सीएम जगन ने किया 'वाईएसआर जलकला' योजना का शुभारंभ, लाखों किसानों को मिलेगा लाभ

YSR Jalakala Scheme Launched In Andhra Pradesh  - Sakshi Samachar

आंध्र प्रदेश में किसानों के कल्याण के लिए एक और क्रांतिकारी योजना

छोटे किसानों को बोरवेल के साथ मोटर भी फ्री में स्थापित किये जाएंगे

अमरावती : आंध्र प्रदेश में किसानों के कल्याण के लिए एक और क्रांतिकारी योजना का शुभारंभ हुआ है। मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने सोमवार को अपने कैंप कार्यालय में YSR जलकला (फ्री बोरवेल) योजना का वीडियो कांफ्रेंस के जरिए उद्घाटन किया। सीएम जगन ने पदयात्रा के दौरान किसानों को मैदानी इलाकों को सिंचित पानी उपलब्ध कराने का वादा किया गया था। 

'वाईएसआर जलकला' योजान के तहत प्रदेश में 2 लाख बोरवेल स्थापित किये जाएंगे। इसके लिए 2,340 करोड़ खर्च का अनुमान है। इस योजना के तहत तीन लाख किसानों को लाभ मिलेगा। इसके अलावा छोटे किसानों को बोरवेल के साथ मोटर भी फ्री में स्थापित किये जाएंगे। इसके लिए 1,600 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च आएगा। यदि बोर काम करना बंद कर दे तो दोबारा से बोरवेल स्थापित किया जाएगा।

प्रदेश के 13 जिलों में सभी योग्य किसानों को बोरवेल के माध्यम से उनके खेती को सिंचाई जल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वाईएसआर जलकला योजना को लागू किया है। 'वाईएसआर जलकला' के लिए वैज्ञानिक रूप से भूजल सर्वेक्षण के बाद बोरवेल स्थापित किये जाने के भूमि की पहचान की जाएगी। वाईएस जगन मोहन रेड्डी पदयात्रा के दौरान बोरवेल के भरोसे पर खेती कर रहे किसानों की दुर्दशा देखकर किसानों को फ्री बोरवेल देने का आश्वासन दिया था। इसी क्रम में नवरत्नों के अंतर्गत दिये गये आश्वासन को आज पूरा किया जा रह है।

संधित खबर :

सीएम जगन 'वाईएसआर जलकला' योजना का आज करेंगे शुभारंभ, तीन लाख किसानों को मिलेगा लाभ

ग्राम सचिवालयों में किसानों द्वारा ग्राम स्वयंसेवकों के माध्यम से दिये गये आवेदनों की वीआरओ जांच करेंगे। वहां से ये आवेदन ड्वामा एपीडी के पास भेज दिये जाएंगे। उन आवेदनों को वैज्ञानिक भूजल सर्वेक्षण के लिए आवेदनों को भेजे देंगे। वहां से मंजूरी मिल जाने के बाद ड्वामा एपीडी आवेदनों को प्रशासनिक स्वीकृति दी जाएगी। अनुमति मिलने के बाद ठेकेदार बोरवेल की खुदवाई करेंगे। यदि एक बार बोरवेल के विफल हो जाता है तो फिर से बोरवेल डाला जाएगा। 

इस योजना के तहत स्थापित किये जाने वाले सभी बोरवेलों का सोशल ऑडिट किया जाएगा। कार्यक्रम की प्रभावी निगरानी और कार्यान्वयन के लिए राज्य स्तर पर एक पीएमयू (प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट) की स्थापना की जाएगी। बोरवेल का काम पूरा होने के बाद ठेकेदार के साथ लाभार्थी की उपस्थिति में जियो-टैगिंग के साथ एक डिजिटल फोटो लिया जाएगा। इस योजना को सूचारू रूप से लागू करने के लिए विशेष साफ्टवेयर तैयार किया गया है।

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