विशेष : शेक्सपियर की पुण्यतिथि पर ही क्यों मनाया जाता है 'विश्व पुस्तक दिवस', जानें कई रोचक बातें

Know Why 'World Book Day' celebrated on Shakespeare's death anniversary - Sakshi Samachar

35 नाटक और 200 से अधिक कविताएं लिखीं

असली नाम था विलियम शेक-स्पीयर्स सोंनेट्स

किताबें ही होती हैं आपकी सच्ची दोस्त

किताबें न हों तो बहुत से कार्य रह जाएंगे अधूरे

हैदराबाद : दुनिया में शायद ही आज कोई ऐसा इंसान होगा, जिसने शेक्सपियर की कहानियां पढी या सुनी नहीं होंगी या उनके लिखे नाटक का मंचन नहीं देखा होगा! शायद ही कोई होगा, जिसने शेक्सपियर का नाम कभी नहीं सुना होगा, यानि दुनिया का हर बच्चा, जवान और बूढ़ा, किसी न किसी तरह से शेक्सपियर का नाम अवश्य जानता होगा। आज यानि 22 अप्रैल को उन्हीं महान हस्ती की पुण्यतिथि है। 

35 नाटक और 200 से अधिक कविताएं लिखीं
23 अप्रैल 1564 को इस महान कवि, लेखक और नाटककार ने दुनिया को अलविदा कहा था, जिनकी कृतियों का विश्व की समस्त भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। अपने जीवन काल में उन्होंने तकरीबन 35 नाटक और 200 से अधिक कविताएं लिखीं। साहित्य-जगत में शेक्सपियर को जो स्थान प्राप्त है, उसी को देखते हुए यूनेस्को ने 1995 से और भारत सरकार ने 2001 से इस दिन को विश्व पुस्तक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। 

असली नाम था विलियम शेक-स्पीयर्स सोंनेट्स
हालाँकि आज भी बहुत कम लोग जानते होंगे कि शेक्सपियर का असली नाम विलियम शेक-स्पीयर्स सोंनेट्स था। अंग्रेज़ी से अनुवाद किया गया कॉन्टेंट-शेक्सपियर की सोनटेन कविताएं हैं, जो विलियम शेक्सपियर ने विभिन्न विषयों पर लिखी हैं। शेक्सपियर के सॉनेट्स के बारे में चर्चा या चर्चा करते समय, यह लगभग हमेशा 154 सॉनेट्स का संदर्भ होता है, जो 1609 में एक क्वार्टो में पहली बार एक साथ प्रकाशित किए गए थे। 

किताबें ही होती हैं आपकी सच्ची दोस्त 
कहते हैं कि किताबें ही आदमी की सच्ची दोस्त होती हैं और दोस्तों से ही आदमी की पहचान भी होती है। माना जाता है कि किसी व्यक्ति की किताबों का संकलन देखकर ही आप उसके व्यक्तित्व का अंदाजा लगा सकते हैं। किताबों में ही किताबों के बारे में जो लिखा है, वह भी बहुत उल्लेखनीय और विचारोत्तेजक है। मसलन टोनी मोरिसन ने लिखा है- 'कोई ऐसी पुस्तक, जो आप दिल से पढ़ना चाहते हैं, लेकिन जो लिखी न गई हो, तो आपको चाहिए कि आप ही इसे जरूर लिखें।'

किताबें न हों तो बहुत से कार्य रह जाएंगे अधूरे

अन्य किसी महान लेखक ने लिखा है कि अगर कोई यह मानता है कि यह जीवन उसे सिर्फ एक बार ही मिला है तो यह जानिए कि वह पढ़ना नहीं जानता। वास्तव में अगर किताबें न हों तो हमारे बहुत से कार्य अधूरे ही रह जाएंगे। ज्ञान, मनोरंजन और अनुभव की बात कहती ये पुस्तकें यूं ही नहीं पूजी जातीं। इनके पन्नों पर जीवन का हर अर्थपूर्ण अनुभव सहेज लिया जाए तो आने वाला कल और भी सुंदर बन सकता है। 

