इस एक्टर को यूं ही नहीं कहा जाता भारतीय सिनेमा का मार्लन ब्रैंडो, बिग बी खुद को बताते हैं इनके शिष्य

Know About South Veteran Actor Sivaji Ganesan and his Film Carrier on his birth anniversary - Sakshi Samachar

तमिल सिनेमा का शेर

फ्रांस का ‘द नाइट आफ द आर्डर एंड लेटर्स’सम्मान

1987 में TMM  पार्टी की स्थापना 

हैदराबाद : दक्षिण भारत के दिग्गज एक्टर को अमिताभ बच्चन से लेकर रजनीकातं और कमल हासन तक अपने गुरु मानते हैं। दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित दक्षिण के अभिनेताओं में शामिल शिवाजी गणेशन का असली नाम विल्लापुरम चिन्नैया गणेशन था, लेकिन वे शिवाजी गणेशन के नाम से लोगों में मशहूर हुए। 

शिवाजी गणेशन का जन्म 1 अक्टूबर 1928 को हुआ था और करीब पांच दशक तक उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए काफी नाम और शोहरत हासिल की। उन्होंने अपनी करियर में कुल 283 फिल्मों में काम किया, जिसमें तेलुगु, कन्नड, हिन्दी और मलयालम की फिल्में शामिल हैं। शिवाजी गणेशन एक्टिंग के साथ-साथ भरतनाट्यम, कत्थक, मणिपुरी सहित अन्य नृत्यकलाओं में भी पारंगत थे। वह एक ऐसे अभिनेता थे जो हर तरह के किरदार में फिट बैठते थे और अपने दौर के बाकी कलाकारों के मुकाबले काफी मशहूर और आगे थे। पौराणिक फिल्मों में भी उनके काम को काफी सराहा जाता था।

लता मंगेशकर ने बताया था तमिल सिनेमा का शेर

केवल दक्षिण मुख्य रूप से तमिलनाडु के एक्टर्स ही नहीं बल्कि बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने खुद को शिवाजी गणेशन का शिष्य बताते हुए 76 की उम्र में ट्विटर पर लिखा था, ''अविश्वसनीय प्रतिभावान कलाकार। उनका आदर व सम्मान करता हूं। मैं उनके पांव छूता हूं।"

यही नहीं, बॉलीवुड की सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने शिवाजी गणेशन को ‘तमिल सिनेमा के शेर' बताते हुए कहा था कि वे उनके लिए सिर्फ भाई ही नहीं थे, बल्कि उससे बढ़कर थे। वह गायिका के पूरे परिवार को पसंद करते थे खासकर उनकी मां की वह बहुत आदर करते थे।

फ्रांस का ‘द नाइट आफ द आर्डर एंड लेटर्स’सम्मान

शिवाजी गणेशन ने न केवल दक्षिण, बल्कि पूरे भारत और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नाम काम कमाया। वह पहले तमिल एक्टर थे जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1960 में मिस्र् की राजधानी काहिरा में आयोजित एफ्रो-एशियाई फिल्म फेस्टिवल में शिवाजी गणेशन को बेस्ट एक्टर के अवार्ड से नवाजा गया। पांच दशक से भी लंबे अपने फिल्मी करियर में शिवाजी गणेशन को कई पुरस्कारों से नवाजा गया। 20वीं सदी के उत्तरार्ध में शिवाजी गणेशन का तमिल सिनेमा पर राज था। फ्रांस का ‘द नाइट आफ द आर्डर एंड लेटर्स’सम्मान मिला था।

दादा साहब फाल्के पुरस्कार

यही नहीं, लॉस एंजल्स टाइम्स ने शिवाजी गणेशन पर प्रकाशित एक लेख में उन्हें भारतीय सिनेमा का मार्लन ब्रैंडो करार दिया था। फिल्म जगत मुख्य रूप से दक्षिण में कई भाषाओं की फिल्मों में सराहनीय योगदान के लिए उन्हें दादा साहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया गया। यही नहीं, कला के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए भारत सरकार की तरफ से पद्मश्री और पद्म विभूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

1987 में TMM  पार्टी की स्थापना 

कला और एक्टिंग में शोहरत हासिल कर चुके शिवाजी गणेशन को राजनीति उतनी रास नहीं आई और वह उसमें सफल साबित नहीं हुए। राज्यसभा सासंद रहे शिवाजी गणेशन का पॉलिटिकल करियर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पूरी तरह से डगमगाई। इसी क्रम में 1987 में उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी TMM स्थापित की, लेकिन उसमें कोई सफलता नहीं मिली। 

1989 में वे जनता दल के तमिलनाडु के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए गए, लेकिन उन्हें वहां भी सफलता हाथ नहीं लगी। इसके बाद वह खुद को सक्रिय राजनीति से दूर रखने लगे। 21 जुलाई 2001 को सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद उन्हें चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराय गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया.

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