रेलवे की पटरियों पर बचपन बिताने से लेकर पुजारी की छेड़छाड़ सहने तक, ओमपुरी के 8 अनसुने किस्से

Om Puri's Childhood Struggle Untold Story - Sakshi Samachar

 हरियाणा के अंबाला में जन्मे ओमपुरी की शुक्रवार को 70वीं बर्थ एनीवर्सरी है। उनका जन्म 18 अक्टूबर, 1950 को हुआ था। ओम पुरी का फिल्म इंडस्ट्री में खासा योगदान रहा है। आज वो इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन फिल्मों में उनके योगदान के कारण वे लोगों की यादों में जीवित हैं। ओम पुरी ने 6 जनवरी, 2017 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। एक्टर की सफलता के साथ ही उनके जीवन में संघर्ष भी कम नहीं थे। ऐसे में उनकी बर्थ एनीवर्सरी पर स्ट्रगल्स के बारे में बता रहे हैं। 

  • ओमपुरी का बचपन काफी संघर्षोंभरा और दर्दनाक रहा है। उनका बचपन रेलवे ट्रैक की पटरियों के किनारें बीता था। उनके पिता रेलवे कर्मचारी थे। उन्हें जो रेलवे क्वार्टर मिला था वो ट्रैक के किनारे था। ओमपुरी ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि जब वो बमुश्किल दो से ढाई साल के रहे होंगे तभी उन्हें असहनीय दर्द से गुजरना पड़ा था। दरअसल उन्हें चेचक की बीमारी हो गई थी। इस दौरान ओमपुरी को एक चारपाई लिटाकर उनके हाथ बांध दिए गए थे। दरअसल उनके हाथ इसलिए बांधे गए थे क्योंकि वे ताकि उसे खुजला ना सके नहीं तो जख्म बढ़ने का खतरा था। ओमपुरी ने खुद इस बात का खुलासा एक इंटरव्यू में किया था।   
     
  • ओमपुरी ने बचपन में एक तोता घर लाए थे। वे उससे काफी प्यार करते थे। वे अक्सर उसे अपने हाथों से खिलाया करते थे। यहीं नहीं उसके लिए उन्होंने एक इंटों का घर बनाया था। एक दिन सुबह उसे देखने पहुंचे तो कुछ कुत्तों ने तोते के लिए बने घरों को गिरा दिया था। ईटों के गिरने से तोता दब के मर गया। तोते की मौत पर ओमपुरी काफी रोए। इसके बाद उन्होंने मिट्टी को खोदकर तोते को जमीन में दफना दिया।   
     
  • ओमपुरी ने इंटरव्यू में अपनी मां को लेकर भी किस्सा शेयर किया था। उन्होंने बताया कि उनकी मां काफी कम पढ़ी लिखी थी। हालांकि वो गीता वगैरह पढ़ लेती थी। हालांकि वो छुआ छूत को काफी मानती थी। अगर वे कहीं जा रही होती थी और रास्ते में बिल्ली रास्ता काट दे तो वे लौट आती थी। यही नहीं अगर उन पर रास्ते में कभी पानी के छीटे वगैरह पढ़ जाते तो फिर भी वे घर आते ही नहाती थी और अपने कपड़ों को धोना शुरू कर देती थी। ओमपुरी जिस मकान में रहते थे वहीं पास में ही रेलवे का स्वीपर रहता था। इस स्वीपर के बेटे ओम की दोस्ती थी। एक दिन वे उसके साथ खेलने लगे तो उनकी मां ने घर बुलाकर नहला दिया था।
     
  • ओम पुरी लगभग सात साल के थे, जब उनका परिवार भटिंडा में रह रहा था। उनके पिता, जो रेलवे स्टोर के प्रभारी थे, को चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। चार महीनों के लिए, परिवार एक दर्दनाक अवधि से गुजरा। एक अवसर पर जब उसकी माँ और वह एक ट्रेन में यात्रा कर रहे थे, तो उसकी माँ रोते हुए बाहर निकली। जब अन्य यात्रियों ने उसकी दुर्दशा सुनी, तो एक सज्जन उठे और दूसरों से कुछ पैसे इक्कठे किया ताकि परिवार को भूखा न रहना पड़े।
     
  •  एक घटना जो अक्सर पुरी को आंसू ला देती थी वह उस समय की याद थी जब उनके परिवार को रेलवे क्वार्टर खाली करने के लिए कहा गया था जबकि उसके पिता जेल में थे। उनकी मां तारा देवी ने अधिकारियों से काफी मिन्नतें की। लेकिन उन्होंने उनके मां की एक ना सुनी। हालांकि वे उस दिन तो चले गए। इन अधिकारियों को पता था कि ओम की मां छुआ छूत मानती थी। इसलिए ए एक दिन सुबह-सुबह, रेलवे अधिकारियों फिर से क्वार्टर को खाली कराने पहुंच गए। इस दौरान उनके साथ एक स्वीपर भी था। वो स्वीपर अपपने साथ किसी बॉक्स में इंसानी मल ( पोट्टी) लेकर पहुंचा था। फिर क्या था ओमपुरी की मां को वो घर खाली करना पड़ा।
     
