का मौका मिल जाए। अगर मुझे फिल्म में काम करने का मौका मिला तो मैं तुम्हें एक किस दूंगी। हालांकि बाद में नरगिस ने उन्हें किस तो नहीं दिया लेकिन उन्हें ग्रामोफोन प्लेयर जरूर दिलाया। इसकी मांग खुद शम्मी कपूर ने ही की थी। 

सायरा बानों का मारा था थप्पड़
रिपोर्ट्स के मुताबिक शम्मी कपूर थोड़ा आशिकमिजाज के व्यक्ति थे। वे अक्सर फिल्मों की शूटिंग के दौरान फिल्मों की एक्ट्रेस के साथ फ्लर्ट किया करते थे। इस वजह से हर नई फिल्म में उनके अपोजिट मेकर्स अक्सर नई- नई एक्ट्रेस के साथ उन्हें कास्ट किया करते थे।इसके पीछे की वजह यह थी कि पुरानी एक्ट्रेसेस जो उनके साथ काम कर चुकी होती थी उनकी आदत से भलीभांति परिचित होती थी। फिल्म जंगली में उनके अपोजिट सायरा बानों को कास्ट किया गया था। शम्मी ने उनके साथ भी बाकी की हीरोइनों जैसा फ्लर्ट करना शुरू कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच एक दिन कहासुनी हो गई। इस दौरान गुस्से में सायरा को शम्मी ने एक थप्पड़ मार दिया। शम्मी कपूर की इस हरकत से सायरा गुस्से से आगबबूला हो गई और उन्होंने फिल्म छोड़ने का फैसला कर लिया। लेकिन बाद में सायरा की मां के काफी मनाने के बाद उन्होंने फिल्म की शूटिंग पूरी की जिससे यह फिल्म पूरी हो पाई।   

लिपिस्टिक से भरी थी पत्नी की मांग
शम्मी कपूर और गीता बाली की पहली मुलाकात फिल्म रंगीन रातें के सेट पर हुई थी। धीरे- धीरे दोनों के बीच मुलाकातों का यह सिलसिला बढ़ता चला गया और दोनों ने शादी का फैसला कर लिया। हालांकि उस दौरान कपूर खानदान में यह रवायत थी कि परिवार का कोई भी शख्स किसी एक्ट्रेस के साथ शादी नहीं करेगा। लेकिन शम्मी ने परिवार की इस रवायत को तोड़ने का फैसला कर लिया था। उन्ही दिनों ने जॉनी वाकर ने भागकर शादी की थी और उन्हें भी यही सलाह दी। फिर क्या था एक दिन गीता और शम्मी भी आधी रात माटुंगा के एक मंदिर में पहुंचे और शादी की। हालांकि शादी के दौरान सिंदूर लाना भूल गए  तो उन्होंने लिपिस्टिक से ही गीता की मांग भरी थी।

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