जानें इस बार क्यों खास है अधिक मास, विष्णु पूजा में रखें इन बातों का ध्यान

Know why Adhik maas is more special keep these things in mind while worshiping Lord Vishnu - Sakshi Samachar

अधिक मास में भगवान विष्णु के साथ जरूर करें मां लक्ष्मी की पूजा

विष्णु पूजा में रखे कुछ खास बातों का ध्यान

यह तो हम जानते ही हैं कि अधिक मास चल रहा है और हर बार की तरह इस बार पितृपक्ष के तुरंत बाद नवरात्रि शुरू होने के बजाय अधिक मास शुरू हो गया जो हर तीन साल में एक बार आता है। अधिक मास इस बार आश्विन माह में जिसकी वजह से ये और भी खास हो गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का सातवां महीना है आश्विन। इस मास में एक तरफ प्रकृति अपनी छटा बिखेर रही होती है, वहीं शक्ति की पूजा भी इस माह में ही संपन्न होती है। शरद ऋतु के साथ दो मास आश्विन और कार्तिक जुड़े हुए हैं, जिसमें आश्विन साधना का और कार्तिक आराधना का मास है। 

हालांकि अधिक मास यानी मलमास होने की वजह से इस बार दो आश्विन माह हो रहे हैं। मतलब यह माह 30 नहीं, बल्कि 60 दिन का है, जो 31 अक्तूबर तक रहेगा। इस वजह से नवरात्रि का पर्व इस बार 17 अक्तूबर से शुरू हो रही है। 

आश्विन मास शरद ऋतु का महीना है, जिसे धर्मगंथों में वैश्यों की ऋतु भी कहा गया है। चूंकि यह माह जीवन के अनुकूल होता है, इसलिए पुराने समय में व्यापार करने वाले लोग अश्व (घोड़े) पर माल लाद कर इस माह में निकलते थे। इस कारण भी इस महीने को आश्विन कहा जाता है। 
 
कहा जाता है कि इस माह में व्यक्ति को अपनी बुराइयों का त्याग कर मन शुद्ध करना चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा करना और कथा सुनना इन दिनों काफी उत्तम माना गया है। वैसे भी अभी अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास चल रहा है, जिसमें विष्णु भगवान की पूजा का खास महत्व बताया गया है। दरअसल, इस माह के स्वामी भगवान विष्णु हैं। इसलिए अधिक मास में उनकी विशेष रूप से आराधना की जाती है। 

शास्त्रों में कहा गया है कि इस मास में जो भगवान विष्णु का पूजन करता है उसे कई गुना फल की प्राप्ति होती है। वहीं भगवान विष्णु जी की पूजा में कुछ बातों का अवश्य ही ध्यान रखना चाहिए।

आइये यहां जानते हैं कि भगवान विष्णु की पूजा में क्या कुछ किया जाए ....

-सबसे पहली बात तो यही है कि अधिक मास में भगवान विष्णु जी की पूजा करनी चाहिए पर विष्णु जी के साथ-साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी जरूर करनी चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा करते समय उन्हें खीर के साथ पीले रंग की ही मिठाई और फल का भोग लगाना चाहिए। 

-पीपल के वृक्ष पर भगवान विष्णु का वास होता है इसलिए अधिक मास के दौरान पीपल के वृक्ष पर मीठा जल चढ़ाना लाभकारी होता है। अधिकमास के दौरान तुलसी जी के सामने घी का दीपक जलाना भी लाभकारी माना गया है।


-पद्म पुराण के अनुसार जो कोई भगवान विष्णु जी के प्रतीक शालिग्राम का दर्शन करता है। उनके प्रति मस्तक झुकाता है, उन्हें स्नान कराता है और उनकी पूजा करता है वह कोटि यज्ञों के समान पुण्य तथा कोटि गौदानों का फल पाता है। इनका स्मरण, कीर्तन, ध्यान व पूजन करने से अनेक पाप दूर हो जाते हैं।

- अधिक मास में भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से विशेष लाभ होता है। ऐसा भी माना जाता है कि अधिक मास में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से घर के सभी वास्तु दोष दूर हो जाते हैं।

अधिक मास में नहीं किये जाते ये काम 

अधिक मास में शादी, सगाई, झडुला, गृह निर्माण आरम्भ, गृहप्रवेश, मुंडन, संन्यास अथवा शिष्य दीक्षा लेना, नववधू का प्रवेश, देवी-देवता की प्राण-प्रतिष्ठा, यज्ञ, बड़ी पूजा-पाठ का शुभारंभ, कूप, बोरवेल, जलाशय खोदने जैसे पवित्र कार्य नहीं किए जाते हैं।

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