Lata Mangeshkar के जीवन से जुड़े वे किस्से, क्यों की थी किशोर कुमार की शिकायत, रफी से क्यों हुआ था झगड़ा, जानिए...

Know some interesting facts of Lata Mangeshkar's life on her birthday - Sakshi Samachar

जब किशोर कुमार से हुई मुलाकात

लता ने क्यों नहीं की शादी

मोहम्मद रफी से झगड़ा

स्वर साम्राज्ञी, बुलबुले हिंद और स्वर कोकिला जैसे सारे विशेषण, जो लता मंगेशकर के लिए गढ़े गए, वे हमेशा ही नाकाफ़ी लगते रहे हैं। बीते सात दशकों से भी ज्यादा समय से वो लगातार अपनी आवाज से लोगों का मनोरंजन कर रही हैं। 20 से अधिक भाषाओं में तीस हज़ार से ज़्यादा गाने गा चुकी हैं। उनके जीवन से जुड़े कुछ रोचक किस्से—

  1. महाराष्ट्र में एक थिएटर कंपनी चलाने वाले अपने ज़माने के मशहूर कलाकार दीनानाथ मंगेशकर की बड़ी बेटी लता का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में हुआ।
  2. मधुबाला से लेकर माधुरी दीक्षित और काजोल तक हिंदी सिनेमा के स्क्रीन पर शायद ही ऐसी कोई बड़ी तारिका रही हो, जिसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज़ उधार न दी हो।
  3. बीस से अधिक भारतीय भाषाओं में लता ने 30 हज़ार से अधिक गाने गाए। 1991 में ही गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने माना था कि वे दुनिया भर में सबसे अधिक रिकॉर्ड की गई गायिका हैं।
  4. भजन, ग़ज़ल, क़व्वाली शास्त्रीय संगीत हो या फिर आम फ़िल्मी गाने, लता ने सबको एक जैसी महारत के साथ गाया।
  5. लता मंगेशकर की गायकी के दीवानों की संख्या लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में है और आधी सदी के अपने करियर में उनका कोई सानी कभी नहीं रहा।
  6. जब 'भारत छोड़ो आंदोलन' अपने शीर्ष पर था तब 1942 में सिर्फ़ 13 वर्ष की लता को छोड़कर उनके पिता दुनिया से विदा हो गए। दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था।
  7. उनके कंधों पर पूरे परिवार का ख़र्च चलाने की ज़िम्मेदारी आ गई। तब लता के पिता के दोस्त मास्टर विनायक उन्हें गायन और अभिनय की दुनिया में ले आए।
  8. उस्ताद अमान अली ख़ान और अमानत ख़ान से संगीत की शिक्षा लेने वाली लता को रोज़ी-रोटी चलाने के लिए संघर्ष शुरू करना पड़ा, उन्होंने 1942 में ही एक मराठी फ़िल्म 'किती हासिल' में गाना गाकर अपने करियर की शुरुआत की लेकिन बाद में यह गाना फ़िल्म से हटा दिया गया। इस फिल्म में उन्होंने अभिनय भी किया था।
  9. इसके पांच साल बाद भारत आज़ाद हुआ और लता मंगेशकर ने हिंदी फ़िल्मों में गायन की शुरुआत की। 'आपकी सेवा में' पहली फ़िल्म थी जिसे उन्होंने अपने गायन से सजाया लेकिन तब उनके गाने की कोई ख़ास चर्चा नहीं हुई।
  10. लता का सितारा पहली बार 1949 में चमका और ऐसा चमका कि उसकी कोई मिसाल नहीं मिलती। इसी वर्ष चार फ़िल्में रिलीज़ हुईं--'बरसात', 'दुलारी', 'महल' और 'अंदाज़'।
  11. 'महल' में उनका गाया गाना 'आएगा आने वाला आएगा' के फौरन बाद हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री ने मान लिया कि यह नई आवाज़ बहुत दूर तक जाएगी। यह वह ज़माना था जब हिंदी फ़िल्मी संगीत पर शमशाद बेग़म, नूरजहाँ और ज़ोहराबाई अंबालेवाली जैसी वज़नदार आवाज़ वाली गायिकाओं का राज चलता था।
  12. लता मंगेशकर को शुरू के वर्षों में काफ़ी संघर्ष करना पड़ा। कई फ़िल्म प्रोड्यूसरों और संगीत निर्देशकों ने यह कहकर उन्हें गाने का मौक़ा देने से इनकार कर दिया कि उनकी आवाज़ बहुत महीन है।
  13. ओपी नैयर को छोड़कर लता मंगेशकर ने हर बड़े संगीतकार के साथ काम किया। मदनमोहन की ग़ज़लें और सी रामचंद्र के भजन लोगों के मन-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ चुके हैं।
  14. पचास के दशक में नूरजहाँ के पाकिस्तान चले जाने के बाद लता मंगेशकर ने हिंदी फिल्म पार्श्वगायन में एकछत्र साम्राज्य स्थापित कर लिया। कोई ऐसी गायिका कभी नहीं आई जिसने उनके के लिए कोई ठोस चुनौती पेश की हो।
  15. बेमिसाल और सर्वदा शीर्ष पर रहने के बावजूद लता ने बेहतरीन गायन के लिए रियाज़ के नियम का हमेशा पालन किया। उनके साथ काम करने वाले हर संगीतकार ने यही कहा कि वे गाने में चार चाँद लगाने के लिए हमेशा कड़ी मेहनत करती रहीं।
  16. लता को सबसे बड़ा अवार्ड तो यही मिला है कि अपने करोड़ों प्रशंसकों के बीच उनका दर्जा एक पूजनीय हस्ती का है। वैसे फ़िल्म जगत का सबसे बड़ा सम्मान दादा साहब फ़ाल्के अवार्ड और देश का सबसे बड़ा सम्मान 'भारत रत्न' लता मंगेशकर को वर्षों पहले ही मिल चुका है।

