श्रावण 2020 : भोलेनाथ आखिर क्यों कहलाते हैं पशुपतिनाथ, क्या है इसका कारण

know why lord shiva also known as pashupatinath what is the reason  - Sakshi Samachar

भगवान शिव का प्रिय महीना सावन चल रहा है

सावन में शिव-शंकर की विशेष पूजा की जाती है 

इसलिए शिव कहलाते हैं पशुपतिनाथ 

सावन का महीना चल रहा है जो भगवान शिव को प्रिय है। इस महीने शिवजी की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है और माना जाता है कि जो भक्त सावन में भोलेनाथ की विशेष पूजा व व्रत करता है उस पर महादेव प्रसन्न होते हैं और मनचाहा फल प्रदान करते हैं। 

सावन माह में सूर्य का नक्षत्र भ्रमण पुर्नवसु नक्षत्र के अंतिम चरण से पुष्य और अश्लेषा में रहता है। ये तीनों नक्षत्र कर्क राशि में आते हैं। कर्क जल तत्व की राशि है और इसका स्वामी चंद्र है। शिवजी चंद्र को अपने मस्तक पर धारण करते हैं। इस वजह से उन्हें चंद्र विशेष प्रिय है।

इसलिए शिव कहलाए पशुपतिनाथ

सावन माह में वर्षा का मौसम रहता है। इस काल में कई तरह के छोटे-बड़े जीवों की और वनस्पतियों की उत्पत्ति होती है। शिव इंसानों के साथ ही सभी पशुओं और वनस्पतियों के भी स्वामी हैं, इसीलिए शिवजी का एक नाम पशुपति नाथ है।

शिवजी सभी के रक्षक हैं, इस वजह से भी सावन माह में शिवजी की विशेष पूजा की जाती है। सूर्य भी सावन माह में कर्क राशि में रहता है। कर्क का स्वामी चंद्र है। श्रवण नक्षत्र की वजह से इस माह का नाम श्रावण हुआ है। इस नक्षत्र के स्वामी भगवान चंद्रदेव हैं।

सोमवार का कारक ग्रह शिवजी का प्रिय चंद्र है। इस वजह से भी शिवजी को सोमवार प्रिय है और सावन के सोमवार को भगवान शिव का विशेष पूजन करने की परंपरा है।

हम जानते ही हैं कि सावन माह में नई घास और वनस्पतियां उगती हैं। ये घास दूध देने वाले जीव खाते हैं। इस समय की उत्पन्न हुई घास में कई तरह के हानिकारक कीटाणु रहते हैं। जो कि गाय-भैंस खा लेती हैं।

हानिकारक सूक्ष्म कीटाणुओं की वजह से पशुओं का दूध भी नुकसानदायक हो सकता है। इस दूध के सेवन से बीमारियां हो सकती हैं।

आयुर्वेद के अनुसार इस समय में हरी सब्जियां और दूध के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है। भगवान शिव ने विषपान किया था, इसी वजह से सावन माह में शिवलिंग पर दूध चढ़ाया जाता है।

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