दिल्ली हिंसा मामले में चार्जशीट दायर, ताहिर हुसैन को बताया मास्टरमाइंड

Chargesheet filed in Delhi violence case, Tahir Hussain told mastermind - Sakshi Samachar

कड़कड़डूमा कोर्ट में चार्जशीट दायर

ताहिर समेत 15 लोग बनाए गए आरोपी

हिंसा के आरोपियों में ताहिर हुसैन का भाई शाह आलम भी

हिंसा कराने के लिए ताहिर ने एक करोड़ 30 लाख रुपये खर्च किए

नई दिल्ली : दिल्ली हिंसा मामले में क्राइम ब्रांच ने कड़कड़डूमा कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी है। दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व नेता और पार्षद ताहिर हुसैन को दिल्ली हिंसा मामले का मास्टरमाइंड बताया है। चार्जशीट में पार्षद ताहिर हुसैन समेत 15 लोगों को आरोपी बनाया गया है। 24 फरवरी को चांद बाग इलाके में हुई हिंसा के आरोपियों में ताहिर हुसैन का भाई शाह आलम भी है।

करीब एक हजार पन्नों की इस चार्जशीट में पार्षद ताहिर हुसैन के भाई शाह आलम को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि हिंसा के वक्त आरोपी ताहिर हुसैन अपनी छत पर था। ताहिर हुसैन पर हिंसा कराने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, हिंसा कराने के लिए ताहिर ने एक करोड़ 30 लाख रुपये खर्च किए थे।

दिल्ली हिंसा के आरोपी ताहिर हुसैन पर कसा शिकंजा

दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा कि हिंसा से पहले आरोपी ताहिर हुसैन ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल लोगों से बातचीत की थी। ताहिर ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद से भी बात की थी।

चार्जशीट के मुताबिक, दिल्ली हिंसा की पूरी तैयारी पहले से की गई थी। ताहिर हुसैन ने लोगों से बात की थी और उसी वक्त तय किया गया था कि जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिल्ली आएंगे, तब दिल्ली में हिंसा कराया जाएगा। हालांकि पुलिस ने इस चार्जशीट में उमर खालिद को आरोपी नहीं बनाया है।

कौन है ताहिर हुसैन

हाजी ताहिर हुसैन, मुस्तफाबाद विधानसभा के नेहरू विहार वार्ड से पार्षद है। दिल्ली हिंसा में नाम आने के बाद आम आदमी पार्टी ने ताहिर हुसैन को पार्टी से निकाल दिया था। उस पर इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या समेत दिल्ली में हिंसा फैलाने का आरोप है। आरोप है कि उसके घर की छत से ही हमला किया जा रहा था।

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ताहिर हुसैन समेत 15 लोग आरोपी

क्राइम ब्रांच की इस एक हजार से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट में जेएनयू स्कॉलर उमर खालिद का भी जिक्र है, लेकिन उमर को आरोपी नहीं बनाया गया है। केस में 75 गवाह बनाए गए हैं, जिसमें 15 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। पूरा मामला नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में इसी साल फरवरी के आखिरी सप्ताह में भड़की हिंसा से जुड़ा है। नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के चांदबाग, खजूरी, जाफराबाद समेत कई इलाकों में भीषण हिंसा हुई थी, जिसमें जान और माल का काफी नुकसान हुआ था।

मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र के चांदबाग इलाके में भी हिंसा भड़की थी। ताहिर हुसैन चांदबाग के नेहरू विहार वार्ड से पार्षद है। ताहिर ने आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता था, लेकिन हिंसा के आरोप लगने के बाद पार्टी ने ताहिर को निष्कासित कर दिया था। ताहिर की गिरफ्तारी के बाद उससे पुलिस रिमांड पर लंबी पूछताछ भी की गई थी, जिसके बाद अब कोर्ट में चार्जशीट दायर की गई है।

चार्जशीट में क्या हैं आरोप

चार्जशीट में ताहिर हुसैन को चांद बाग में भड़की हिंसा का सूत्रधार बताया गया है। दंगे, लूट, डकैती, आगजनी और साजिश रचने समेत अन्य धाराओं में यह चार्जशीट दायर की गई है। चार्जशीट में दावा किया गया है कि ताहिर हुसैन ने हिंसा से पहले अपनी तीन अलग-अलग कंपनियों से करीब सवा करोड़ रुपये फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर किया। फिर इस पैसे को लोगों में बांटा गया। यह भी आरोप है कि पैसा नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में चल रहे प्रदर्शन में शामिल लोगों के बीच भी बांटा गया।

