जन्मदिन पर विशेष : तो इसलिए 'महिंद्रा एंड महिंद्रा' की टैगलाइन है 'राइज', 'किसी से कम नहीं' आनंद महिंद्रा

Anand Mahindra of 'Mahindra and Mahindra' is always Rising, no one like him - Sakshi Samachar

1 . हाल ही में ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया गया था, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया और रीट्वीट भी। उस वीडियो में एक बच्ची गेम खेल रहे तीन अन्य बच्चों को पानी पिला रही थी। लेकिन वीडियो के अंतिम कुछ सेकेंड्स सबको हंसा-हंसाकर लोटपोट कर रहे थे। असल में, बच्ची कमोड का पानी लाकर उन्हें पीने को दे रही थी। सोशल मीडिया पर हर वक्त एक्टिव रहने वाले आनंद महिंद्रा ने अपने ट्विटर हैंडल पर  वीडियो पोस्ट की थी।  

2. इससे अलग एक बार आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर एक इलेक्ट्रिक ऑटो चलाने वाले युवक की खूबसूरत तस्वीर साझा की, जिसने कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए हर यात्री के लिए प्लास्टिक की मोटी परत से अपने ऑटो में अलग-अलग कमरे जैसी जगह तैयार कर दी थी। महिंद्रा इस ऑटोचालक की क्रिएटिविटी से इतने प्रभावित हुए कि उसे अपनी कंपनी में 'रिसर्च एंड डेवलपमेंट' स्टाफ के तौर पर नौकरी का ऑफर दे डाला।

3. एक अन्य ट्वीट में उन्होंने चेहरे पर पत्ते के मास्क लगाए मां और बच्चे की पिक्चर पोस्ट की। साथ ही लिखा कि प्रकृति का लाभ इन्हें मिल रहा है। देखिए, प्रकृति ने हमें सबकुछ दे दिया है। इस तस्वीर से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। हालांकि, इस पर लोगों ने उन्हें तीखी प्रतिक्रियाएं भेजीं। उनकी यह पोस्ट ट्विटर पर ट्रोल होने लगी। बड़ी संख्या में लोग उनकी इस पोस्ट की आलोचना करने लगे। मामले की गंभीरता को भांपते हुए आनंद महिंद्रा ने अपनी असंवेदनशीलता के लिए माफी मांगते हुए अपने ट्विटर हैंडल से यह पोस्ट डिलीट कर दी। इसके बाद लोगों ने उनके इस कदम की भी खूब सराहना की।

कोरोना लॉकडाउन ने यकीनन हम सभी की जिंदगी में कुछ न कुछ बदलाव जरूर किया होगा। हो सकता है कि इससे हमारी सोच पर फर्क पड़ा हो या फिर किसी भी काम को करने के हमारे ढंग पर। ऐसा ही कुछ महिंद्रा ने इन दिनों मुंबई की सडकों पर चलते हुए महसूस किया। इसके बाद उन्होंने अपने कर्मचारियों को एक खत लिखा। उस खत में लिखा था, इस लॉकडाउन से आप बहुत कुछ सीख सकते हैं। मुंबई कितनी साफ हो गई है। आसमान, सड़कें... सब कुछ कितना क्लीन नजर आ रहा है। इसका मतलब यह हुआ कि हम सभी ने इसे गंदा कर रखा था। अब हम यह प्रण कर लें कि लॉकडाउन के बाद भी हम इसे साफ रखेंगे। उन्होंने यह भी लिखा कि लॉकडाउन ने हमें और भी एक बात सिखाई है। यही कि नौकरी के अलावा भी हमें कुछ ऐसा करने की कोशिश जरूर करनी चाहिए जिससे हम हमेशा अपने पांव पर खड़े रह सकें। कभी गिरें नहीं। न ही डगमगाएं। बुरे वक्त और हालात का भी हम सदा डटकर सामना कर सकें।

4. कोरोना के संक्रमण और इससे पैदा होने वाले हालात को भांपते हुए आनंद महिंद्रा ने अपनी पूरी सैलेरी कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए दान कर दी। यही नहीं, अपनी कंपनी की ओर से जरूरतमंदों को उन्होंने मुफ्त कैब मुहैया करवाई ताकि वे अपने गंतव्य तक सही—सलामत पहुंच सकें। इसके अलावा कोरोना पीडितों के इलाज के लिए उन्होंने कंपनी के रिजोर्ट भी मुहैया करवाए। 

