शारदीय नवरात्रि 2020 : तो ऐसे पड़ा मां का नाम कात्यायनी और कुछ ऐसा है इनका स्वरूप, इनकी पूजा से होते हैं ये लाभ

Sharadiya navratri sixth day mata katyayani puja benefits  - Sakshi Samachar

मां कात्यायनी की पूजा से होते हैं कई लाभ 

कुछ ऐसे पड़ा मां का नाम कात्यायनी

सुख-संपत्ति का वरदान देती है मां कात्यायनी  

शारदीय नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान है। कहते हैं कि मां कात्यायनी अपने भक्तों पर अपनी कृपा दृष्टि रखती हैं। देखा जाए तो अमरकोष में माता पार्वती के लिए दूसरा नाम है कात्यायनी। इसके अलावा माता पार्वती के अन्य नाम भी है जैसे उमा, गौरी, काली, हेमावती आदि। शक्तिवाद में उन्हें शक्ति या दुर्गा, जिसमें भद्रकाली और चंडिका भी शामिल है, कहा जाता है।

मां कात्यायनी को प्रसन्न करना कठिन नहीं है। अगर भक्तजन सच्चे मन से उनकी पूजा करते हैं तो वह शीघ्र ही प्रसन्न होकर उनको सुख-संपत्ति के साथ ही आरोग्य का वरदान भी देती है। यहां जब माता का यह नाम कात्यायनी के बारे में पढ़ते हैं तो मन में सहज ही सवाल पैदा होता है कि आखिर मां का नाम कात्यायनी कैसे पड़ा।

तो आइये यहां यही जानते हैं ....

तो ऐसे पड़ा मां का नाम कात्यायनी

पौराणिक कथाओं के अनुसार माना जाता है कि महर्षि कात्यायन ने मां दुर्गा आदिशक्ति की कठोर तपस्या की थी। उनकी घोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां ने उनके यहां जन्म लेने का वरदान दिया था। ऋषि कात्यायन के यहां जन्म लेने के कारण ही मां को कात्यायनी नाम से जाना जाता है। कात्यायनी देवी दुर्गा जी का छठा अवतार हैं।

मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी मानी गई हैं। शिक्षा प्राप्ति के क्षेत्र में प्रयासरत भक्तों को माता कात्यायनी की पूजा अवश्य उपासना करनी चाहिए।

कुछ ऐसा है मां कात्यायनी का स्वरूप

हम सब जानते ही हैं कि नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। इसीके अंतर्गत नवरात्रि के छठे दिन होती है मां कात्यायनी की पूजा।

मां कात्यायनी के स्वरूप की बात करें तो मां अत्यधिक कांतिवान है। कात्यायनी देवी का शरीर सोने के समान चमकीला है। देवी कात्यायनी का शरीर आभूषणों से सुशोभित है।

मां की चार भुजाएं हैं जिनमें एक हाथ में कमल का पुष्प दूसरे हाथ में तलवार है और मां अपने दो हाथों से अपने भक्तों को आशीर्वाद दे रही हैं। मां शेर की सवारी करती हैं और उनका सिंह गरजती हुई मुद्रा में है।

मां कात्यायनी को देवी दुर्गा का ही छठा रूप कहा जाता है। इसलिए नवरात्र के छठे दिन मां कत्यायनी की पूजा अवश्य करें। मां भक्तों की पूजा से शीघ्र ही प्रसन्न हो जाती है।

मां कात्यायनी की पूजा से होते हैं ये लाभ

नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग अवतारों की पूजा का विधान है। इसीके अंतर्गत नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है।

कहते हैं कि मां कात्यायनी की पूजा अमोघ फलदायिनी है और पूरे विधि-विधान से पूजा करने पर भक्त लाभान्वित भी होते हैं।

तो आइये यहां जानते हैं कि आखिर मां कात्यायनी की पूजा किसके लिए विशेष फलदायी होती है और किसे होता है लाभ .....

-माना जाता है कि मां कात्यायनी की पूजा से घर में सुख-शांति का आह्वान होता है। जिस घर में मां के इस स्वरूप की पूजा होती है वहां से दुख व क्लेश दूर हो जाते हैं।

-साथ ही यह भी कहते हैं कि विवाह के बाद की समस्याएं और पति-पत्नी के रिश्ते में आ रही परेशानियां भी मां कात्यायनी की पूजा व उपासना से दूर होती है।

-यह भी कहते हैं कि मां कात्यायनी की पूजा से विवाह योग्य युवा-युवतियों के विवाह में आ रही बाधा भी दूर होती है और इनकी पूजा से शीघ्र ही रिश्ता पक्का हो जाता है।

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- कहते हैं कि अगर कुंडली में बृहस्पति खराब हो तो मां कात्यायनी की पूजा करने से बृहस्पति के शुभ फल प्राप्त होने लगते हैं।

- मां कात्यायनी की पूजा से दुख, शोक, संताप, भय आदि नष्ट हो जाते हैं और भक्तों को सुख-शांति का वरदान मिलता है।

 

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