52वां शक्तिपीठ : मां दंतेश्वरी ने दिए थे काकतीय वंश के राजा को दर्शन, तंत्र- मंत्र की है साधना स्थली

52nd Shaktipeeth : Goddess Danteshwari Gave Darshan To Kakatiya King And Tantrik Practice Tanta-Mantra - Sakshi Samachar

काकतीय वंश के राजा अन्नम देव को दिए थे माता ने दर्शन

6 भुजाओं वाली है माता की मूर्ति

दंतेवाड़ा में है मां का सिद्धपीठ

नवरात्रि शुरू हो गई है और इन नौ दिनों में भक्तजन माता रानी का अपने घर में आह्वान करते हैं, पूरे नौ दिन उनकी भक्ति भाव से पूजा करते हैं, नौ दिन तक व्रत करते हैं साथ ही माता के प्रसिद्ध मंदिरों में जाकर दर्शन भी करते हैं जिससे कि उनके संकट दूर हो सके और उनकी मनोकामना पूरी हो सके। 

दंतेवाड़ा में है मां का सिद्धपीठ
नवरात्रि में भक्तजन मां दुर्गा के कई चमत्कारी मंदिरों के दर्शन के लिए जाते हैं जिससे कि उनकी पूजा जल्द ही फलित हो और उन्हें मनचाहा वरदान मिले, ऐसा ही एक चमत्कारी मंदिर  छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी का प्राचीन सिद्धपीठ है। दंतेवाड़ा का नाम देवी दंतेश्वरी के नाम पर ही पड़ा। दंतेश्वरी यहां की पारंपरिक और पारिवारिक देवी हैं।

काकतीय वंश के राजा अन्नम देव को दिए थे माता ने दर्शन
पौराणिक कथा के अनुसार, जब काकतीय वंश के राजा अन्नम देव यहां आए तो मां दंतेश्वरी ने उन्हें दर्शन दिए। तब अन्नम देव को देवी ने वरदान दिया कि जहां तक भी वह जा सकेगा, वह जमीन उसकी होगी। वहां तक देवी उनके साथ चलती रहेंगी। परंतु देवी ने राजा के सामने एक शर्त रखी थी कि इस दौरान राजा पीछे मुड़ कर नहीं देखेंगे। राजा जहां-जहां भी जाते, देवी उनके पीछे-पीछे चलती रहतीं और उतनी जमीन पर राजा की होती गई। इस तरह यह क्रम चलता रहा।

 

अन्नम कई दिनों तक चलते रहे। चलते-चलते वह शंखिनी- डंकिनी नदी के पास आ गए। उन नदियों को पार करते समय राजा को देवी की पायल की आवाज सुनाई नहीं पड़ी। उसे लगा कि कहीं देवीजी रूक तो नहीं गई। इसी आशंका के चलते उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, तो देवी नदी पार कर रही थीं। यहीं उनकी स्थापना की गई। 14वीं सदी में चालुक्य राजाओं ने यहां भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था।

यहीं गिरा था माता सती का दांत
आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट के मुताबिक माता सती का दांत यहां गिरा था, इसलिए यह स्थान को पहले दंतेवला और अब दंतेवाड़ा के नाम से चर्चित है। नदी किनारे आठ भैरव भाइयों का आवास माना जाता है, इसलिए यह स्थल तांत्रिकों की भी साधना स्थली है। कहा जाता है कि यहां आज भी बहुत से तांत्रिक पहाड़ी गुफाओं में तंत्र विद्या की साधना कर रहे।

लोकमान्यता 
 वैसे तो माता के 51 शक्तिपीठ माने गए हैं, लेकिन बहुत से धर्माचार्य दंतेवाड़ा में विराजी मां दंतेश्वरी को 52वें शक्तिपीठ का दर्जा देते हैं। यही वजह है कि पूरे साल यहां भक्तों की भीड़ रहती है। हालांकि, इस साल कोरोना के चलते ऐसा नहीं हो सका।

6भुजाओं वाली है माता की मूर्ति
यहां देवी की षष्टभुजी काले रंग की मूर्ति स्थापित है। छह भुजाओं में देवी ने दाएं हाथ में शंख, खड्ग, त्रिशूल और बांए हाथ में घटी, पद्घ और राक्षस के बाल धारण किए हुए हैं। मंदिर में देवी के चरण चिन्ह भी मौजूद हैं।

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