कानपुर शूटआउट: 48 घंटे के भीतर विकास दुबे, प्रभात मिश्रा और बउआ के एनकाउंटर की सच्चाई

Kanpur Police Encounter ends Vikas Dubey, Prabhat Mishra and Baua - Sakshi Samachar

कानुपर: यूपी पुलिस के इतिहास में शायद पहली बार हुआ हो कि 48 घंटे के भीतर ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक ही मामले से जुड़े तीन आरोपियों का अलग अलग एनकाउंटर किया है। शुक्रवार सुबह मुठभेड़ में विकास दुबे को मार गिराया गया। इससे पहले गुरुवार सुबह ही विकास के साथी प्रभात मिश्रा व बउआ दुबे को एनकाउंटर में मारा गया था। प्रभात मिश्रा को भी फरीदाबाद से ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर लाते समय मारा गया था। जबकि विकास का दूसरा साथी बउआ दुबे को इटावा में ढेर किया गया। 

पुलिस एनकाउंटर महज इत्तेफाक? 

विकास दुबे एनकाउंटर को लेकर आलाधिकारी बहुत कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं। उन्हें पता है कि अगर मुंह खोला तो मीडिया और मानवाधिकार से जुड़े लोग बयानों का पोस्टमॉर्टम शुरू कर देंगे। प्रभात मिश्रा इनकाउंटर में पुलिस की गाड़ी पंचर हुई थी। जबकि विकास दुबे को लाते समय पुलिस की गाड़ी पलट जाती है। अलग अलग घटी दोनों की घटनाओं में अपराधियों ने भागने की कोशिश की। दोनों ही वारदात में अपराधियों ने पुलिस के हथियार छीना और हमला किया। मजबूरन जान बचाने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी।

विकास दुबे इनकाउंटर मामले में जिस जगह गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हुई। उससे काफी दूर मुठभेड़ की बात कही जा रही है। मौके पर कानपुर एसएसपी ने बताया कि विकास दुबे ने भागते हुए पुलिस पर हमला भी किया था। स्थिति से निपटने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी और विकास दुबे मारा गया। 

एनकाउंटर में विकास गैंग का सफाया

कानपुर एनकाउंटर के बाद तीन जुलाई को पुलिस की बिकरू गांव के जंगलों में विकास दुबे के लोगों से भिड़ंत हो गई। जिसमें विकास का मामा प्रेम प्रकाश पांडेय और साथी अतुल दुबे मारा गया। घटना के दौरान तीन पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। 

एक जुलाई को ही सुबह सवेरे हमीरपुर में यूपी एसटीएफ ने मुठभेड़ में विकास दुबे का राइड हैंड कहे जाने वाले अमर दुबे को मार गिराया था। मुठभेड़ में दावा किया गया कि मौदहा इंस्पेक्टर मनोज शुक्ल भी बुरी तरह घायल हुए हैं। अमर विकास दुबे गैंग का सबसे बढ़िया शूटर था। अमर की हाल ही में शादी हुई थी। 

फरीदाबाद से गिरफ्तार प्रभात मिश्रा को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर कानपुर लाते समय एनकाउंटर कर दिया गया। प्रभात मिश्रा भी विकास दुबे का खास आदमी था। प्रभात पर पुलिस का पिस्टल छीनकर भागने का आरोप था। 

प्रवीण उर्फ बउवा को भी विकास दुबे का खास आदमी माना जाता था। नौ जुलाई को इटावा मुठभेड़ में बउआ को भी ढेर कर दिया गया। बिकरू गांव निवासी प्रवीण उर्फ बउवा ने महेवा के पास हाईवे पर स्विफ्ट डिजायर कार को लूटा था। पुलिस और बउवा के बीच फायरिंग की बात भी कही गई। फायरिंग के दौरान बउवा ढेर हो गया। 

हैदराबाद एनकाउंटर के बाद सबसे चर्चित मामला

इससे पहले प्रियंका रेड्डी रेप और मर्डर मामले में साइबराबाद पुलिस ने मुठभेड़ में तीन आरोपियों को मार गिराया था। जनता ने तो खूब वाहवाही की जबकि एनकाउंटर की पूरी सच्चाई दफन कर दी गई। कुछ ऐसा ही मामला विकास दुबे का भी है। विकास और उसके साथियों का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। जाहिर है इनके एनकाउंटर से लोगों में खुशी है। हो सकता है कानपुर पुलिस को आम लोगों का समर्थन भी मिले। बावजूद इसके कानपुर पुलिस और यूपी एसटीएफ को मामले में न्यायिक जांच का भी सामना करना पड़ सकता है। 

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