सावधान! 'लॉकडाउन' के बाद कहीं आपको नौकरी से हाथ न धोना पड़ जाए, कहती है ये रिपोर्ट

Be Alert May Be You Will Loose Your Job After This Lockdown - Sakshi Samachar

विश्व युद्ध के बाद सबसे भयानक संकट का दौर

भारत में लाखों नौकरियों पर मंडरा रहा है खतरा

सेक्शन 25(N) में छंटनी से संबंधि‍त प्रावधान

नई दिल्ली : 'नोटबंदी' के बाद भारत में पहले ही नौकरियां कम हो गई थीं। हर सेक्टर पर 'नोटबंदी' का प्रभाव आज तक देखा जा रहा था, उस पर कोरोना के कहर ने तो मानो उद्योग जगत की नींव पूरी तरह से हिलाकर रख दी है। शायद यह कहना और भी सटीक होगा कि स्थिति डांवाडोल कर दी है। कोरोना का यह कहर कई सेक्टर्स पर तो इस कदर बरपा है कि यह समझ पाना तक मुश्किल हो रहा है कि कब तक वह इस मुश्किल हालात से बाहर आ पाएगी या आ भी पाएगी कि नहीं! यही नहीं, माना जा रहा है कि कोरोना 'लॉकडाउन' के बाद बड़ी संख्या में लोगों को अपने-अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ सकता है।

विश्व युद्ध के बाद सबसे भयानक संकट का दौर

संयुक्त राष्ट्र संघ के श्रम निकाय यानि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने भी अपनी रिपोर्ट 'आईएलओ निगरानी- दूसरा संस्करण: कोविड-19 और वैश्विक कामकाज' में कोरोना वायरस संकट को दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे भयानक संकट का दौर बताया है। आईएलओ की ताजा रिपोर्ट में भी साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस संकट के कारण भारत में अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले लगभग 40 करोड़ लोग गरीबी में फंस सकते हैं। साथ ही अनुमान है कि इस साल दुनिया भर में 19.5 करोड़ लोगों की पूर्णकालिक नौकरी छूट सकती है।

भारत में लाखों नौकरियों पर मंडरा रहा है खतरा

कोरोना का कहर न सिर्फ इंसानी जिंदगी के सामने खतरा बनकर उभरा है, बल्कि इससे भारत में लाखों नौकरियों पर भी खतरा मंडरा रहा है। यूएन के अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस महामारी के चलते मौजूदा वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में साढ़े 19 करोड़ नौकरियां जा सकती हैं। भारत में कर्मचारी और नियोक्ता के लिए औद्योगिक विभाग अध‍िनियम का प्रावधान है। आइए एक्सपर्ट से जानें- कंपनियां क्या इस प्रावधान का इस्तेमाल करके कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर सकती हैं!

सेक्शन 25(N) में छंटनी से संबंधि‍त प्रावधान

कॉर्पोरेट कंसल्टेंट एडवोकेट रोहित श्रीवास्तव के मुताबिक औद्योगिक विभाग अध‍िनियम के सेक्शन 25(N) में छंटनी से संबंधि‍त प्रावधान दिया गया है। इसके अनुसार किसी आपदा के आने पर या अन्य कारणों से कंपनी अपने कर्मचारी की छंटनी करती है तो उसे पहले नोटिस देकर बताना होगा कि उसे क्यों हटा रहे हैं। अधिवक्ता रोहित कहते हैं, लेकिन ऐसा सिर्फ उन कर्मचारियों पर लागू होता है, जो कंपनी में रोल पर काम कर रहे हैं। इस सेक्शन में अस्थायी कर्मचारियों के लिए नियम परिभाषि‍त नहीं किए गए हैं। अक्सर इन्हीं कर्मचारियों की नौकरी पर संकट आता है।

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सभी विभागों और न‍ियोक्ताओं को एडवाइजरी

बता दें कि कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए केंद्रीय श्रम विभाग ने सभी विभागों और न‍ियोक्ताओं को एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि नियोक्ता लॉकडाउन के कारण किसी कर्मचारी को नौकरी से न निकालें। लेकिन जिस तरह की स्थ‍ितियां बन रही हैं। उसे देखते हुए ऐसा माना जा रहा है कि मौजूदा लॉकडाउन के दौरान कुछ महीनों तक व्यावसायिक गतिविधियां पहले की तरह चालू नहीं हो पाएंगी और कुछ कंपनियां व प्रतिष्ठान अपना काम चालू नहीं कर पाएंगे। इससे नौकरियों का संकट भी आना तय माना जा रहा है। 

दुनिया भर में नौकरियां जाने का एक अनुमान

कोरोना वायरस महामारी के असर पर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने इससे पहले 18 मार्च को भी दुनिया भर में नौकरियां जाने का एक अनुमान जताया था। उस अनुमान के मुकबले मौजूदा अनुमान कहीं बड़ा है। आईएलओ के महानिदेशक गाई राइडर ने कहा है कि ये आंकड़े भयवाह स्थ‍िति को बयां कर रहे हैं। दुनिया भर के कामगार मौजूदा कोरोना वायरस संकट से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। पूर्ण या आंशिक रूप से लॉकडाउन के कारण करीब 2.7 अरब कामगार प्रभावित हुए हैं। यह वैश्विक कार्यबल का करीब 81 फीसदी है। दुनिया भर में जिन क्षेत्रों में संकट सबसे ज्यादा नजर आ रहा है, वो हैं होटल और फूड सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल सेक्टर में काम करने वाले करीब 1.25 अरब लोग। वहीं भारत में भी लाखों लोगों की नौकरी पर गंभीर संकट नजर आ रहा है। अब देखना यह है कि कंपनियां किस प्रकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा कर सकती हैं।

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