सांपों को लेकर दिलचस्प पौराणिक कहानियां, जानिए क्या कहते हैं जीव वैज्ञानिक

Mythological Stories of snake and modern Scientific clarification - Sakshi Samachar

सांपों को लेकर दिलचस्प पौराणिक कहानियों का जिक्र आता है। कई तरह की भ्रांतियां भी हैं, जिसको लेकर हम यहां अहम जानकारी दे रहे हैं। 

नई दिल्ली: सावन के महीने में भगवान शंकर के साथ ही सांपों की पूजा का महत्व। आपके मन में सवाल कौंधता होगा कि आखिर सांपों का शिव से क्या नाता है? भगवान शंकर के गले में हमेंशा नाग क्यों लिपटे होते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों के शिवलिंग पर भी सांप लिपटे दिखते हैं। जिसे कोई मारता नहीं है। यहां तक कि सावन के महीने में कोई भी सांप को नुकसान पहुंचाने की हिम्मत नहीं जुटाता है। अगर सांप को नुकसान पहुंचे तो शिव का कोपभाजन बनना पड़ सकता है। पौराणिक गाथाओं में नागों की कई प्रजातियों का उल्लेख किया गया है। हम एक एककर इन नागों के बारे में बतलाते हैं। 

शिव के गले में लिपटे सांप का मतलब

भगवान शिव के गले में लिपटे सांप का गूढ़ महत्व है। इसका धार्मिक के अलावा गूढ़ अर्थ ये है कि प्रकृति में कोई जीव कितना ही जहरीला क्यों न हो, उसका महत्व है। उसे मारना या फिर नष्ट करना कतई उचित नहीं है। पर्यावरण संतुलन के लिए हर तरह के जीवों का धरती पर रहना बेहद जरूरी है। पौराणिक काल से ही सांपों को लेकर कई तरह की किंवदंतियां प्रचलित है। खासकर सावन के महीने में सांपों के अस्तित्व को लेकर कई तरह के अंधविश्वास और धार्मिक मान्यताएं प्रचलित है। 

सांपों को लेकर भ्रांतियां? 

सांपों को लेकर सबसे बड़ी भ्रांति ये है कि सांप को इच्छाधारी भी बतलाया गया है। आधुनिक विज्ञान के मुताबिक सांप इच्छाधारी नहीं होते हैं। साथ ही वो बदला लेने की प्रवृति भी नहीं रखते हैं। अक्सर फिल्मी कहानियों में इस तरह की बातें हम देखते और सुनते हैं। सांपों के पास मणि होने की बात भी कोरी गप्प है। जीव विज्ञान मानता है कि सांप मणिधारी नहीं होते हैं। 

एक और भ्रांति है कि सांप को अगर कोई मारे तो मारने वाले की तस्वीर सांप के आंखों में उतर आती है और फिर सांप के रिश्तेदार बदला लेते हैं। वैज्ञानिक इस तथ्य को भी पूरी तरह गलत मानते हैं। जानकारों की मानें तो सांप को जिस जगह मारा जाता है वहां उसके शरीर के तत्व गिर जाते हैं। जिससे आकर्षित होकर दूसरा सांप वहीं पहुंचता है और अगर कोई छेड़े तो वो काट भी लेता है। इसमें बदला लेने वाली कोई बात नहीं होती है। सांपों के बारे में एक और बात कही जाती है कि खुशबूदार फूलों पर सांप आते हैं। जबकि ऐसा नहीं है, दरअसल खुशबूदार फूलों पर कुछ कीट आते हैं। जिन्हें खाने के लिए सांप पहुंच जाता है। वास्तव में सांपों को फूलों की खुशबू से कोई लेना देना नहीं होता है। नागपंचमी पर सांपों को दूध पिलाने की बात भी सरासर गलत है क्योंकि सांप दूध पीते ही नहीं है। अगर जबरन उनके मुंह में दूध डाला जाय तो उनके पेट में हानिकारक तत्व बनते हैं और सांप जल्दी ही मर जाता है। लिहाजा सरकार ने सांपों को पकड़ने और उन्हें जबरन दूध पिलाने को प्रतिबंधित कर दिया है। कुछ लोग सांप के दोमुहा होने का दावा भी करते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। जीव वैज्ञानिकों के मुताबिक सांप दो मुंहे नहीं होते हैं। इसी तरह उड़ने वाले सांप भी नहीं होते हैं। 

पौैराणिक मान्यता के मुताबिक चर्चित नागों की फेहरिस्त 

1. तक्षक : तक्षक के बारे में कहा जाता है कि ये पाताल में रहते हैं। पौराणिक कहानी के मुताबिक तक्षक नाम की एक जाति थी जिसका जातीय चिन्ह सर्प था। उनका राजा परीक्षित के साथ भीषण युद्ध हुआ था। जिसमें परीक्षित की हार हुई और वे मारे गए थे। तब उनके बेटे जनमेजय ने तक्षकों के साथ युद्ध किया और उन्हें हरा दिया। दरअसल तक्षक नाग ने शमीक मुनि के शाप के मुताबिक राजा परीक्षित को डंसा था। जिसके बाद परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने नाग जाति का नाश करने के लिए प्रण लिया। 

2. शेषनाग : शेषनाग की काफी धार्मिक महत्ता है। मान्यता है कि शेषनाग के फन पर ही धरती टिकी है। पाताल लोक में इनका वास होता है। भगवान विष्णु को शेषनाग पर लेटा हुआ देखा जा सकता है। शेषनाग के हजार मस्तक होने की बात कही गई है। शेषनाग के अमर होने के चलते इन्हें 'अनंत' भी कहा जाता है। शेषनाग कश्यप ऋषि की पत्नीं कद्रू के बेटों में सबसे पराक्रमी राजा माने जाते हैं। कश्मीर का अनंतनाग जिला शेषनाग के नाम से ही रखा गया है।  

3. वासुकि : वासुकि नाग को शेषनाग का भाई माना जाता है साथ ही ये भगवान शिव के सेवक थे। वासुकि नाग विशाल और लंबे शरीर वाले माने जाते हैं। वासुकी नाग को ही रस्सी बनाकर समुद्र मंथन करने की बात कही गई है। त्रिपुरदाह के समय वासुकी शिव के धनुष की डोर बने थे। 

4. कर्कोटक : कर्कोटक या फिर ऐरावत नाग का इलाका पंजाब की इरावती नदी के आसपास है। कर्कोटक शिव के एक गण और नागों के राजा थे। माना जाता है कि एक बार नल ने कर्कोटक को बचाया था। इसके बाद कर्कोटक ने नल को डस लिया। जिसके बाद राजा नल का रंग नीला पड़ गया था। हालांकि कर्कोटक ने एक शाप के चलते ही राजा नल को डंसा था। बाद में नल को वरदान भी देने की बात कही गई। 

5. पद्म: पद्म नागों का इलाका गोमती नदी के आस पास मणिपुर में माना जाता है। असम के नागावंशी इन्हीं के वंशज बताए जाते हैं। जनमेजय के नाग यज्ञ से भयभीत होकर शेषनाग हिमालय पर, कम्बल नाग ब्रह्माजी के लोक में, शंखचूड़ मणिपुर राज्य में, कालिया नाग यमुना में, धृतराष्ट्र नाग प्रयाग में, एलापत्र ब्रह्मलोक में, कर्कोटक 
महाकाल वन और अन्य कुरुक्षेत्र में तप करने चले गए थे।

Advertisement
Back to Top