जनरल (रि.)डॉ. विजय कुमार सिंह- जानिए कैसा रहा सेना से सियासत तक का सफर ?

general Dr vk singh special story on birhday  - Sakshi Samachar

जनरल (रि.)डॉ. विजय कुमार सिंह

सेने से सियासत तक का सफर

मजबूत इच्छा शक्ति की मिसाल 

जन्म दिन पर विशेष : जनरल विजय कुमार सिंह एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जो लगातार देश सेवा में लगे हुए हैं । मजबूत इच्छा शक्ति, निर्णय लेने की क्षमता, और अन्तरराष्ट्रीय मुद्दों को गंभीरता से समझना इनके विशेष गुण रहे हैं । यही वजह रहीं कि इन्हे  31 मई 2012 को थल-सेनाध्यक्ष के पद से रिटायरमेंट के बाद भारतीय राजनीति में भी काम करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

(फोटो सौजन्य सोशल मीडिया )

अपनी इस जिम्मेदारी को ये बखूबी  निभा रहे हैं और वर्तमान में गाजियाबाद लोक सभा सीट से दोबारा जीत कर मोदी सरकार, पार्ट- 2 में सड़क, परिवहन एवं राष्ट्रीय राज्यमार्ग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं ।

(फोटो सौजन्य सोशल मीडिया )
  
जनरल विजय कुमार सिंह का जन्म साल 10 मई 1951 को हुआ था । जनरल वीके सिंह का के खून में ही देश सेवा समाई हुई है। भारतीय सेना से इनका पुराना नाता रहा है । उनके पिता इन्डियन आर्मी में कर्नल थे, जबकि इनके दादा जूनियर कमीशन अफसर थे । इन्होने  बिड़ला पब्लिक स्कूल, पिलानी राजस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है । वह नेशनल डिफेंस अकादमी के छात्र भी रह चुके हैं ।

(फोटो सौजन्य सोशल मीडिया )

जनरल विजय कुमार सिंह ने साल 1 मार्च 2014 को बीजेपी ज्वाइन कर ली, जिसके बाद इन्होने 2014 के लोकसभा चुनाव कांग्रेस प्रत्याशी राजबब्बर को पराजित किया। जिसके बाद उन्हे विदेश राज्य मंत्री बनाया गया । विदेश राज्य मंत्री रहने के दौरान इन्होने सीरिया -इराक में  फंसे भारतीयों को वापस भारत लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । वहीं साल 2019 में भी उन्हे इस लोकसभा सीट से टिकट मिला और ये वर्तमान में इसी सीट से लोकसभा सांसद हैं ।

वीके सिंह की सेना में सेवा की अगर बात की जाए तो इन्होने अपना  करियर साल 14 जून 1970 को सेकंड लेफ्टिनेंट के तौर पर  राजपूत रेजीमेंट से शुरू किया था ।  वे सन 2010 से 2012 तक भारतीय सेना में जनरल के पद तैनात रहे ।  सेना में करीब  42 सालों तक अपनी सेवा देने के बाद 31 मई 2012 को सेवा निवृत्त हो गये । ये भारतीय सेना में 24वें थल-सेनाध्यक्ष रहे ।

(फोटो सौजन्य सोशल मीडिया )

आपको बतादें कि साल 2001 में जब भारतीय सेना को संसद पर हमले के बाद 'ऑपरेशन पराक्रम' के अन्तर्गत बॉर्डर पर  तैनात किया गया उस वक्त वे  ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ ऑफ ए कॉर्प्स  रूप में तैनात थे । इन्हे इनकी बेहतर सेवा के लिये परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल एवं  युद्ध सेवा मेडल के अलावा कई सम्मान दिये गये हैं । 

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