नए पैकेज का लाभ आज भले ही अर्थव्यवस्था पर न दिखे पर 2-3 सालों में जरूर दिखेगा : वित्त मंत्रालय

The benefits of the new package will be visible on the economy in 2-3 years: Finance Ministry - Sakshi Samachar

मजदूरों के पलायन का असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा

सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए पैकेज की घोषणा

काफी विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है पैकेज

नई दिल्ली : सरकार के 21 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का प्रभाव तत्काल न होकर मध्य से लेकर दीर्घकाल में दिखने की चर्चाओं के बीच वित्त मंत्रालय का विश्वास है कि पैकेज की घोषणा के बाद अब आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे जोर पकड़ेंगी और इसमें घरेलू निवेश को अच्छा समर्थन मिलेगा। मंत्रालय के सूत्रों ने यह संकेत दिया है।

निवेश के लिए आगे आएंगे उद्योग
वित्त मंत्रालय को उम्मीद है कि बैंकों ने जिन आठ लाख करोड़ रुपये के कर्ज को मंजूरी दी है, उसका वितरण जल्द शुरू होगा। इससे कारोबार तेज होने के साथ ही उद्योग निवेश के लिए आगे आएंगे और कर्ज का उठाव होगा। सूत्रों के अनुसार, ‘‘यह सही है कि बैंकों के कर्ज मंजूरी और वितरण के बीच असंतुलन बना हुआ है। यह समय के साथ दूर होगा। आर्थिक गतिविधियां शुरू हो रही हैं, इसमें कोई समस्या नहीं है। सरकार ने तमाम पक्षों के साथ विस्तृत बातचीत के बाद ही पैकेज तैयार किया है। इससे घरेलू निवेश को समर्थन मिलेगा।''

मजदूरों के पलायन का असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा
सूत्रों के अनुसार मंत्रालय का पैकेज के क्रियान्वयन पर पूरा ध्यान है। सूत्रों ने माना कि लॉकडाउन के चलते गतिविधियां अभी पूरी तरह से जोर नहीं पकड़ पा रही हैं। श्रमिकों के बड़े पैमाने पर पलायन की वजह से भी कहीं-कहीं गतिविधियों को बहाल करने में समय लग सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘मजदूरों के पलायन का आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा। इसके लिए राज्यों को आपस में समन्वय बिठाना होगा और चीजों को संतुलित करना होगा।''

सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए पैकेज की घोषणा
बता दें कि कोरोना वायरस के कारण गत 25 मार्च के बाद से देश में लॉकडाउन जारी है। इस दौरान कई चरणों में लॉकडाउन बढ़ाया गया और धीरे-धीरे आर्थिक गतिविधियों को खोलने का काम शुरू किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की।

बिना गारंटी कर्ज देने की सुविधा की घोषणा 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बाद में पांच किस्तों में इस पैकेज का ब्यौरा भी दिया। इसमें छोटे उद्योगों के लिए तीन लाख करोड़ रुपये की आपात कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने और उन्हें बिना गारंटी कर्ज देने की सुविधा की घोषणा की गई। किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के तहत 2 लाख करोड़ रुपये का रियायती कर्ज उपलब्ध कराने की भी पहल की गई। 

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काफी विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है पैकेज
कुछ विश्लषकों का मानना है कि सरकार की ये घोषणा अर्थव्यवस्था पर तुरंत कोई असर नहीं दिखा पाएगी लेकिन आने वाले दो-तीन सालों में इसका बेहतर प्रभाव दिखाई देगा। वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि उद्योग एवं व्यापार जगत सहित विभिन्न पक्षों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही यह पैकेज तैयार किया गया है।

मध्यम वर्ग को भी होता है फायदा
बैंकों की कर्ज दर में गिरावट के साथ ही जमा की ब्याज दरों में भी गिरावट के मुद्दे पर मंत्रालय सूत्रों ने कहा कि ऐसे समय जब कर्ज पर ब्याज दर कम होती है तो जमा पर भी इसका असर होता है। ‘‘इस स्थिति को हमें मूल्य घट-बढ की तरह देखना चाहिए। जब किसी आवश्यक वस्तु के दाम गिरते हैं तो खरीदार को उसका लाभ होता है, मध्यम वर्ग को उसका कहीं न कहीं फायदा होता है। हमें इस पहलू को भी ध्यान में रखना चाहिए।''
—भाषा
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