अजीम प्रेमजी का साथ छोड़कर शख्स ने घंटे भर में जुटाया 100,00000 डॉलर

Ashok Soota  earns huge amount by Happiest Minds IPO - Sakshi Samachar

अशोक हूता की बिजनेस कामयाबी

एक घंटे में जुटाए एक करोड़ डॉलर 

नई दिल्ली: कारोबार की दुनिया में अशोक सूता का नाम रातों रात चमका है। वजह ये कि अशोक सूता की कंपनी Happiest Minds Technologies Ltd के IPO को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। इन्होंने महज एक घंटे में एक करोड़ डॉलर आईपीओ से जुटाए। 

अशोक सूता आईटी बिजनेस में कोई नये नहीं हैं। इससे पहले साल 2007 में इन्होंने माइंड ट्री नाम से कंपनी की शुरुआत की और तब इस कंपनी का आईपीओ 100 गुना अधिक सब्सक्राइब हुआ था। सूता की इन्हीं खूबियों के कारण हैप्पीएस्ट माइंड्स पर लोगों ने अपना भरोसा जताया। 

सूता ने अपनी नई कंपनी के लिए कुछ उसूल बनाए हैं। जिसके मुताबिक कोई भी ग्राहक 100 मिलियन डॉलर से कम की सेवा कंपनी को नहीं देगा। कंपनी बड़े डील करने से बचेगी। साथ ही छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहित करेगी। सूता मानते हैं कि कारोबारी बनने का फिलहाल सबसे मुफीद समय है। सूता का मानना है कि ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में रुपए का चक्र सही तरीके से चलना जरूरी है। विकासशील देशों को इससे खासकर बड़ा फायदा मिल रहा है। उनके मुताबिक भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्पर्धा से पीछे हटना नहीं चाहिए। 

अशोक सूता मानते हैं कि भारत निवेश जुटाने के मामले में फइलहाल बेहद आसान देश है। वजह ये कि हमारे यहां उन्नत आइडियाज और प्रतिभाशाली प्रोफेशनल्स हैं। लिहाजा भारतीय कंपनियों के मूल्यांकन और विकास में देरी नहीं होती है। फिलहाल भारत में आधा दर्जन के करीब चुनिंदा व्यावसायिक घराने हैं। जबकि आने वाले समय में इनमें और इजाफा होगा। 

निवेश के मामले में मालिकों का पिछला रिकॉर्ड लोग देखते हैं। अशोक सूता इस मामले में भाग्यशाली हैं कि उनका बिजनेस बैकग्राउंड काफी साफ सुथरा है। पहली कंपनी माइंड ट्री के स्टार्ट अप के समय वे 58 वर्ष के थे। उस दौर में सूता बताते हैं कि महज एक फोन कॉल पर अमेरिकी निवेशक करोड़ों डॉलर निवेश के लिए तैयार थे। 

अजीम प्रेमजी का साथ छोड़ा और हासिल की कामयाबी

अजीम प्रेमजी का दफ्तर छोड़ने के महज एक घंटे में ही सूता ने अमेरिका में वाल्डेन फंड के लोगों से बातचीत की और एक करोड़ डॉलर के निवेश की पेशकश हासिल कर ली। अशोक सूता दिग्गज कारोबारी अजीम प्रेमजी के करीबी माने जाते हैं। अजीम प्रेमजी का साथ छोड़ने के पीछे किसी तरह का मतभेद नहीं है। 

 

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