    लता जी के दिलचस्प किस्से

    जब किशोर कुमार से हुई मुलाकात

    लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने एक साथ अनेक गीत गाए। हालांकि लता मंगेशकर और किशोर कुमार की पहली मुलाकात बहुत ही अजीब थी। 40 के दशक में लता मंगेशकर ने जब फिल्मों में गाना शुरू किया था। तब वो लोकल ट्रेन पकड़कर स्टूडियो पहुंचती थीं। रास्ते में उन्हें किशोर कुमार मिलते थे लेकिन तब दोनों एक दूसरे को नहीं जानते थे। लता को किशोर की हरकतें बहुत अजीब लगती थीं। उस वक्त वो खेमचंद प्रकाश की एक फिल्म में गाना गा रही थीं। एक दिन किशोर कुमार उनके पीछे पीछे स्टूडियो पहुंच गए। तब लता ने खेमचंद से शिकायत की। खेमचंद ने उन्हें बताया कि ये तो अशोक कुमार का छोटा भाई किशोर है। फिर खेमचंद ने दोनों की मुलाकात करवाई।

    लता ने क्यों नहीं की शादी

    पिता के गुजर जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारियां लता मंगेशकर पर आ गईं थीं। एक इंटरव्यू में लता मंगेशकर ने कहा था कि 'घर के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी मुझ पर थी। ऐसे में कई बार शादी का ख्याल आता भी तो उस पर अमल नहीं कर सकती थी। बेहद कम उम्र में ही मैं काम करने लगी थी। सोचा कि पहले सभी छोटे भाई बहनों को व्यवस्थित कर दूं। फिर बहन की शादी हो गई। बच्चे हो गए। तो उन्हें संभालने की जिम्मेदारी आ गई। इस तरह से वक्त निकलता चला गया।'

    मोहम्मद रफी से झगड़ा

    60 के दशक में लता मंगेशकर, मुकेश और तलत महमूद ने रॉयल्टी लेने के लिए एक एसोसिएशन बनाई। उन्होंने रिकॉर्डिंग कंपनी एचएमवी और प्रोड्यूसर्स से मांग की कि गायकों को गानों के लिए रॉयल्टी मिलनी चाहिए लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। तब कुछ निर्माताओं और रिकॉर्डिंग कंपनी ने मोहम्मद रफी को समझाया कि क्यों सभी रॉयल्टी मांग रहे हैं। रफी ने कहा कि उन्हें रॉयल्टी नहीं चाहिए। उनके इस कदम से सभी गायकों को धक्का पहुंचा। लता और मुकेश ने रफी को बुलाकर समझाना चाहा, लेकिन मामला उलझता ही चला गया। बैठक में लता और रफी के बीच बहस हो गई। दोनों ने एक साथ गाने से मना कर दिया था। इस तरह से साढ़े तीन साल तक यह झगड़ा चला।

    भारत रत्न सम्मान से नवाजा गया

    लता मंगेशकर को न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी सहित कई विश्वविद्यालयों में मानक उपाधि से नवाजा गया है। लता को अपने सिने करियर में मान-सम्मान बहुत मिला। वे फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला हैं, जिन्हें भारत रत्न और दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त हुआ।

Advertisement
Back to Top