एनटीआर ने रील लाइफ में 17 बार निभाया कृष्ण का किरदार, रियल लाइफ में भी रहे काफी रोमांटिक

NTR married 32 Years younger Laxmi Parvati - Sakshi Samachar

एनटीआर ने 17 बार कृष्ण का रोल किया 

1942 में मामा की बेटी से शादी

हैदराबाद : मशहूर तेलुगु फिल्म एक्टर नंदमूरी तारक रामा राव को एनटीआर के नाम से जाना जाता है। 28 मई को उनका जन्मदिन है। इस वेटेरन एक्टर ने 1949 में  'मना देशम' से अपनी फिल्मी करियर की शुरूआत की थी। 300 से अधिक फिल्मों में एक्टिंग करने के अलााव एनटीआर ने कई फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी। यही नहीं, उन्होंने फिल्मों का निर्माण करने के अलावा निर्देशन भी किया। उन्होंने तेलुगु फिल्म 'ब्रह्मर्षि विश्वामित्र' का निर्देशन किया था और इसी फिल्म में उन्होंने अपने पोते व मौजूदा एक्टर जूनियर एनटीआर को बतौर बाल कलाकार के रूप में फिल्म में इंट्रड्यूस किया था।  फिल्म जगत में सराहनीय योगदान के लिए 1968 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा।

एनटीआर ने 17 बार कृष्ण का रोल किया 

एनटीआर ने तेलुगु के अतिरिक्त तेलुगु और हिन्दी फिल्मों में भी काम किया और उन्होंने अपनी करियर में कुल 17 बार भगवान श्रीकृष्ण का किरदार निभाकर एक रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने भगवान राम, कृष्ण, भीष्म, अर्जुन, कर्ण, दुर्योधन, विष्णु, शिव आदि के किरदार निभाए। उन्होंने 17 फिल्मों में कृष्ण का चरित्र निभाया था जिनमें प्रमुख हैं ‘श्री कृष्णार्जुन युधम’ ‘कर्णं’ और ‘दानवीर सूर कर्ण’। पौराणिक फिल्मों के जरिए काफी नाम और शोहरत हासिल करने के बाद एनटीआर ने बदलते वक्त के साथ व्यवस्था के खिलाफ लड़ने वाले नायक (हीरो) का किरदार निभाना शुरू किया और इस दौरान तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री को उन्होंने कई हिट फिल्में दीं। 

मामा के पास रहकर पूरी की पढ़ाई

अगर हम एनटीआर की पर्सनल लाइफ का जिक्र करें तो उनकी प्राथमिक पढ़ाई उनके गांव में हुई और उसके बाद वे विजयवाड़ा में रहने वाले अपने मामा के यहां रहने लगे। यहीं से उन्होंने अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाया। उन्होंने विजयवाड़ा के मशहूर एसएसआर और सीवीआर कॉलेजों में पढ़ाई की।  बताया जाता है कि एनटी रामाराव के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्हें बहुत कम उम्र से ही काम करना पड़ा और वह कई सालों तक विजयवाड़ा में होटलों में दूध बेचते थे। 

1942 में मामा की बेटी से शादी

इसी क्रम में एनटीआर ने जिस मामा के यहां रहते थे, उसी मामा की बेटी बसव तारकम से 1942 में शादी की। एनटीआर के 8 बेटे और 4 बेटियां हैं, जिनमें नंदमूरी हरिकृष्णा,
नंदमूरी बालाकृष्णा (एक्टर व टीडीपी विधायक), द्गुबाटी पुरंदेश्वरी, नारा भुवनेश्वरी, नंदमूरी रामकृष्णा, गारापाटी लोकेश्वरी, नंदमूरी जयकृष्णा,नंदमूरी जयशंकर, नंदमूरी साईकृष्णा, नंदमूरी मोहन कृष्णा, नंदमूरी कोटेश्वर प्रसाद, कांतमनेनी उमा महेश्वरी शामिल हैं। 

1982 में पॉलिटिक्स में एंट्री

लंबे साय तक अपनी फिल्मों से लोगों को मनोरंजित करने वाले इस एक्टर ने राजनीति में प्रवेश कर लोगों के लिए कुछ करने का मन बनाया और उसी के तहत 1982 में तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना कर सीधी राजनीति में उतरे। अपने स्टारडम और लोकप्रियता की बदौलत एनटीआर पहली ही बार में सीएम की कुर्सी पर बैठ गए। एनटीआर 1983 से 1994 के दौरान तीन बार एकीकृत आंध्र प्रदेश के सीएम बने।

लक्ष्मी पार्वती को परिवार ने नहीं किया स्वीकार

इस बीच, 1985 में उनकी पत्नी बसव तारकम की कैंसर के कारण मौत हो गई, तो एनटीआर ने  हैदराबाद के जुबलीहिल्स एरिया में कैंसर से पीड़ित गरीबों के इराज के लिए पत्नी बसव तारकम के नाम पर एक कैंसर अस्पताल स्थापित किया। 1992 में हुए आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में  टीडीपी भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई और एनटीआर एक बार फिर मुख्यमंत्री बन गए। इस बीच, 1993 में उन्होंने 70 साल की उम्र में तेलुगु लेखक (अध्यापिका) लक्ष्मी पार्वती से दूसरी शादी की, लेकिन एनटीआर के परिवार ने लक्ष्मी पार्वती को कभी स्वीकार नहीं किया। 

एनटीआर को उनके राजनीतिक जीवन में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उस वक्त एनटीआर के साथ उनकी दूसरी पत्नी लक्ष्मी पार्वती थी, तो दूसरी तरफ उनका पूरा परिवार उनके खिलाफ खड़ा था। इसी का फायदा उठाते हुए दामाद नारा चंद्रबाबू नायडू ने उन्हें सीएम की कुर्सी से बेदखल कर दिया।

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