पढ़ाई छोड़कर कभी खेती करने लगे थे टाटा ग्रुप के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन, पढ़ें दिलचस्प किस्सा

Tata Sons Chairman Natarajan Chandrasekaran Birthday - Sakshi Samachar

नटराजन चंद्रशेखरन का 57वां जन्मदिन

चंद्रशेखरन का जन्म 2 जून 1963 को तमिलनाडु में हुआ था

साल 2016 में नटराजन चंद्रशेखरन ने संभाली थी टाटा संस की कमान

हैदराबाद : नटराजन चंद्रशेखरन आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। करीब सौ देशों में फैला करोबार और 6 लाख 60 हजार 800 कर्मचारियों के टाटा ग्रुप की कमान इन्हीं के हाथों में है। नटराजन चंद्रशेखरन को सायरस मिस्त्री के सीईओ पद से हटाने के बाद टाटा संस की कमान मिली थी। चंद्रशेखरन का 57वां जन्मदिन है। आइए जानते हैं उनकी जिंदगी के दिलचस्प किस्से।

नटराजन चंद्रशेखरन का जन्म 2 जून 1963 को तमिलनाडु में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही एक सरकारी स्कूल में हुई थी। कोयंबटूर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से उन्होंने ग्रेज्यूएशन किया। स्थानीय इंजीनियरिंग कॉलेज से कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर्स की डिग्री ली, जो अब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) तिरुचिरापल्ली के नाम से जाना जाता है।

टाटा संस के चेयरमैन बने

नटराजन चंद्रशेखरन ने तमिलनाडु के त्रिची स्थित रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से कम्प्यूटर एप्लीकेशन्स में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री लेने के बाद वर्ष 1987 में कंपनी में काम करना शुरू किया था। 2009 में चंद्रशेखरन ने बतौर सीईओ और एमडी टीसीएस की कमान संभाली थी। नटराजन चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टीसीएस ने वर्ष 2015-16 के दौरान रेवेन्यू को बढ़ाकर 16.5 अरब डॉलर तक पहुंचाया था। 2016 में साइरस मिस्त्री को हटाकर नटराजन चंद्रशेखरन को टाटा समूह का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। 

पढ़ाई छोड़कर खेती करने लगे थे  चंद्रशेखरन

यह बात बहुत ही कम लोगों को मालूम है कि आज टाटा ग्रुप के शीर्ष पद पर बैठे नटराजन चंद्रशेखरन ने कभी पढ़ाई छोड़कर खेती करने लगे थे। लोग बताते हैं कि वह अपने पिता की इच्छा का ख्याल रखते हुए बीच में ही पढ़ाई छोड़कर खेती शुरू कर दी थी। हालांकि कुछ दिनों के बाद ही उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और वह फिर पढ़ाई करने लगे। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स के साथ एक इंटरव्‍यू में चंद्रशेखरन ने बताया कि उनके पिता एक वकील थे, लेकिन दादा के गुजर जाने के बाद उन्‍होंने किसानी शुरू कर दी। वह बेटे को किसान बनाना चाहते थे। जब वह कॉलेज में थे तो उनके भाइयों ने अलग-अलग शहरों में अपनी-अपनी नौकरियां शुरू कर दीं। इसके बाद कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद वह अपने पिता की खेती-बाड़ी करने लगे थे।

नटराजन चंद्रशेखरन शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहे। उन्होंने चुनौती के आगे कभी हार नहीं मानी और यह बात उन्होंने काम के दौरान भी साबित की। साल 1987 में टाटा संस से जुड़े नटराजन चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टीसीएस ने वर्ष 2015-16 के दौरान रेवेन्यू को बढ़ाकर 16.5 अरब डॉलर तक पहुंचाया था।

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