जानें आखिर इस बार देवउठनी एकादशी के बाद भी क्यों कम है विवाह मुहूर्त, ये है कारण

know why marriage muhurat are less after devuthani ekadashi this is the reason  - Sakshi Samachar

देवउठनी एकादशी से शुरू होंगे मंगलकार्य 

इस बार देवउठनी एकादशी के बाद भी कम होंगे विवाह मुहूर्त

इन मुहूर्तों के बाद विवाह मुहूर्त अगले साल अप्रैल में ही होंगे 

इस साल यानी 2020 में अब तक बेहद कम विवाह संपन्न हुए हैं क्योंकि एक ओर तो इस बार चतुर्मास (Chaturmaas) पांच महीनों का था, एक महीना अधिकमास (Adhik Maas)  था तो दूसरी ओर कोरोना (Coronavirus) के चलते लॉकडाउन (Lockdown) लगा और विवाह टाल दिए गए। नवरात्रि (Navratri 2020) के बाद अन्य शुभ कार्य तो शुरू हो गए पर विवाह के लिए देवउठनी एकादशी (Devuthani ekadashi) का इंतजार किया जा रहा है। 

देवउठनी एकादशी के बाद भी मंगलकार्य शुरू तो हो जाएंगे पर खास बात ये है कि उसके बाद भी विवाह के बहुत कम मुहूर्त है और अगर किसी की शादी इस नवंबर-दिसंबर के मुहूर्त में नहीं हुई तो उसे लंबा इंतजार भी करना पड़ सकता है। 


देवउठनी एकादशी से शुरू होंगे मंगलकार्य 

कार्तिक मास शुरू हो गया है और  25 नवंबर को देवउठनी एकादशी है। इस दिन से विवाह आदि शुभ कर्म फिर से शुरू हो जाएंगे। इसके बाद 11 दिसंबर तक ही विवाह के लिए शुभ मुहूर्त रहेंगे क्योंकि 15 दिसंबर से खरमास शुरू हो जाएगा। इस माह में विवाह के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। दिसबंर के बाद फिर अप्रैल में ही विवाह के मुहूर्त रहेंगे।

विवाह में मुहूर्त का महत्व 

हिंदू धर्म में  विवाह षोडश संस्कारों में एक महत्त्वपूर्ण संस्कार है। विवाह में जितना महत्त्व एक योग्य व श्रेष्ठ जीवनसाथी का होता है उतना ही महत्व श्रेष्ठ मुहूर्त व लग्न का भी होता है। हमारे सनातन धर्म में देवशयन के चार्तुमास में विवाह मुहूर्त्त का निषेध होता है जो देवोत्थान (देवउठनी) एकादशी तक जारी रहता है।

शास्त्रानुसार इस अवधि में विवाह करना वर्जित माना गया है किन्तु कभी-कभी ऐसा संयोग भी बन जाता है कि देवउठनी एकादशी के बाद भी बहुत अधिक विवाह मुहूर्त उपलब्ध नहीं होते हैं। वर्ष 2020 में ऐसा ही संयोग बनने जा रहा है जब देवउठनी के बाद लगभग 3 माह तक विवाह मुहूर्त नहीं बनेंगे। पंचांग गणानुसार 15 दिसंबर 2020 से 18 अप्रैल 2021 तक विवाह मुहूर्त का अभाव रहेगा। शास्त्रानुसार इस अवधि में विवाह करना वर्जित रहेगा। 

तो आइए यहां जानते हैं कि देवउठनी एकादशी के बाद आखिर किन कारणों से विवाह मुहूर्त का निषेध रहेगा .....

- धनु संक्रां‍ति (मलमास/खरमास) :  शास्त्रानुसार विवाह मुहूर्त्त निकालते समय मलमास/खरमास का विशेष ध्यान रखा जाता है। मलमास में विवाह मुहूर्त का अभाव होता है। 15 दिसंबर 2020 से सूर्य के धनु राशि में गोचर के साथ ही मलमास प्रारंभ हो जाएगा जो 14 जनवरी 2021 तक प्रभावशील रहेगा। अत: 15 दिसंबर 2020 से 14 जनवरी 2021 की अवधि तक मलमास होने के कारण इस अवधि में विवाह वर्जित रहेंगे।

- गुरु अस्तोदय : शास्त्रानुसार विवाह मुहूर्त के निर्णय में गुरु-शुक्र के तारे का उदित स्वरूप में होना आवश्यक माना गया है। गुरु-शुक्र के अस्त स्वरूप में रहते विवाह मुहूर्त का निषेध रहता है। आगामी 15 जनवरी 2021 से गुरु का तारा अस्त होने जा रहा है जो 13 फरवरी 2021 को उदित होगा। अत: इस अवधि में विवाह मुहूर्ताभाव में विवाह वर्जित रहेंगे।

- शुक्र अस्तोदय : शास्त्रानुसार विवाह मुहूर्त के निर्णय में गुरु-शुक्र के तारे का उदित स्वरूप में होना आवश्यक माना गया है। गुरु-शुक्र के अस्त स्वरूप में रहते विवाह मुहूर्त का निषेध रहता है। आगामी 14 फरवरी 2021 से शुक्र का तारा अस्त होने जा रहा है जो 18 अप्रैल 2021 को उदित होगा। अत: इस अवधि में विवाह मुहूर्ताभाव में विवाह वर्जित रहेंगे। इस तरह देखा जाए तो अगले साल 22 अप्रैल को ही पहला विवाह मुहूर्त रहेगा।

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तो अगर किसी विवाह योग्य युवक/युवती का विवाह नवंबर-दिसंबर के इन मुहूर्तों में नहीं होगा तो उसे अगले साल अप्रैल तक इंतजार करना पड़ेगा। 

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