सावन स्पेशल : क्यों करते हैं शिवलिंग की आधी परिक्रमा, भूलकर भी न लगाएं पूरा चक्कर

Sawan 2020 : Half Parikrima of Shivling  - Sakshi Samachar

सोमवार से शुरू हो रहा है सावन का महीना

शिवलिंग की पूजा करते वक्त कई बातों का रखें विशेष ख्याल

श्रावण मास यानी सावन का महीना बस शुरू ही होने वाला है। हिन्दू धर्म पंचांग में सावन के महीने को बेहद शुभ माना गया है क्योंकि भगवान शंकर की उपासना का यह सबसे उपयुक्त समय होता है। शिव के उपासक सावन के महीने में श्रद्धा, भक्ति और आस्था से अपने प्रभु की वंदना करते हैं। शास्त्रों में शिव उपासना और शिवलिंग की पूजा की मर्यादा बताई गई है। कुछ नियम होते हैं, जिसे ध्यान में रखकर ही शिवलिंग की पूजा की जाती है। 

भक्त शिवलिंग की पूजा करने के बाद परिक्रमा लगाते हैं। जैसे अन्य देवताओं की मूर्ती के चारों ओर घूमकर परिक्रमा पूर्ण की जाती है, वैसे ही ज्यादातर लोग शिवलिंग के भी चारों ओर घूमकर परिक्रमा पूर्ण करते हैं, लेकिन यह गलत है। शिवलिंग परिक्रमा भी शिव पूजा विधि का एक अभिन्न अंग है। जानिए क्या है शिवलिंग परिक्रमा की विधि।

'अर्द्ध सोमसूत्रांतमित्यर्थ: शिव प्रदक्षिणीकुर्वन सोमसूत्र न लंघयेत इति वाचनान्तरात।'

शास्त्रों में शिवलिंग की आधी परिक्रमा का विधान है। इस बात को बेहद कम लोग ही जानते हैं। शिव पूजा के बाद जब भी शिवलिंग की परिक्रमा करें तो कभी भी चारों तरफ न घूमें, बल्कि आधी परिक्रमा करके फिर वहीं से वापस अपनी जगह पर लौट आएं। 

हमेशा बाईं तरफ से शुरू करें परिक्रमा

शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा बाईं ओर से शुरू कर जलाधारी तक जाकर फिर विपरीत दिशा में लौट दूसरे सिरे तक आकर परिक्रमा पूरी करें। इसे शिवलिंग की आधी परिक्रमा भी कहा जाता है। इस बात का ख्याल रखें कि परिक्रमा दाईं से कभी शुरू न करें।

जलाधारी को कभी लांघना नहीं चाहिए

सबके मन में यह सवाल होता है कि आखिर शिवलिंग की आधी परिक्रमा क्यों की जाती है। इसका उल्लेख भी पुराणों में है। माना जाता है कि शिवलिंग का जलाधारी या अरघा को ऊर्जा और शक्ति का भंडार माना जाता है। परिक्रमा के दौरान जलाधारी को लांघा जाए, तो लांघते वक्त पैर फैलने से वीर्य या रज और इनसे जुड़ी शारीरिक क्रियाओं पर इस शक्तिशाली ऊर्जा का बुरा असर हो सकता है। 

पुराणों के अनुसार, शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा से शरीर पर पांच तरह के बुरे प्रभाव पड़ते हैं। इससे देवदत्त और धनंजय वायु के प्रवाह में रुकावट पैदा हो जाती है जिससे शरीर और मन पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए शिवलिंग की अर्ध चंद्राकार प्रदक्षिणा ही करने का शास्त्रों में वर्णन है।

जलाधारी को कब लांघा जा सकता है

शास्त्रों में इस बात का उल्लेख है कि कई परिस्थितियों में अगर जलाधारी को लांघ भी लिया जाए तो कोई दोष नहीं होता है। जैसे तृण, काष्ठ, पत्ता, पत्थर, ईंट आदि से ढंके हुए जलाधारी का उल्लंघन करने से दोष नहीं लगता है, लेकिन ‘शिवस्यार्ध प्रदक्षिणा’ का मतलब शिव की आधी ही प्रदक्षिणा करनी चाहिए।

शिवलिंग से प्रवाहित होती है सकारात्मक ऊर्जा

शिवलिंग भगवान शंकर का एक अभिन्न अंग है, जो अति गर्म है, जिस कारण शिवलिंग पर जल चढ़ाने की प्रथा प्रचलित है। मन्दिरों में शिवलिंग के उपर एक घड़ा रखा होता है जिसमें से पानी की एक-2 बूंद शिवलिंग पर गिरा करती है जिससे शिवलिंग की गर्मी धीरे-धीरे शान्त होकर उसमें से सकारात्मतक ऊर्जा प्रवाहित होने लगती है। जो भक्तगणों के कष्टों को दूर करती है।

घर में भूलकर न रखें शिवलिंग

घर में शिवलिंग रखने से उसमें से निकलने वाली गर्म उर्जा परिवार के लोगों को खासकर महिलाओं को नुकसान पहुंचाती है। जैसे- सिर दर्द, स्त्री रोग, जोडो में दर्द, मन अशांत, घरेलू झगड़े, आर्थिक अस्थिरिता आदि प्रकार की समस्यायें घर में बनी रहती है।

-अनूप कुमार मिश्र (असिस्टेंट चीफ सब एडिटर)

Advertisement
Back to Top