5. इससे इतर आनंद महिंद्रा ने केंद्र सरकार को लॉकडाउन को धीरे-धीरे हटाने की उनकी नीति पर एक और बार विचार करने की सलाह भी दी। उन्होंने यह साफ किया कि देश में 49 दिनों तक ही लॉकडाउन रहना चाहिए। यह भी कहा कि यदि लॉकडाउन धीरे-धीरे खोला गया तो उद्योगों को इससे काफी नुकसान हो सकता है। एक ही बार में सभी उद्योगों को काम करने की छूट नहीं मिल पाई तो इससे हर उद्योग पर इसका बुरा असर पड़ेगा और आर्थिक रूप से उन कंपनियों की हालत और भी बिगड़ जाएगी।

देखें Video : वीडियो देख भीग जाएंगी आंखें, कोरोना कर्मवीर का ऐसे हुआ स्वागत!​

फेहरिस्त बहुत लंबी है। एक ही इंसान में इतनी सारी खूबियां। हर मुद्दों और हालात को भांपकर सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता। इतनी बड़ी कंपनी के कर्ताधर्ता होकर भी अपने अंदर की इंसानियत और छोटी-छोटी चीजों की बारीकियों तक को महसूस करने की क्षमता होना... यह सिर्फ ​और सिर्फ आनंद महिंद्रा के अंदर ही हो सकती है। 

आनन्द महिन्द्रा। देश के प्रमुख औद्योगिक कं​पनियों में से एक 'महिन्द्रा एंड महिन्द्रा' के संस्थापक जगदीश चंद्र महिन्द्रा के पोते और महिंद्रा समूह के चेयरमैन। इतनी बड़ी हस्ती होते हुए भी सोशल मीडिया पर हर वक्त एक्टिव रहने वाले आनन्द महिन्द्रा के प्रशंसकों की कहीं कोई कमी नहीं है। इसी साल 26 जनवरी 2020 को 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किए गए आनन्द महिन्द्रा ने अपनी शुरुआती शिक्षा लॉरेंस स्कूल लवडेल, हार्वर्ड स्कूल से आरम्भ की। बाद में 1977 में हार्वर्ड कॉलेज, कैम्ब्रिज, मैसाचुसेट्स के मैग्ना मार्क से स्नातक की शिक्षा पूर्ण की। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल, बोस्टन से 1981 में उन्होंने एमबीए की शिक्षा पूर्ण की। 26 अक्टूबर 2011 की फ़ोर्ब्स रैंकिंग के आधार पर वह कुल यूएस $825 मिलियन सम्पति के साथ 68वें धनी भारतीय घोषित हुए।

1 मई 1955 मुंबई, महाराष्ट्र में जन्मे आनन्द महिन्द्रा महिंद्रा समूह के प्रबन्ध निदेशक एवं अध्यक्ष हैं। उनके दादा केसी महिन्द्रा कम्पनी के सह-संस्थापक थे। उन्होंने इस कंपनी की स्थापना अपने गृह नगर लुधियाना, पंजाब से की थी। आनंद महिंद्रा के पिता का नाम हरीश महिंद्रा और माता का नाम इंदिरा महिंद्रा था। उनकी दो बहने हैं- अनुजा शर्मा और राधिका नाथ। 'मेंस वर्ल्ड' की सम्पादक और 'रोलिंग स्टैंड इंडिया' की एडिटर इन चीफ अनुराधा महिंद्रा उनकी पत्नी हैं। बोस्टन में साथ पढ़ते हुए वे एक-दूसरे को दिल दे बैठे थे। उनके दो बच्चे हैं। 

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बता दें कि महिंद्रा ऐंड महिंद्रा लिमिटेड साल 1947 से ही ऑटो सेक्टर में कार्यरत कंपनी है। आज कंपनी के बुके में इलेक्ट्रिक व्हीकल से लेकर, पिकअप, कॉमर्श‍ियल व्हीकल, ट्रैक्टर, टू व्हीलर और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट जैसे उत्पाद शामिल हैं। कंपनी 1960 के दशक से ही उत्पादों के निर्यात में लगी है। इसके ट्रैक्टर आज दुनिया के सभी महाद्वीपों तक निर्यात होते हैं। यह ग्रुप आज करीब 19 अरब डॉलर का विशाल समूह बन चुका है।

महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (M&M) ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा इसी साल अप्रैल से कंपनी का शीर्ष पद छोड़कर कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनने वाले थे। उनकी जगह एमडी पवन गोयनका नवंबर तक चेयरमैन का अतिरिक्त कार्यभार संभालने वाले थे। हालांकि फिलहाल ऐसा नहीं हुआ और आनंद महिंद्रा, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (M&M) ग्रुप के चेयरमैन के अपने पद पर बने हुए हैं।

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— सुषमाश्री 

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