चाहते हैं शनिदेव की कृपा तो शनिवार को करें ये चार काम, मिलेगा शुभ फल

special puja tips to please shanidev on saturday - Sakshi Samachar

शनिवार को विशेष रूप से होती है शनिदेव की पूजा

शनिदेव की पूजा के साथ ही करें ये उपाय 

शनिवार को शनिदेव की पूजा विशेष रूप से उनकी कृपा प्राप्ति के लिए की जाती है। वहीं यह भी कहा जाता है कि शनिवार को पूजा करने से ज्योतिष में शनि के अशुभ प्रभाव से भी छुटकारा मिलता है। 

वहीं शनिवार के उपाय शनि ग्रह की शांति के लिए किए जाते हैं। ये उपाय व्यक्ति को शनि दोष से मुक्ति दिलाते हैं और शनि की बुरी नजर से भी बचाते हैं। इतना ही नहीं, इन उपायों को कर व्यक्ति शनि के शुभ प्रभावों को भी प्राप्त करता है। 

हम जानते ही हैं कि शनि ग्रह को कर्मफलदाता के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि वे यह व्यक्तियों को उनके कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं लेकिन जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि दोष हो तो यह उसके जीवन में परेशानियों का अंबार लगा देता है। ऐसे में शनिवार के उपाय से कुंडली में शनि दोष से भी मुक्ति मिलती है।

- शनिवार के दिन शनि देव का उपवास रखें और शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाना चाहिए। शाम को पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। ऐसे करने से आपकी कुंडली में शनि दोष दूर होगा और आप शनि की टेढ़ी नजर से बच जाएंगे। इस दिन शनि के बीज मंत्र ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः, का १०८ बार जाप करना चाहिए।

- शमी का वृक्ष घर में लगाएं और नियमित रूप से उसकी पूजा करें। इससे न सिर्फ आपके घर का वास्तुदोष दूर होगा बल्कि शनिदेव की कृपा भी बनी रहेगी। इसी तरह काले कपड़े में शमी वृक्ष की जड़ को बांधकर अपनी दायीं बाजू पर धारण करने पर शनिदेव आपका बुरा नहीं करेंगे बल्कि उन्नति में सहायक होंगे। 

- हनुमान जी की पूजा करने से सभी तरह की समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है। नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें। आप पर कभी भी शनि की बुरी नजर नहीं पड़ेगी। इस दिन हनुमान जी को अपनी क्षमता के अनुसार कुछ मीठा प्रसाद चढ़ाएं। सुंदरकांड का पाठ करने से भी विशेष लाभ मिलता है।

-शनि महाराज प्रत्येक शनिवार के दिन के दिन पीपल के वृक्ष में निवास करते हैं। इस दिन जल में चीनी एवं काला तिल मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करके तीन परिक्रमा करने से शनि प्रसन्न होते हैं। शनिवार के दिन उड़द दाल की खिचड़ी खाने से भी शनि दोष के कारण प्राप्त होने वाले कष्ट में कमी आती है।

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