वास्तव में 'योगी' हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ, अटल जी होते तो करते तारीफ

Uttar Pradesh CM Adityanath Proved that he is really a YOGI - Sakshi Samachar

तारीफ में एक कविता पाठ जरूर कर देते वाजपेयी

सदैव राजधर्म का किया पालन

कोरोना के खिलाफ जंग में जुटे हैं योगी

वास्तव में योगी हैं आदित्यनाथ

हैदराबाद : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज यह साबित कर दिया है कि वह सही मायनों में योगी हैं। उन्होंने यह भी साबित कर दिया है कि 'राजधर्म' का पालन करना भी उन्हें बखूबी मालूम है। आज उन्होंने यह भी साबित कर दिया कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर उन्होंने कभी दो जातियों, वर्गों या धर्म को मानने वाले लोगों के बीच फर्क नहीं किया।

तारीफ में एक कविता पाठ जरूर कर देते वाजपेयी
बेशक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी गुजरात के मुख्यमंत्री रहे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए यह नसीहत दी हो कि उन्हें 'राजधर्म' का पालन करना चाहिए, लेकिन शायद आज वह जिंदा होते तो योगी के उसी 'राजधर्म' के पालन की नियत और निष्ठा देख उनकी तारीफ में एक कविता पाठ जरूर कर देते।

सदैव राजधर्म का किया पालन
हो सकता है कि योगी आदित्यनाथ के मुस्लिम विरोधी और कट्टर हिंदुवादी होने पर किसी को कोई शक न हो। हो तो यह भी सकता है कि ओवैसी और ऐसे ही कई कट्टर धार्मिक नेताओं की तरह योगी को एक मानने वालों की भी देश में कोई कमी न हो, लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि आज उन्होंने यह साबित कर दिया है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर उन्होंने सदैव 'राजधर्म' का ही पालन किया है।

यह भी पढ़ें :  बैंक की माया : पैसे लेने गई बुजुर्ग महिला से कैशियर बोला- आपकी हो चुकी है मौत​

कोरोना के खिलाफ जंग में जुटे हैं योगी
कोरोना महामारी के खिलाफ इस जंग में जिस तरह से यूपी के मुख्यमंत्री दिन-रात जुटे हैं, उससे स्पष्ट हो जाता है कि उन्होंने यह ठान लिया है कि इस जंग में उन्होंने जीत हासिल करना ही है। सोमवार की सुबह पितृशोक की खबर पाकर योगी की आंखें नम थीं, लेकिन 'राजधर्म' के पालन में उन्होंने कोई कमी नहीं होने दी। पूर्वाश्रम की जन्मदाता माता को खत के माध्यम से उन्होंने पूर्वाश्रम के जन्मदाता पिता के जाने पर शोक जताया, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि इस वक्त अंत्येष्टि के लिए वे वहां नहीं पहुंच पाएंगे। ऐसे हालात में भी उन्होंने मां को लिखा कि कोशिश करना कि 'लॉकडाउन' के दौरान कम से कम लोग अंत्येष्टि में शरीक हों। यह उनके 'राजधर्म' का पालन करने वाला खत न भी प्रतीत हो रहा हो, पर दिल से उनके एक बेहतर 'इंसान' होने की गवाही जरूर देता है।

वास्तव में योगी हैं आदित्यनाथ
बेशक योगी तो 1994 में ही 'संन्यासी' बन गए थे, जब उन्हें अपना पुराना नाम अनिल सिंह बिष्ट का त्यागकर नया नाम दिया गया था- योगी आदित्यनाथ। लेकिन अक्सर अपने विवादित बयानों को लेकर राजनीति में उनके प्रवेश के बाद कम ही लोग उन्हें वास्तव में 'संन्यासी' मानने को तैयार होते थे। आज उन सभी लोगों के दिलों में बनी अपनी छवि में 
 बदलाव लाने में भी उन्होंने कामयाबी हासिल कर ली है। दरअसल, आज उन्होंने साबित कर दिया है कि वास्तव में उन्हें न केवल 'राजधर्म' बल्कि एक 'संन्यासी' होने के धर्म का भी बखूबी पालन करना आता है। उन्होंने साबित कर दिया कि वाकई में 'योगी' हैं आदित्यनाथ।

यह भी पढ़ें : ये है हमारा जुगाड़ू देश, मप्र के होनहारों ने 10 रुपये में बनाया 200 का मास्क​

- सुषमाश्री

Advertisement
Back to Top