जन्मदिन विशेष: जिस आवाज से थी राजकुमार की पहचान, उसी ने छोड़ दिया था उनका साथ

Remembering Bollywood Legend Actor RajKumar on his Birthday - Sakshi Samachar

राजकुमार को छोटी मोटी बीमारियां हो भी नहीं सकतीं

राजकुमार संवादों पर विशेष ध्यान देते

मीना कुमारी के साथ खूब सराही गई जोड़ी

जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंका करते... आपके पांव देखे, बड़े खूबसूरत हैं, इन्हें जमीन पर न रखिएगा, मैले हो जाएंगे... जैसे कितने ही जबरदस्त डॉयलॉग्स के लिए आज भी लोग राजकुमार को याद करते हैं।

राजकुमार की आवाज का ही जादू था कि फिल्मों के डायलॉग्स उनकी दमदार  आवाज को ध्यान में रखकर खासतौर पर लिखे जाते थे। कई बार तो फिल्मों के सीन भी बदल दिए जाते थे क्योंकि वह राजकुमार के ऑरा को सूट नहीं करता था।

जो दिमाग में आती है, वो है उनकी आवाज

आज भी जब भी हम राजकुमार को याद करते हैं, सबसे पहली बात जो दिमाग में आती है, वो है उनकी आवाज। मगर ये भी दुर्भाग्य है कि आखिरी समय में इस लेजेंड्री ऐक्टर को अपनी आवाज से ही जूझना पड़ा था।

नब्बे के शुरुआती सालों में राजकुमार साहब गले के दर्द से जूझ रहे थे। दर्द इस कदर कष्टकारी था कि बोलना भी दुश्वार हो रहा था। उस अदाकार की आवाज ही उसका साथ छोड़ रही थी जिसकी आवाज ही उसकी पहचान थी।

राजकुमार को छोटी मोटी बीमारियां हो भी नहीं सकतीं

खैर, उन दिनों ही किसी दिन जब राजकुमार साहब अपने डॉक्टर के पास पहुंचे तो डॉक्टर ने हिचकिचाहट दिखाई। उसकी हिचकिचाहट भांपते हुए राज साहब ने कारण पूछा। जवाब आया कि आपको गले का कैंसर है।

राजकुमार- डॉक्टर! राजकुमार को छोटी मोटी बीमारियां हो भी नहीं सकतीं।

राजकुमार का जन्म अविभाजित भारत के बलोच प्रान्त में एक कश्मीरी परिवार में हुआ था और उनका असली नाम कुलभूषण पंडित था। राजकुमार पुलिस सेवा में सब इंस्पेक्टर थे और नज़म नक़वी की फिल्म रंगीली (1952) से फिल्मों में आए।

मीना कुमारी के साथ खूब सराही गई जोड़ी

राजकुमार को पहचान मिली सोहराब मोदी की फिल्म 'नौशेरवां-ए-आदिल' से। इसी साल आई फिल्म 'मदर इंडिया' में नरगिस के पति के छोटे से किरदार में भी राजकुमार खूब सराहे गए।

साठ के दशक में राजकुमार की जोड़ी मीना कुमारी के साथ खूब सराही गई और दोनों ने ‘अर्द्धांगिनी’, ‘दिल अपना और प्रीत पराई’, ‘दिल एक मंदिर’, ‘काजल’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया। यहां तक कि लंबे अरसे से लंबित फिल्म ‘पाकीजा' में काम करने को कोई नायक तैयार न हुआ, तब भी राजकुमार ने ही हामी भरी। मीना जी के अलावा वह किसी नायिका को अदाकारा मानते भी नहीं थे।

राजकुमार संवादों पर विशेष ध्यान देते

सोहराब मोदी की सरपरस्ती में फिल्मी जीवन शुरू करने के कारण यह लाजिमी था कि राजकुमार संवादों पर विशेष ध्यान देते। हुआ भी यही, बुलंद आवाज और त्रुटिहीन उर्दू के मालिक राजकुमार की पहचान एक संवाद प्रिय अभिनेता के रूप में बनी। फिल्में ही नहीं बल्कि संवाद भी राजकुमार के कद को ध्यान में रख कर लिखे जाने लगे। ‘बुलंदी’, ‘सौदागर’, ‘तिरंगा’, ‘मरते दम तक’ जैसी फिल्में इस बात का उदाहरण हैं कि फिल्में उनके लिए ही लिखी जाती रहीं।

राजकुमार अनुशासनप्रिय इंसान ही नहीं अपनी ही शर्तों पर हठी भी थे और इसी हठ के उनके कई किस्से फिल्मी गलियारों में मौजूद हैं। ऐसा ही एक किस्सा फिल्म पाकीजा का है।

फिल्म के एक दृश्य में राजकुमार, मीना कुमारी से निकाह करने के लिए उन्हें तांगे पर लिए जाते है। तभी एक शोहदा उनका पीछा करता हुआ आता है। स्क्रिप्ट के अनुसार राजकुमार उतर कर शोहदे के घोड़े की लगाम पकड़ लेते हैं और उसे नीचे उतरने को कहते हैं। शोहदा उनके हाथ पर दो-तीन कोड़े मारता है और फिर राजकुमार लगाम छोड़ देते हैं।

मामूली गली का गुंडा राजकुमार को मारे!

इस दृश्य पर राजकुमार अड़ गए। उनका कहना था कि ऐसा कैसे हो सकता है कि एक मामूली गली का गुंडा राजकुमार को मारे! होना तो यह चाहिए कि मैं उसे घोड़े से खींच कर गिरा दूं और बलभर मारूं। निर्देशक ने समझाया कि आप राजकुमार नहीं आपका किरदार सलीम खान का है। राजकुमार नहीं माने। निर्देशक ने भी शोहदे को तब तक कोड़े चलाने का आदेश किया, जब तक राजकुमार लगाम न छोड़ दें। अंततः बात राजकुमार की समझ में आ गई।

राजकुमार ने फिल्म ‘जंजीर’ महज इसलिए छोड़ दी थी क्योंकि कहानी सुनाने आए प्रकाश मेहरा के बालों में लगे सरसों के तेल की महक उन्हें नागवार गुजरी थी। अमिताभ के एक शूट की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा 'मुझे इसी कपड़े के पर्दे बनवाने हैं।' बप्पी लहिरी पर उनका कटाक्ष तो जग प्रसिद्ध है ही।

अपने अंतिम दिनों तक उसी ठसक में रहे

राजकुमार साहब अपने अंतिम दिनों तक उसी ठसक में रहे। फिल्में अपनी शर्तों पर करते रहे। फिल्में चलें न चलें वह बे-ख्याल रहते थे। बकौल राजकुमार- राजकुमार फेल नहीं होता। फिल्में फेल होती हैं।

आखिरी सालों में वह शारीरिक कष्ट में रहे मगर फिर भी अपनी तकलीफ लोगों और परिवार पर जाहिर नहीं होने दी। उनकी आखिरी प्रदर्शित फिल्म गॉड एण्ड गन रही। 3 जुलाई 1996 को राजकुमार दुनिया को अलविदा कह गए। वह जब तक रहे, अपनी शर्तों पर फिल्में करते रहे।

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