इस दिन सूली पर लटकाए गए थे ईसा मसीह, तो फिर इसे ‘गुड’ फ्राइडे क्यों कहते हैं, चर्च में इस दिन नहीं बजती बेल

Know why this day is called good friday - Sakshi Samachar

प्रभु यीशु का बलिदान दिवस है गुड फ्राइडे

इसलिए इस दिन को कहा जाता है गुड फ्राइडे 

इस दिन चर्च में बेल नहीं बजाई जाती 

ईसा मसीह को जिस दिन सूली पर चढ़ाया गया था उस दिन शुक्रवार यानी फ्राइडे था, इसलिए इस दिन को गुड फ्राइडे मनाया जाता है। इस बार गुड फ्राइडे 10 अप्रैल को है और दो दिन बाद रविवार 12 अप्रैल को ईस्टर मनाया जाएगा।  गुड फ्राइडे पर ईसाई समुदाय के लोग चर्च जाकर विशेष प्रार्थना में भाग लेते हैं, चर्च में कई कार्यक्रम होते हैं पर इस बार हर पर्व की तरह गुड फ्राइडे का रंग भी फीका ही पड़ेगा और इन्हें भी घर में ही प्रार्थना करनी होगी। 

यह तो हम जानते ही हैं कि गुड फ्राइडे को ईसा मसीह के बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है लेकिन अक्सर मन में यह सवाल  उठता है कि जब इस दिन ईसा मसीह ने दुनिया को अलविदा कहा था, तो फिर इसे गुड फ्राइडे क्यों कहा जाता है? आखिर इसे गुड फ्राइडे कहने का क्या कारण है। 

तो आइये यहां जानते हैं ....

मानवता की भलाई के लिए ईसा मसीह ने अपनी जान को दांव पर लगा दिया था, इस कारण इसे प्रेरणास्रोत के तौर पर ‘गुड फ्राइडे’ कहा जाता है। उनका आचरण धर्म और सच के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। 
इस दिन चर्च में लोग काले कपडे़ पहनकर जाते हैं और प्रार्थना करते हैं। ईसाई धर्म के अलावा अन्य धर्म के लोग भी इस दिन चर्च में जाकर प्रार्थना करते हैं और प्रभु यीशु से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं।

यीशु को अत्याचारियों  और पापियों ने मिलकर भयंकर यातनाएं दीं और उन्हें सूली पर चढ़ा दिया गया। सूली पर चढ़ाने से पहले उन्हें कांटों का ताज पहनाया गया। इतने पर भी उनके मुंह से आखिरी वक्त में ये ही शब्द निकले, ‘हे ईश्वर, इन्हें क्षमा करें, ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं’।
 
ईसाइयों के पवित्र ग्रंथ बाइबिल में बताया गया है कि प्रभु यीशु को 6 घंटे तक सूली पर लटकाया गया था। ईसाई धर्म में बताया जाता है कि जब उन्हें सूली पर लटकाया गया था, तो आकाश में अचानक से अंधेरा हो गया। बिजली चमक रही थी इसलिए गुड फ्राइडे के दिन चर्च में कोई समारोह नहीं होता बल्कि केवल प्रार्थना सभाएं ही होती हैं। 

चर्च में इस दिन नहीं बजती बेल 

ईसाई समुदाय के लोग गुड फ्राइडे के दिन चर्च जाकर प्रभु यीशु को याद करते हैं। चूंकि गुड फ्राइडे प्रायश्चित और प्रार्थना का दिन है अतः इस दिन चर्च में घंटियां नहीं बजाई जातीं। लोग ईसा मसीह के प्रतीक क्रॉस को चूमकर उन्हें  याद करते हैं। गुड फ्राइडे के दौरान दुनियाभर के ईसाई चर्च में सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए दान दिजा जाता  हैं।
 
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