माओवादियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस कर रही है आधुनिक ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल

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देश में माओवादियों की गतिविधियां तेज हो रही है

माओवादियों को मिटाने के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल

हैदराबाद : देश में माओवादियों की गतिविधियां तेज हो रही हैं। मुख्य रूप से इन दिनों तेलंगाना के आदिलाबाद, भद्रादि कोत्तागुडेम, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के सीमावर्ती जिलों में माओवादियों की गतिविधियां बढ़ गई है। इसी क्रम में माओवादियों की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए तेलंगाना पुलिस बल अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर रही हैं। वैसे तो हथियार और सुरक्षा बल के रूप में तेलंगाना पुलिस अब तक नक्सलियों पर हावी रही है।

हालांकि सीमा के दंडकारण्य (घने जंगल) में माओवादियों का वर्चस्व है। माओवादियों के वर्चस्व मिटाने/निपटने के लिए पुलिस अब अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल कर रही है। पुलिस ड्रोन कैमरा के जरिए नक्सलियों की गतिविधियों पर वीडियो और फोटो निकाल रही हैं। इस प्रकार एकत्र की गई जानकारी को केंद्रीय और सीमावर्ती बलों को प्रेषित भी किया जा रहा है।

इसके चलके सीमावर्ती राज्यों की पुलिस एकजुट होकर संयुक्त रूप से तलाशी अभियान शुरू कर दी है। इस समय छत्तीसगढ़ के बिजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, महाराष्ट्र में गड़चिरौली, आंध्र प्रदेश में पूर्वी गोदावरी, विशाखापट्टणम, ओडिशा में मलकानगिरी और कोरापुट जिलों में सीआरपीएफ बेस कैंप मौजूद हैं।

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इन जिलों की सीमावर्ती तेलंगाना के दुम्मुगेडम, चर्ला, वेंकटापुरम और वाजेडु मंडलों के अनेक ठिकानों में सीआरपीएफ कैंप स्थापित किए गए हैं। पुलिस इन बेस कैंपों से दंडकारण्य में ड्रोन कैमरों का उपयोग कर रही हैं। ड्रोन कैमरों का उपयोग नागरिक उड्डयन महानिदेशक के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है।

सुरक्षा बलों के पास इस समय 250 ग्राम वजनी नानो ड्रोन कैमरे, 250 से 2 किलोग्राम माइक्रो ड्रोन, 2 से 25-किलोग्राम छोटे ड्रोन, 150 किलोग्राम मध्यम ड्रोन और 150 किलोग्राम से अधिक वजनी ड्रोन कैमरे हैं। पुलिस इन में से नानो और माइक्रो ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल कर रही हैं।

ये ड्रोन कैमरे 250 मीटर से लेकर 400 मीटर ऊंचाई के साथ काफी दूर तक जाकर वीडियो और फोटो ले रही हैं। इसके लिए आधुनिक तकनीक वाले ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। पक्षियों की तरह बिना किसी आवाज के ये कैमरे उड़ान भरते हैं। ये पूरी तरह से दिल्ली स्थित केंद्रीय गृह मंत्रालय के कमांड कंट्रोल सेंटर के साथ नियंत्रित किया गया हैं। 

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