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  • चार्जशीट में ये भी बताया गया है कि ताहिर हुसैन ने चांद बाग के अलावा ब्रिजपुरी मस्जिद के पास चल रहे एंटी सीएए प्रोटेस्ट, करदमपुरी में मस्जिद के पास चल रहे एंटी सीएए प्रोटेस्ट में शामिल लोगों के बीच भी पैसा बंटवाया।
  • चार्जशीट में ये भी कहा गया है कि ताहिर हुसैन ने साजिश के तहत चांद बाग में अपने घर के सीसीटीवी की रिकार्डिंग बंद कर दी थी। ताहिर के घर और दफ्तर की DVR जानबूझकर खराब की गई थी ताकि सीसीटीवी फुटेज सामने न आ सके। इसका खुलासा एफएसएल रिपोर्ट में हुआ है। 23 से 28 मार्च तक सीसीटीवी में कोई रिकार्डिंग नहीं मिली।
  • चार्जशीट में ये भी बताया गया है कि कॉल डिटेल के हिसाब से ताहिर हुसैन 27 फरवरी तक चांद बाग इलाके में ही था। साथ ही कहा गया है कि ताहिर हुसैन ने साजिश के तहत पीसीआर को कॉल किया था। 24 फरवरी की रात स्थानीय पुलिस ताहिर हुसैन के घर पहुंची थी, उस वक्त ताहिर हुसैन के घर पर न ही कोई तोड़फोड़ हुई थी और न ताहिर को किसी किस्म की कोई चोट थी जबकि ताहिर के आसपास के घर में तोड़फोड़ हो चुकी थी। इससे लगता है कि ताहिर ने केस से बचने के लिए कॉल किया था।
  • हिंसा से पहले जनवरी के महीने में ताहिर हुसैन ने शाहीन बाग इलाके में उमर खालिद और खलील सैफी के साथ मिलकर एंटी सीएए प्रदर्शन को बड़ा रूप देने के लिए मीटिंग की थी। चार्जशीट के मुताबिक शाहीन बाग में 8 जनवरी को हुई मीटिंग में ताहिर हुसैन, उमर खालिद समेत कई लोग थे। ताहिर हुसैन ने क्राइम ब्रांच को बताया कि उमर खालिद ने मीटिंग में कहा था कि "राम मंदिर पर चुप रहे, धारा 370 पर चुप रहे, लेकिन अब CAA पर खामोश नहीं रहना है।"
  • इस मीटिंग का जिक्र क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट में हिंसा की प्लानिंग के तौर पर किया है। क्राइम ब्रांच ने कॉल डिटेल भी चार्जशीट में शामिल की हैंं। कॉल डिटेल में ताहिर हुसैन, उमर खालिद और खालिद सैफी की लोकेशन 8 जनवरी को शाहीन बाग में एक ही जगह मिली।
  • क्राइम ब्रांच के मुताबिक, जो 22 खाली खोखे मिले थे, उनकी बैलेस्टिक रिपोर्ट पेंडिंग है। ताहिर हुसैन के गुर्गे गुलफाम ने फरवरी में यानि हिंसा से पहले 100 कारतूस खरीदे थे, जिसमें केवल 7 ही बरामद हुए, बाकी खोखे दंगों के दौरान चलाए गए।

गौरतलब है कि दिल्ली में 15 दिसंबर को जामिया इलाके में पुलिस और सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों की झड़प हुई थी। इसके बाद से ही जामिया के करीबी इलाके शाहीन बाग में हाईवे पर महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे एंटी सीएए प्रोटेस्ट दिल्ली के दूसरे इलाकों में भी होने लगे थे। लेकिन काफी दिनों बाद भी प्रोटेस्ट खत्म न होने के चलते इस पर चर्चा होने लगी। बीजेपी नेताओं ने दिल्ली चुनाव में भी इसे मुद्दा बनाया। इसी बीच 23 फरवरी को मौजपुर में बीजेपी नेता कपिल मिश्रा भी अपने समर्थकों के साथ पहुंच गए। कपिल मिश्रा ने यहां पुलिस की मौजूदगी में कहा था कि ट्रंप के जाने तक आप चांद बाग और जाफराबाद खाली करवा लीजिए, वरना उसके बाद हमें रोड पर आना पड़ेगा।

कपिल मिश्रा की इस चेतावनी के अगले ही दिन इलाके में जमकर हिंसा शुरू हो गई, जिसने भयानक रूप ले लिया। पचास से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, घर जला दिए गए। दुकानों को आग के हवाले कर दिया। आईबी का कर्मचारी अंकित शर्मा भी मारा गया। अंकित शर्मा की मौत के मामले में भी ताहिर हुसैन पर केस दर्ज है, हालांकि ये चार्जशीट चांद बाग हिंसा केस से जुड़ी है।
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