वो महान गायिका, जो शराब न पीतीं तो आशा और लता को भी छोड़ देती पीछे

Legendary Singer Geeta Dutt And Her Iconic Husband Guru Dutt Story  - Sakshi Samachar

गीता दत्त का सिंगिंग करियर 

एस.डी.बर्मन ने गीता को दिए मौके

उतार-चढ़ावों भरा रहा शादीशुदा जीवन

हैदराबाद : हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में गीता दत्त (Geeta Dutt) का नाम एक ऐसी पार्श्वगायिका के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने अपनी आवाज की कशिश से लगभग तीन दशक तक श्रोताओं को मदहोश किया। लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) और आशा भोसले की तुलना में तो गीता दत्त का करियर काफी रहा। मगर इसके बावजूद इस छोटे से करियर में ही गीता दत्त ने अपनी आवाज से जो प्रभाव छोड़ा उसने उन्हें लेजेंड्री सिंगर का तमगा दे दिया। कुछ गानें गाकर ही गीता ने लता के बराबार रुतबा बना लिया। गीता दत्त को सुनने वालों की कमी नहीं है और न्यू जनरेशन में भी उनके गानें सुने जाते हैं। आज उस महान गायिका की जयंती (Birth Anniversary) है। 

23 नवंबर 1930 को बांग्लादेश के फरीदपुर में जन्मीं गीता दत्त बॉलीवुड में अपनी गायकी से एक अलग पहचान बनाई थीं। निजी जीवन की कुछ तो टीस थी जो उनकी आवाज में एक दर्द पैदा कर देती थी। चाहें जिस मिजाज के गाने हों, गीता ने जो गा दिया वो इस कदर मशहूर हुआ कि न जानें कितने दशक बीतने के बावजूद भी नया और रुहानी लगता है। 

गीता दत्त का सिंगिंग करियर 

गीता जब महज 12 वर्ष की थी तब उनका पूरा परिवार फरीदपुर (अब बंगलादेश में) से मुंबई आ गया। उनके पिता जमींदार थे। बचपन के दिनों से ही गीता दत्त का रूझान संगीत की ओर था और वह पार्श्वगायिका बनना चाहती थी। गीता ने अपनी संगीत की प्रारंभिक शिक्षा हनुमान प्रसाद से हासिल की। गीता को सबसे पहले वर्ष 1946 में फिल्म 'भक्त प्रहलाद' के लिये गाने का मौका मिला। 

एस.डी.बर्मन ने गीता को दिए मौके

गीता ने कश्मीर की कली, रसीली, सर्कस किंग जैसी कुछ फिल्मों के लिए भी गीत गाये, लेकिन इनमें से कोई भी बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई। इस बीच गीता दत्त की मुलाकात संगीतकार एस.डी.बर्मन से हुई। गीता दत्त मे एस.डी.बर्मन को फिल्मइंडस्ट्री का उभरता हुआ सितारा दिखाई दिया और उन्होंने गीता से अपनी अगली फिल्म 'दो भाई' के लिये गाने की पेशकश की।

साल 1947 में प्रदर्शित फिल्म 'दो भाई' गीता के सिने कैरियर की अहम फिल्म साबित हुई और इस फिल्म में उनका गाया यह गीत .. मेरा सुंदर सपना बीत गया .. लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। फिल्म दो भाई में अपने गाये इस गीत की कामयाबी के बाद बतौर पार्श्वगायिका गीता दत्त अपनी पहचान बनाने में सफल हो गईं। 

उतार-चढ़ावों भरा रहा शादीशुदा जीवन

गीता दत्त का फिल्मी सफर जितना सफल रहा उनका शादीशुदा जीवन उतना ही विफल रहा था। उन्होंने मशहूर एक्टर, डायरेक्टर गुरुदत्त से शादी की थी। मगर दोनों का शादीशुदा रिश्ता जिंदगी भर उतार-चढ़ावों से भरा रहा। साल 1947-1949 के बीच बॉलीवुड में बतौर प्लेबैक सिंगर राज किया था। लेकिन निजी जिंदगी में गुरुदत्त से खराब रिश्ते के चलते धीरे-धीरे उनका सिंगिंग करियर पीछे छूटता चला गया। गुरुदत्त और उनके प्यार में जब खटास आने लगी तब इसका असर गीता के प्रोफेशल करियर पर भी पड़ा था। 

रिकॉर्डिंग करते वक्त हुई गुरु दत्त से मुलाकात

बताया जाता है कि फिल्म 'बाजी' के लिए रिकॉर्डिंग करते वक्त गीता दत्त, गुरुदत्त से पहली बार मिली थीं। इस मुलाकात के बाद दोनों के बीच प्यार पनपा और 26 मई, 1953 में दोनों ने शादी कर ली। गीता और गुरुदत्त के 3 बच्चे हैं।  

मंच पर आई तो उन्हें दर्शकों ने पहचाना तक नहीं

साल 1964 में गुरुदत्त के निधन के बाद गीता दत्त भी टूट चुकी थीं। उनके बाद घर चलाने के लिए गीता को फिर काम शुरू करना पड़ा। छोटी-मोटी फीस के लिए वे स्टेज शो तक में परफॉर्म करने लगीं। कहा जाता है कि एक बार जब वह स्टेज शो करने आईं तो दर्शक उनको पहचान ही नहीं पाये। रिकॉर्डिंग में उनके खूब शराब पीकर आने के किस्से भी सुनाई देते रहे। 1971 में गीता ने ‘अनुभव’ फिल्म में गाने गाए। जीवन में इतने तनाव और दुख को दौर में भी उन्होंने इसमें ‘मुझे जां न कहो मेरी जां’ और ‘कोई चुपके से आके’ जैसे गीत गाए जो आज भी यादगार हैं। अगले साल लिवर की बीमारी से महज 42 वर्ष की उम्र में  20 जुलाई 1973 को गीता दत्त ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। 

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