राम नवमी 2020 : जानें आखिर भगवान राम को चौदह वर्ष का वनवास ही क्यों मिला, क्या था इसका कारण

Know why lord rama got 14 years vanvaas - Sakshi Samachar

चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन मनाई जाती है राम नवमी 

भगवान राम का जन्मोत्सव है राम नवमी का पर्व 

भगवान राम ने काटा था चौदह वर्ष का वनवास 

चैत्र नवरात्रि चल रही है और इसका आखरी दिन होता है राम नवमी जब पूरे हर्षोल्लास के साथ राम नवमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन राम मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन होता है। 

राम नवमी का संबंध भगवान विष्णु के अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम से है। भगवान विष्णु ने अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना करने के लिये हर युग में अवतार धारण किए। इन्हीं में एक अवतार उन्होंने भगवान श्री राम के रुप में लिया था। 
जिस दिन भगवान श्री हरि ने राम के रूप में राजा दशरथ के यहां माता कौशल्या की कोख से जन्म लिया वह दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी का दिन था। यही कारण है कि इस तिथि को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है। चैत्र नवरात्रि का भी यह अंतिम दिन होता है।

यह तो हम जानते ही हैं कि भगवान राम ने चौदह वर्ष का वनवास काटा था और रावण का वध किया था लेकिन यहां यह सवाल उठता है कि आखिर माता कैकयी ने भगवान राम को सिर्फ चौदह वर्ष का ही वनवास क्यों दिया था। क्या था इसका कारण या फिर इसके पीछे भगवान राम की क्या मंशा थी।

आइये यहां यही जानते हैं....

भगवान राम ने त्रेतायुग में जन्म लिया था। त्रेतायुग में एक नियम हुआ करता था कि यदि कोई राजा अपनी स्वयं की इच्छा से चौदह वर्ष के लिए अपना राज सिंहासन त्याग देता है तो वह राज्य का राजा होने का उतराधिकार खो देता है। यह बात माता कैकयी बहुत अच्छी तरह से जानती थी। इसलिए माता कैकयी ने राजा दशरथ से भगवान राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा। जिससे भगवान राम चौदह वर्ष के वनवास के लिए चले जाएंगे और जिसके कारण भगवान राम अपने राज्य का उत्तराधिकारी होने का अधिकार खो देंगे।

लेकिन माता कैकयी यदि चाहती तो भगवान राम के लिए चौदह वर्ष की जगह और अधिक वनवास मांग सकती थी। माना जाता है कि जिस समय माता कैकयी ने भगवान राम के लिए चौदह वर्ष का मांगा था ठीक उसी समय से रावण की आयु केवल चौदह वर्ष की ही शेष रह गई थी। इसलिए भगवान राम ने माता सरस्वती को प्रेरणा दी कि मंथरा की बुद्धि को फेर दें और मंथरा के माध्यम से कैकयी को इस बात के लिए प्रेरित करें कि वह राजा दथरथ से कहें कि वह भगवान राम को चौदह वर्ष का वनवास दे दें।

इसी कारण से माता कैकयी ने भगवान राम की इच्छा से ही उनके लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा था क्योंकि भगवान राम का जन्म का रावण वध के लिए हुआ था। भगवान राम को रावण को मारने के बाद फिर से धरती पर धर्म की पुन: स्थापना करनी थी। जिसके लिए ही उन्होंने अपने लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा था और रावण का वध करने के बाद वह फिर से अयोध्या आ गए और फिर से अपने राज पाट को संभाला।

रावण वध के अलावा भगवान राम ने सभी कार्यों को इन्हीं चौदह वर्ष में पूरा किया था। उन्होंने बाली को अर्धमी होने की सजा दी थी और अपने प्रिय भक्त हनुमान जी से भी इसी समय में भेंट की थी। इसके अलावा अहल्या को भी उन्होंने श्राप मुक्त किया था और अपनी भक्त शबरी के जूठे बेर खाकर उनकी भक्ति को फल उन्हें अपने दर्शन के रूप में दिया था। तो इसी कारण से भगवान राम ने चौदह वर्ष का वनवास ही अपने लिए मांगा था।

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