श्रावण 2020 : लाभदायक है भोलेनाथ के इन तीन अवतारों की पूजा, मिलता है सुख-संपत्ति का वरदान

lord shiva puja of this avtaar is beneficial  - Sakshi Samachar

सावन का महीना चल रहा है

सावन में विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा होती है 

सावन का महीना चल रहा है और यह भगवान शिव-शंकर का प्रिय माह माना जाता है। इस महीने भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। व्रत रखा जाता है, साथ ही उनके विशेष मंत्र जपे जाते हैं। 

यहां ये जानना जरूरी है कि सावन में भगवान शिव के अनेक रूपों का पूजन होता है और यह भक्तों को कई तरह के लाभ भी पहंचाता है।

आज हम आपको बताते हैं शिव जी के 3 अवतारों के बारे में जिनका पूजन किया जाना लाभ देने वाला माना जाता है ........

आइए यहां जानते हैं शिव-शंकर के इन तीन अवतारों के बारे में जिसकी पूजा से होगा लाभ .....

- वीरभद्र अवतार : आप सभी को बता दें कि भगवान शिव ने यह अवतार तब लिया था, जब दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में माता सती ने अपनी देह का त्याग किया था। कहते हैं जब भगवान शिव को यह ज्ञात हुआ तो उन्होंने क्रोध में अपने सिर से एक जटा उखाड़ी और उसे रोषपूर्वक पर्वत के ऊपर पटक दिया। वहीं उस जटा के पूर्वभाग से महाभंयकर वीरभद्र सामने आए थे और शिव के इस अवतार ने दक्ष के यज्ञ का विध्वंस कर दिया और दक्ष का सिर काटकर उसे मृत्युदंड दे दिया था। 


- पिप्पलाद अवतार : शिव का यह अवतार शनि पीड़ा का निवारण करने के लिए माना जाता है।
 कथा है कि- 'पिप्पलाद ने देवताओं से पूछा- क्या कारण है कि मेरे पिता दधीचि जन्म से पूर्व ही मुझे छोड़कर चले गए? देवताओं ने बताया शनिग्रह की दृष्टि के कारण ही ऐसा कुयोग बना। पिप्पलाद यह सुनकर बड़े क्रोधित हुए। उन्होंने शनि को नक्षत्र मंडल से गिरने का श्राप दे दिया। श्राप के प्रभाव से शनि उसी समय आकाश से गिरने लगे। देवताओं की प्रार्थना पर पिप्पलाद ने शनि को इस बात पर क्षमा किया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक किसी को कष्ट नहीं देंगे। तभी से पिप्पलाद का स्मरण करने मात्र से शनि की पीड़ा दूर हो जाती है। शिव महापुराण के अनुसार स्वयं ब्रह्मा ने ही शिव के इस अवतार का नामकरण किया था।'

- नंदी अवतार : आप सभी को बता दें कि भगवान शंकर का नंदीश्वर अवतार सभी जीवों से प्रेम का संदेश देता है। कथा- 'शिलाद मुनि ब्रह्मचारी थे। वंश समाप्त होता देख उनके पितरों ने शिलाद से संतान उत्पन्न करने को कहा। शिलाद ने अयोनिज और मृत्युहीन संतान की कामना से भगवान शिव की तपस्या की। तब भगवान शंकर ने स्वयं शिलाद के यहां पुत्र रूप में जन्म लेने का वरदान दिया। कुछ समय बाद भूमि जोतते समय शिलाद को भूमि से उत्पन्न एक बालक मिला। शिलाद ने उसका नाम नंदी रखा। भगवान शंकर ने नंदी को अपना गणाध्यक्ष बनाया। इस तरह नंदी नंदीश्वर हो गए। मरुतों की पुत्री सुयशा के साथ नंदी का विवाह हुआ।'

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