गणेश संकष्टी चतुर्थी पर ऐसे करेंगे गणपति की पूजा तो मिलेगा शुभ फल, ये है महत्व, मुहूर्त व मंत्र

Significance Of Ganesh Sankashti Chaturthi puja method muhurat  - Sakshi Samachar

गणेश संकष्टी चतुर्थी की पूजा से प्रसन्न होते हैं गणपति

संकष्टी चतुर्थी पर व्रत भी किया जाता है

गणपति की पूजा खास दिन होता है संकष्टी चतुर्थी। इस दिन पूरे विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कहते हैं कि इस दिन व्रत करने से सभी विघ्न दूर हो जाते हैं और विघ्नहर्ता की कृपा से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। 

ज्ञात हो कि पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है और इस माह यानी चैत्र माह में चतुर्थी व्रत 12 मार्च, गुरुवार को है। 

ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा 

- इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाना चाहिए। स्‍नान के बाद भगवान गणेश का ध्‍यान करना चाहिए और फिर व्रत का संकल्‍प लेना चाहिए। 

- इस दिन लाल रंग का वस्त्र धारण करना बेहद शुभ माना जाता है। गणपति अथर्वशीर्ष और गणेश चालीसा से विनायक की
पूजा करना चाहिए। उन्‍हें लाल और पीले फूल अर्पित करने चाहिए।

- शुभ मुहूर्त काल में पूजा में तिल, गुड़, लड्डू, फूल, धूप, चन्दन, केला या नारियल अर्पित करें। गणपति को रोली लगानी चाहिए। व्रत कथा पढ़ें।

- भगवान गणपति को मोदक का भोग लगाएं। व्रत में केवल फलाहार करें। रात को चांद निकलने के बाद चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर व्रत खोला जाता है।

इस चतुर्थी पर कई क्षेत्रों में 21 लड्डू बनाए जाते हैं और उनमें से एक लड्डू नमक का बनता है। उपवास खोलते समय यही लड्डू खाने होते हैं और जब नमक का लड्डू आ जाए तो फिर खाना बंद कर दिया जाता है। 


मान लीजिए पहली बार में ही नमक का लड्डू आ जाए तो फिर बाकी के 20 लड्‍डू गरीब बच्चे या कोई भी छोटे बालक को दे देना चाहिए। इसी तरह जब तक नमक का लड्डू न आए खाते रहना चाहिए।

गणेश चतुर्थी का मुहूर्त 

संकष्टी चतुर्थी 12 मार्च, गुरुवार को 11:58 बजे आरंभ होगी और 13 मार्च, शुक्रवार को 8:50 बजे तक रहेगी।
चंद्रमा उदय रात 9:41 बजे पर होगा।

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गणेश मंत्र

गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्.
उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्

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