हिंदू नववर्ष 2077 के राजा होंगे बुध और मंत्री चंद्रमा, जानें क्या होगा इसका असर

Hindu New Year 2077 Starts From Ugadi  - Sakshi Samachar

25 मार्च से शुरू होगा हिंदू नववर्ष 

अधिकमास के कारण जुलाई में नहीं रहेंगे विवाह मुहूर्त 

हिंदू नववर्ष उगादी से शुरू होता है जो चैत्र नवरात्रि का पहला दिन भी होता है। तो माता की पूजा के साथ शुरू होता है हिंदू नववर्ष जिसका बड़ा महत्व है। हिंदू नए वर्ष से ही नया पंचांग तैयार किया जाता है और इसी आधार पर साल भर होने वाले प्रमुख व्रत और त्योहारों के बारें में बताया जाता है। किसी भी कार्य को करने से पहले हिंदू धर्म में पंचांग देखा जाता है। हिंदू नववर्ष के पहले दिन को नव संवत्सर कहा जाता है।

चैत्र प्रतिपदा उगादी इस बार 25 मार्च, बुधवार को है और इसी दिन से  नये संवत्सर 2077 का आरंभ होगा जिसका नाम प्रमादी है। ज्योतिषियों के अनुसार इस हिंदू नववर्ष का राजा बुध और मंत्री चंद्रमा रहेगा। इन ग्रहों में शत्रुता होने से के कारण बड़े पदों पर स्थित प्रशासनिक अधिकारियों और उनके सहयोगियों के बीच मतभेद हो सकते हैं। 

वहीं इस संवत्सर में अधिकमास भी आ रहा है जिसके कारण दीपावली और अन्य मुख्य त्योहार भी कुछ दिन देरी से मनाए जाएंगे। इस संवत्सर में 2 ही ग्रहण लगेंगे। जिसके कारण देश के लिए समय शुभ कहा जा सकता है।

यूं निर्धारित किये जाते हैं संवत्सर के राजा

किसी भी नए संवत्सर में राजा का चयन चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के वार के अनुसार किया जाता है। इस संवत्सर के 6 ग्रहों को मंत्रिमंडल में रखा गया है,  3 ग्रहों को मंत्रिमंडल से बाहर रखा है अर्थात इस दिन जो वार होता है उस वार के स्वामी को संवत का राजा माना जाता है।

19 साल बाद बन रहा आश्विन माह में अधिकमास

इस संवत्सर में आश्विन के दो महीने रहेंगे। 19 साल पहले ऐसा हुआ था क्योंकि अधिकमास था। हर 3 साल बाद संवत्सर में एक माह अधिकमास का भी होता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। इस व्यवस्था में एक हिंदी महीना 2 बार होता है । इसे ऐसे समझ सकते हैं कि करीब 58 से 60 दिनों तक एक ही महीना लिखा जाता है।

इस नए संवत्सर में देरी से आएगी दीपावली 

इस साल आश्विन अधिकमास होने से यानी दो आश्विन महीने होने के कारण कार्तिक माह के तीज और त्योहार 10 से 15 दिन या इससे कुछ ज्यादा देरी से आएंगे। इस साल दीपावली पर्व नवंबर माह के दूसरे सप्ताह में आएगाॉ यानी 14 नवंबर को दिवाली मनाई जाएगी और देवउठनी एकादशी पर्व 25 नवंबर को मनाया जाएगा

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इसी अधिकमास के कारण इस नये वर्ष में विवाह के मुहूर्त जुलाई में नहीं है। जून के बाद सीधे दीपावली के बाद ही होंगे विवाह के मुहूर्त। तो इस 12 की बजाए यह नव संवत्सर 13 मास का होगा।

 

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