हर मां की तरह ही थीं नरगिस, अपने बच्चों को सभ्य और शिष्ट बनाने की चाहत अंतिम समय में भी उनके दिल में थी, तभी तो...

Nargis was like every other mother, the desire to beautify her children was in her heart at the last minute too - Sakshi Samachar

एक अदाकारा के तौर पर तो नरगिस की तारीफ होती ही रही है, लेकिन एक इंसान और एक मां के तौर पर उनका व्यक्तित्व कैसा था, जानकर उनके प्रति हर किसी के मन में इज्जत और भी बढ जाती है। 

एक बार उनके बेटे और बॉलीवुड के जबरदस्त अभिनेता संजय दत्त ने एक इंटरव्यू में बताया था, जब मैंने मां का अपने नाम आखिरी संदेश सुना था, तो फूट-फूटकर रोया था। उस दिन के बाद मेरी पूरी पर्सनैलिटी ही बदल गई थी। मां नरगिस ने अपने संदेश में वो बातें कही थीं, जो हर व्यक्ति को सफल और खुशहाल जीवन जीने के लिए अपने व्यक्तित्व में जरूर शामिल करना चाहिए।

बता दें कि नरगिस का आज जन्मदिन है। नरगिस दत्त एक ऐसा नाम है, जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। यह अदाकारा सिर्फ बॉलीवुड लेजंड ही नहीं थीं बल्कि एक ऐसी इंसान थीं, जिनके व्यक्तित्व से दूसरे भी सीख लेते थे। बीमारी के चलते जब नरगिस दुनिया को अलविदा कह गईं, तो उससे पहले वह अपने बेटे संजय दत्त के नाम आखिरी पैगाम भी छोड़ गईं, जिसमें उन्होंने उन बातों की सीख दी, जो एक अच्छा इंसान बनने के लिए बेहद जरूरी हैं। आइए, जानें उन बातों के बारे में...

हमेशा विनम्र बने रहना
नरगिस ने संजय को 'हमेशा विनम्र बने रहने' के लिए कहा। ऐसे लोग जो भले ही सफल हों, लेकिन उनमें विनम्रता न हो, तो उनके आस-पास शुभचिंतक कम हो जाते हैं। जब ऐसा होता है, तब व्यक्ति की जिंदगी में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ जाती है, जो उसके लिए बुरा चाहते हैं। इस नेगेटिव छवि की वजह से व्यक्ति जब मुश्किल समय में फंसता है, तो उसे सहारा देने वाला भी कोई नहीं रह जाता।

शो-ऑफ न करना और सादगी से जीना
सफल होने का यह बिल्कुल भी अर्थ नहीं है कि शो-ऑफ करें। ऐसा करने पर दूसरे लोग चिढ़ने लग जाते हैं और दूरी बनाना शुरू कर देते हैं। दोस्त और चाहने वाले तक पर्सनैलिटी के इस दोष के कारण ज्यादा दिन तक व्यक्ति के साथ नहीं टिकते। परिवार वाले तक इस तरह के इंसान को अवॉइड करना ही बेहतर समझते हैं। वहीं सादगी से जीवन जीने पर व्यक्ति हमेशा अपनों के दिल में जगह बनाए रखता है। यह उसे प्यार के साथ ही सम्मान भी दिलाता है, जिससे उसका जीवन खुशियों से भरा रहता है।

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बड़ों का सम्मान करना
भारत में हर घर में बच्चों को बड़ों का सम्मान करना सिखाया जाता है। चाहे व्यक्ति अमीर हो या फिर गरीब, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन अगर वह उम्र में बड़ा है तो उससे सम्मान से ही पेश आना चाहिए। नरगिस की सिखाई हर बात में से इस बात पर भी संजय दत्त हमेशा अमल करते हैं। यंग एज में भले ही उन्हें रिबेल कहा जाता था, लेकिन मां के मैसेज को सुनने के बाद वह इतने बदल गए कि बड़े क्या बल्कि वह तो अपने से उम्र में छोटे व्यक्ति के साथ भी स्नेह और सम्मान से पेश आते हैं।

अपना चरित्र हमेशा बनाए रखना
चरित्र ऐसी चीज है, जिस पर एक बार उंगली उठी, तो उसका खामियाजा जिंदगी भर भुगतना पड़ सकता है। जरूरी है कि ऐसा कोई काम न किया जाए, जिससे इस पर सवाल उठे। अगर कोई इसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे, तो उस स्थिति में व्यक्ति को इसे बचाने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए। कैरेक्टर ही व्यक्ति की असली पहचान होता है, इसे खोना उसके जीवन को ही खोखला बना सकता है।

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साभार

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