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विश्व पुस्तक दिवस कॉपीराइट दिवस या पुस्तक का अंतर्राष्ट्रीय दिवस 
प्रतिवर्ष 23 अप्रैल को पुस्तक दिवस मनाया जाता है। इसे विश्व पुस्तक दिवस, कॉपीराइट दिवस या पुस्तक के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में भी जाना जाता है।संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन” के द्वारा पढ़ने, प्रकाशन और कॉपीराइट को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष 23 अप्रैल की निर्धारित तिथि को विशेष संगोष्ठियों का आयोजन किया जाता है। हालांकि कोरोना वायरस के कारण इस साल ऐसा कोई आयोजन नहीं किया जा सका।

यूनेस्को द्वारा 23 अप्रैल 1995 को हुई थी शुरुआत
विश्व पुस्तक दिवस की शुरुआत यूनेस्को द्वारा 23 अप्रैल 1995 को हुई थी। पुस्तक दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य पाठकों एवं पुस्तक के बीच बढ़ती दूरी को खत्म करना है। लेकिन हकीकत यह है कि पाठक एवं पुस्तकों के बीच की दूरी बढ़ती जा रही है। पाठक शब्दों में छिपे अनुभव को पसंद करते हैं। इसके लिए बड़ा नाम जरूरी नहीं, निजी अनुभव भी पर्याप्त हैं। फिर चाहे किसी क्षेत्र विशेष की विशेषज्ञता हो या निजी जिदगी का संघर्ष। 

पुस्तक सामने रखकर पढऩे में ही आता है मजा
लॉकडाउन ने साहित्यकारों को अपनी पुस्तकें पूरा करने का भरपूर समय दिया है। कई ने अपनी पुस्तकों का लेखन कार्य पूरा कर लिया है तो कई साहित्यकारों की पुस्तकें पूरी होने को हैं। कुछ साहित्यकारों ने लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन पुस्तकों की पढ़ाई को तो एक माध्यम माना है, लेकिन कई इसे उचित नहीं मानते। उनका मानना है कि पुस्तकों को सामने रखकर पढऩे में ही मजा आता है, एकाग्रता आती है। ऑनलाइन से कई शारीरिक व मानसिक नुकसान है।

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किताबों का अस्तित्व कभी खत्म नहीं हो सकता
किताबों का अस्तित्व कभी खत्म नहीं हो सकता। आधुनिकता की बात करें तो भी यह बात हर वक्त संभव नहीं कि किताबों के स्थान पर लैपटॉप आदि से पढ़ा जाए। किताबें हर वक्त साथ निभाती हैं फिर चाहे वह बाल साहित्य हो या धार्मिक ग्रंथ। किताबों की दोस्ती हमेशा साथ निभाती है। पुस्तकों के पढऩे के ऑनलाइन प्लेटफार्म के बारे में एक साहित्यकार कहते हैं कि आज कई ऐसी साइट्स हैं, जिससे आप साहित्य की किताबें पढ़ सकते हैं। सिर्फ पढऩा ही ऑनलाइन माध्यम में 'बुक्स इन वॉयस' नामक साइट में कहानियों को सुन भी सकते हैं। 

पुस्तक दिवस की पूर्व संध्या पर बांटा साहित्य 
विश्व पुस्तक दिवस की पूर्व संध्या पर इस साल बरेली के पंडित राधेश्याम कथावाचक स्मृति समारोह समिति के सचिव कुलभूषण शर्मा ने मेगा सिटी पार्क में साहित्यिक पुस्तकों का वितरण किया। कुलभूषण शर्मा ने बताया कि कोरोना से लड़ने के लिए घर में रहना जरूरी है। घर में रहकर साहित्य पढ़ने से मन में सकारात्मक भाव पैदा होंगे।

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