'लक्ष्मी' बनकर जमकर बरसे अक्षय कुमार, लेकिन नहीं चल सका जादू

akshay kumar film Laxmii Review - Sakshi Samachar

फिल्म में ट्रांसजेंडरों को लेकर सोच की संकीर्णता

पहला सीन में अक्षय कुमार की एंट्री धमाकेदार

मुंबई: लंबे समय के इंतजार के बाद अक्षय कुमार और कियारा आडवाणी की 'लक्ष्मी' सोमवार (9 नवम्बर) को दिवाली वीक में डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज हो गई है। यह फिल्म तमिल मूवी 'कंचना' की हिंदी रीमेक है। 

फिल्म में ट्रांसजेंडरों को लेकर सोच की संकीर्णता और समाज में उनकी सहज स्वीकार्यता जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी सामने रखा गया है। हालांकि, इन मुद्दों और संदेशों के चक्कर में फिल्म की कहानी को कही न कही डगमगा जाती है और कुछ मौको पर इसकी मूल भावना में विरोधाभास भी साफ नजर आया है। अगर आपने राघव लॉरेंस की तमिल फिल्म 'कंचना' देखी है तो कहानी तो वही है लेकिन ट्रीटमेंट थोड़ा नया है। 

लक्ष्मी, हरियाणा के रेवाड़ी में रहने वाले आसिफ (अक्षय कुमार) और रश्मि (कियारा आडवाणी) की कहानी है, दोनों भागकर शादी कर लेते हैं। क्योंकि शादी इंटर रिलीजन है इसलिए रश्मि के मां बाप उससे नाराज हैं। आसिफ चाहता है कि उसकी पत्नी रश्मि एक बार फिर अपने परिवार से मिले और उनसे जुड़े। रश्मि के मां-बाप की शादी की सिल्वर जुबली ऐनिवर्सी है और फिर उसकी मां उसे घर बुलाती है, बस यहीं से हो जाती इस फिल्म की कहानी शुरू। 

आसिफ फैसला लेता है कि इस बार तो वो रश्मि के परिवार को मनाकर रहेगा। लेकिन घर आते वक्त आसिफ उस जमीन पर पहुंच जाता है जहां उसे नहीं जाना चाहिए था और उससे उसकी पूरी जिंदगी बदल जाती है। आसिफ हर बात पर बोलता है, 'मां कसम चूड़ियां पहन लूंगा'। और फिर उसे चूड़ियां पहननी ही पड़ती हैं क्योंकि उसके भीतर एक आत्मा आ गई है। लेकिन आसिफ ने चूड़ियां क्यों पहनी हैं, उसका एक उद्देश्य है जो बेहद इमोशनल है और वह आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा।

पहला सीन जोरदार है और अक्षय कुमार की एंट्री धमाकेदार है। अक्षय कुमार की परफॉर्मेंस में कोई कमी नहीं है लेकिन जब आपको लगता है कि फिल्म तेजी से आगे बढ़नी चाहिए तब उसके नाटकीय सीन पूरा पेस खत्म कर देते हैं। इतना जरूर है कि फिल्म में लक्ष्मी की एंट्री धमाकेदार है और अक्षय कुमार ने जो अपने किरदार को जिया है, वह तारीफ के काबिल है। एक लंबे समय बाद अक्षय ने कॉमिडी के रहते हुए भी सीरियस किरदार को उसके अंजाम तक पहुंचाया है। 

लक्ष्मी के किरदार में शरद केलकर का किरदार बहुत छोटा है मगर छाप छोड़कर जाता है। अक्षय और कियारा की जोड़ी जम नहीं रही है क्योंकि अक्षय पर उम्र हावी होती सी दिख रही है। फिल्म का पहला ही गाना ध्यान भटकाता है। इसके साथ ही इस फिल्म का हर गाना कहानी को खत्म करने का काम करता है। अगर आप अक्षय कुमार के फैन हैं तो फिल्म देख लीजिए वरना यह बेहद स्लो और बोरिंग है।

ऐक्टर: अक्षय कुमार,कियारा आडवाणी, अश्विनी कलसेकर, राजेश शर्मा, आयशा रजा, मनु ऋषि, शरद केलकर
डायरेक्टर : राघव लॉरेंस
अवधि: दो घंटे 21 मिनट
ओटीटी: डिज्नी प्लस हॉटस्टार
रेटिंग: *

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