  •  ओमपुरी के पिता के जेल में बंद होने से उनकी मां काफी परेशान थी। क्योंकि इस दौरान उनके परिवार को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। एक दिन वे अपने बेटे को लेकर कोर्ट पहुंची। इस दौरान ओमपुरी के पिता कोर्ट में अपनी पैरवी खुद कर रहे थे। इसके बाद वे जज के घर पहुंची जहां उनकी मुलाकात जज की पत्नी से हुई। इस दौरान ओम की मां तारा ने जज की पत्नी से अपने पति की रिहाई की गुहार लगाई और अपने जीवन में आ रही मुश्किलों को बताया। जब वे उनसे बात कर रही थी तो वे जमीन पर बैठी हुई थी। इस दौरान ओम अपनी मां के कपड़े खीच रहे थे लेकिन उनकी मां उन्हें देखकर इग्नोर कर रही थी। इसी दौरान जज की पत्नी घर  में से दो रोटियां और उपर गुड़ लाती हैं ओम को खाने को देती है और ओम खा लेते हैं। इसके बाद अगली पेशी पर ओम के पिता ने जज के सामने अपनी बेगुनाही को लेकर तमाम बाते बताईं। इस दौरान उन्होंने जज के सामने दलील दी की साहब जहां मै काम करता हूं वहां 15 प्लेटफार्म है आप वहां मौके पर खुद चलकर देखिए कि क्या कोई वहां से अकेले 15-20 बोरियां सीमेंट चुरा सकते है। बहरहाल जज स्टेशन पर पहुंचे वहां के हालात देखे तब जाकर उन्हें बातें समझ आई और उनके पिता को रिहा कर दिया।  
     
  •    एक घटना जो अक्सर ओमपुरी सताती रहती थी। ये उस वक्त की याद है जब उनके परिवार की माली हालत काफी खराब हो गई। घर का खर्च चलाने के लिए ओमपुरी के बड़े भाई रेलवे में कुली का काम करने लगे। वहीं ओमपुरी एक होटल में बर्तन धोने का काम करना पड़ा। उस वक्त उनकी उम्र यही कोई 14 साल के आस पास रही होगी। एक दिन शाम को ओमपुरी की मां उन्हें लेने आई। इसी दौरान उस होटल का मालिक भी ऑटो में दोनों के साथ उन्हें छोड़ने के लिए चला। उस वक्त उसने शराब पी रखी थी। इसी दौरान उसने गाड़ी रूकवाकर कुछ फल वगैरह खरीदे। इसके बाद वो घर पहुंचा। लेकिन तारा देवी उसकी नियत को भांप गईं। घर पहुंचते ही उन्होंने पड़ोस की कुछ औरतों को बुला लिया। औरतों को देख ओमपुरी के मालिक को समझ में आ गया कि कुछ इसे सारी बातें समझ में आ गई हैं। फिर क्या वो था वहां से चलता बना। लेकिन जाते जाते उसने उनकी मां से कल से इसे काम पर मत भेजना। इसके बाद ओमपुरी ने एक ढाबे पर काम करना शुरू कर दिया। 
     
  •  परिवार का पेट पालने के लिए ओम पुरी ने ढाबे पर काम करना शुरू कर दिया। यहां  वह रात में बर्तन धोते थे। दिनभर काम करते करते वह थक जाते थे, इसलिए वह दुकान के सामने एक राख के टीले के नीचे बर्तन छिपा देते थे और सुबह उन्हें धोते थे। हालांकि उनकी यह चाल एक दिन ढाबे के मालिक को पता चल गईऔर उन्हें तुरंत काम से निकाल दिया गया। मालिक को डर था कि रात में बर्तन चोरी हो सकते हैं।
     
  •  रिपोर्ट्स की मानें तो बचपन में एक बार ओमपुरी से छेड़छाड़ भी हुई थी। दरअसल जब वे काफी छोटे थे तो एक बुजुर्ग पुजारी ने एक बार उनके साथ छेड़छाड़ की थी। पुजारी ने कथित तौर पर एक पुजारी ने उनके निजी अंग को पकड़ लिया था। जब ओमपुरी को महसूस हुआ कि कुछ ठीक नहीं है, तो वह वहां से भाग निकले। हालांकि इस बात का जिक्र उन्होंने अपने घर में नहीं किया लेकिन फिर दोबारा उस व्यक्ति के घर जाना बंद कर दिया।
     
  • ओम पुरी का जन्म कब हुआ, यह कोई नहीं जानता। उसे भी नहीं। उनकी माँ ने उन्हें बताया कि उनका जन्म दशहरे के दो दिन बाद हुआ था। हालाँकि, साल 1949 या 1950 हो सकता था। बाद में, जब उन्होंने स्कूल ज्वाइन किया, उनके चाचा ने 9 मार्च 1950 को उनकी जन्मतिथि के रूप में चुना। वर्षों बाद, 1976 के आस-पास, जब वह बंबई गए, तो उन्होंने खुद को एक नई जन्मतिथि देने का फैसला किया। उन्होंने उस साल दशहरे के दो दिन बाद तारीख देखी और तब से 18 अक्टूबर को अपने जन्मदिन के रूप में चुना और रखा। उसके बाद, उन्हें अक्सर साल में दो बार जन्मदिन की शुभकामनाएं मिलती थीं।
     
  •  जब वह केवल पांच साल के थे, तब पुरी रेलवे पटरियों से कोयला इकट्ठा करते थे और इसे ईंधन के लिए घर लाते थे। एक बार, ओम और उसके दोस्त को एक अंडा मिला। ओम ने कभी नहीं देखा था लेकिन उनके दोस्त ने समझाया कि यह कुछ खाद्य था। उनकी माँ ने उन्हें इसके साथ घर में प्रवेश नहीं करने दिया। लेकिन उसने उन्हें एक खाली तेल टिन और कुछ लकड़ी दी। लड़कों ने आग जलाई, टिन के डिब्बे में अंडे को उबाला और फिर उसे स्वाद के साथ खाया। यह पहली बार था जब छोटे ओम ने मांसाहारी भोजन का स्वाद चखा था।
     
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