हिंदू वर्ष का अंतिम दिन होता है चैत्र अमावस्या, जानें मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Significance of chaitra amavasya muhurat puja method - Sakshi Samachar

हिंदू नववर्ष का शुभारंभ चैत्र मास में होता है। चैत्र माह के लगते ही यानी ही अगले दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से चैत्र नवरात्रि प्रारंभ होती है। उसी दिन से हिंदू नववर्ष भी आरंभ होता है।  इस बार 24 मार्च को चैत्र अमावस्या है। हिन्दू धर्म में यह तिथि बेहद महत्वपूर्ण होती है। चैत्र अमावस्या वह तिथि है जो चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है। इस तिथि के बाद हिन्दू नववर्ष शुरु हो जाता है।  माना जाता है कि चैत्र अमावस्या पर शुभ मुहूर्त में विधिवत पूजा करनी चाहिए जिससे जीवन में लाभ मिलता है और संकटों से मुक्ति भी।

ये है चैत्र अमावस्या का महत्व

हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों के तर्पण के लिए समर्पित है इसलिए इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपवास रखा जाता है। खासकर जो लोग पितृ दोष से पीड़ित हैं उनके लिए अमावस्या व्रत इस दोष के निवारण के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं अन्य माह की अमावस्या के समान चैत्र अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करना श्रेष्ठ माना गया है। ऐसा करने से पितरों को मुक्ति मिलती है।

हिंदू वर्ष का अंतिम दिन

चैत्र अमावस्या विक्रम संवत वर्ष का अंतिम दिन होता है। विक्रम संवंत को आम भाषा में हिन्दू कैलेंडर के नाम से भी जाना जाता है। चैत्र अमावस्या तिथि की समाप्ति के बाद चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि आती है जो हिन्दू वर्ष का पहला दिन होता है। कहते हैं चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की थी। नवरात्र भी हिन्दू नववर्ष की पहली तिथि से प्रारंभ होता है।

चैत्र अमावस्या का मुहूर्त

सवार्थ सिद्धी योगी- सुबह 6 बजकर 20 मिनट से अगले दिन 4 बजकर 19 मिनट तक।
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक।

चैत्र अमावस्या पर ऐसे करें पूजा 

- चैत्र अमावस्या के दिन प्रातः जल्दी उठें।
- इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी, जलाशय या कुंड आदि में स्नान करें।
- सूर्योदय के समय भगवान सूर्यदेव को जल का अर्घ्य दें।
- इस दिन कर्मकांड के साथ अपने पितरों का तर्पण करें।
- पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत रखें।
- इस दिन जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें।
- ब्राह्मणों को भोजन कराएं।

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