जानें आखिर क्यों की जाती है पीपल की पूजा, महत्व व पूजा से होते हैं क्या लाभ

importance of peepal puja and it's benefits   - Sakshi Samachar

पीपल के पेड़ में देवता वास करते हैं

पीपल की पूजा से शनिदेव प्रसन्न होते हैं

पितरों को तृप्त करने के लिए भी पीपल पूजा जाता है

हिंदू धर्म में वैसे तो कई पेड़ पूजे जाते हैं पर उन सबमें पीपल के पेड़ की पूजा का अधिक महत्व है। पद्मपुराण के अनुसार पीपल का वृक्ष भगवान विष्णु का रुप है इसलिए इसे धार्मिक क्षेत्र में श्रेष्ठ देववृक्ष की पदवी मिली और इसका विधि-विधान से पूजन आरंभ हुआ। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष में साक्षात भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी का वास होता है। पुराणों में पीपल का बहुत महत्व बताया गया है।

- पीपल में पितरों का वास माना गया है। इसमें सब तीर्थों का निवास भी होता है इसीलिए मुंडन आदि संस्कार पीपल के पेड़ के नीचे करवाने का प्रचलन है।

- शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के कुप्रभाव से बचने के लिए हर शनिवार पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाकर सात बार परिक्रमा करनी चाहिए। शाम के समय पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी लाभकारी सिद्ध होता है। 

-यदि किसी की कोई कामना है तो उसकी पूर्ति के लिए पीपल के तने के चारों ओर कच्चा सूत लपेटने की भी परंपरा है। पीपल की जड़ में शनिवार को जल चढ़ाने व दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है। जब किसी की शनि की साढ़ेसाती चलती है तो पीपल के वृक्ष का पूजन तथा परिक्रमा की जाती है क्योंकि भगवान कृष्ण के अनुसार शनि की छाया इस पर रहती है। इसकी छाया यज्ञ, हवन, पूजा-पाठ, पुरान कथा आदि के लिए श्रेष्ठ मानी गई है।

-प्रत्येक शनिवार को पीपल के वृक्ष पर जल, कच्चा दूध थोड़ा चढ़ाकर, सात परिक्रमा करके सूर्य, शंकर, पीपल- इन तीनों की सविधि पूजा करें तथा चढ़े जल को नेत्रों में लगाएं और पितृ देवाय नम: भी 4 बार बोलें तो राहु+केतु, शनि+पितृ दोष का निवारण होता है।

- माना जाता है कि सूर्योदय होने से पहले पीपल पर दरिद्रता का अधिकार होता है और सूर्योदय के बाद लक्ष्मी जी का अधिकार होता है इसलिए सूर्योदय से पहले पीपल की पूजा करना निषेध माना गया है।

- पीपल के पेड़ को काटना अथवा नष्ट करना ब्रह्महत्या के समान पाप माना गया है। रात्रि में इस वृक्ष के नीचे सोना अशुभ माना जाता है। इसके निकट रहने से प्राणशक्ति बढ़ती है। इन सभी कारणों से पीपल के वृक्ष का पूजन किया जाता है।

- पीपल के वृक्ष के कई ज्योतिषीय गुण बोध माने गए हैं। पीपल को बृहस्पति ग्रह से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि पीपल का बृहस्पति से सीधा संबंध होता है। बृहस्पति को सभी ग्रहों में सबसे अधिक लाभ देने वाला ग्रह माना जाता है। बृहस्पति धन का कारक ग्रह है। बृहस्पति जब भी किसी की कुंडली में प्रवेश करते हैं, उस व्यक्ति को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने को कहा जाता है। माना जाता है कि पीपल में जल चढ़ाने से कुंडली में मौजूद कमजोर बृहस्पति मजबूत होता है और मजबूत बृहस्पति समृद्ध।

- ज्योतिष शास्त्र ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पीपल का पेड़ यथासंभव इसके स्थान से हटाया या काटा नहीं जाना चाहिए।
- पीपल की पूजा से विवाह में आ रही बाधाओं का निवारण होता है और विवाह शीघ्र संपन्न होता है। पीपल का आशीर्वाद संतान जन्म को सरल, संभव बनाकर वंश वृद्धि में सहायक होता है। पीपल की पूजा से आय का प्रवाह आसान बनता है और धनप्रवृति की राहें खुलती हैं।

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-पीपल में भगवान विष्णु का वास होता है इस कारण इस दोष से बचने के लिए रोजाना भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इसी के साथ तुलसी की माला से 'ओम नमो वासुदेवाय नमः' मंत्र का जाप करें।

-कहा जाता है पीपल की पूजा से पितृदोष से मुक्ति मिलती है और साथ ही इसे नष्ट करने से पितृदोष भी लगता है। अगर आप इस दोष के अशुभ फल से बचना चाहते हैं तो प्रत्येक अमावस्या को पितरों की शांति के लिए घर पर ही पूजा करें और हर अमावस्या को पीपल पर जल चढ़ाएं।

 

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