गुरुवार और संकष्टी चतुर्थी के योग में ऐसे करें गणपति के साथ नारायण की पूजा, मिलेगा शुभ फल

know how to please ganesh vishnu on sankashti chaturthi  - Sakshi Samachar

गुरुवार को गणेश संकष्टी चतुर्थी 

इस दिन गणेश के साथ करें विष्णु जी की पूजा 

चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत है जो इस बार 12 मार्च, गुरुवार को है। वैसे तो संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा की जाती है पर इस दिन गुरुवार होने से गणपति के साथ ही भगवान विष्णु और गुरु ग्रह की पूजा भी की जानी चाहिए जिससे शुभ फल मिलता है और जीवन के सारे संकट टल जाते हैं। 

वहीं यह भी माना जाता है कि इस दिन पूजा में पूरे शिव परिवार को शामिल करना चाहिए। शिव परिवार में शिवजी, माता पार्वती, गणेशजी, कार्तिकेय स्वामी, नंदी और गणेशजी की पत्नियां रिद्धि-सिद्धि शामिल हैं। इन सभी देवी-देवताओं की पूजा एक साथ करनी चाहिए। 

ऐसे करें गणेश जी के साथ विष्णु जी की पूजा 

गणेश संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने वाले भक्त को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर में सोने, चांदी, पीतल, तांबा या मिट्टी से बनी गणेश और पूरे शिव परिवार की प्रतिमाएं स्थापित करना चाहिए। 
सभी देवी-देवताओं को सिंदूर, दूर्वा, फूल, चावल, फल, प्रसाद चढ़ाएं। धूप-दीप जलाएं। श्री गणेशाय नम: मंत्र का जाप करते हुए पूजा करें। भगवान के सामने व्रत करने का संकल्प लें और पूरे दिन अन्न ग्रहण न करें। 
व्रत में फलाहार कर सकते हैं। पानी, दूध, फलों का रस आदि चीजें भी ले सकते हैं। इस पूजा में भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की मूर्तियां भी रख सकते हैं। विष्णु मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें।

पूजा में दीपक जलाकर जपें ये मंत्र

गणेशजी की पूजा में इस मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें। वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। 
निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

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इस मंत्र का सरल अर्थ यह है कि वक्र तुंड यानी मुड़ी हुई सूंड वाले, महाकाय यानी विशाल शरीर वाले, सूर्यकोटि समप्रभ यानी करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली। 
दूसरी लाइन का अर्थ यह है कि गणेशजी मेरे सारे काम बिना विघ्न पूरे करें।

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