एपी में डेयरी उद्योग का होगा विकास और महिलाओं को मिलेगा लाभ : सीएम जगन

cm jagan explained to amul agreement in ap assembly - Sakshi Samachar

अमूल संस्था में किसान ही मालिक हैं

किसान कंपनी में हिस्सेदार हैं

अमरावती: आंध्र प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पांचवें दिन अमूल के साथ राज्य सरकार के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर विधानसभा में चर्चा हुई। सरकार ने अमूल के साथ राज्य में डेयरी उद्योग को विकसित करने और डेयरी किसान और महिलाओं को अधिक आर्थिक आत्मनिर्भरता करने के मुद्दों पर पर चर्चा की।

बाद में सदन में मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि अमूल संस्था में किसान ही मालिक हैं। अमूल एक सहकारी संस्था है। आज यह केवल राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में शामिल है। अमूल दुनिया में 8 वें स्थान पर है। अमूल सभी बहुराष्ट्रीय संस्थान हैं। इसकी 50 देशों में प्रतिस्पर्धा है। सबसे बड़ी सार्वजनिक भागीदारी है। सीएम जगन ने आगे कहा कि कंपनी का मुनाफा किसानों का है। किसान उस कंपनी में हिस्सेदार हैं। 

एकत्रित किये गये दूध को अमूल कंपनी महिलाओं को अधिक दाम के अलावा साल में दो बार कंपनी की आय भी देगी। राज्य में इस तरह एक बड़ा काम हो रहा है।

यह भी पढ़ें :

चंद्रबाबू की येलो मीडिया को नहीं दिखते अच्छे कार्य : सीएम जगन

सरकार पर पूरा भरोसा

सीएम ने कहा, "मुख्यमंत्री और परिवार का बड़ा सदस्य होने के नाते मैं ऐसे फैसले ले रहा हूं। मेरी पदयात्रा के दौरान कुछ लोगों ने मिनरल वाटर बोतल लेकर आये और कहने लगे कि इस बोतल को 21 रुपये में खरीदा है। एक लिटर दूध भी लगभग इसी दाम पर मिलता है। यह दुख की बात है कि महिला किसानों को इतने कम दामों में दूध बेचना पड़ा रहा है। दूध को कम दाम मिलने के कारण पशुओं को बेचना पड़ रहा है। मगर अब किसानों को सरकार पर पूरा भरोसा हो गया है।" 

योजनाबद्ध तरीके से दूध के दाम नहीं दिये

वाईएस जगन ने कहा, "प्रदेश में एक योजनाबद्ध तरीके से दूध के दाम नहीं दिये गये। इस प्रकार सहकारिता क्षेत्र को एक षड्यंत्र के तहत हत्या कर दी गई। ऐसे हालत उत्पन्न होने पर सहकारिता क्षेत्र मिट जाता है। ऐसा होने पर सभी निजी संस्थाएं एक दाम निर्धारित करते हैं। इससे ज्यादा दाम पर दूध नहीं खरीदने की धमकी देते है। लाचार होकर किसानों को कम दामों पर दूध बेचना पड़ता है। एक योजनाबद्ध तरीके से सहकारिता क्षेत्र खून कर देने से ऐसी हालत उत्पन्न हुई है।"

एक व्यक्ति के कारण

मुख्यमंत्री ने कहा, "ऐसे हालत क्यों उत्पन्न हुए है? सिर्फ एक व्यक्ति के कारण ऐसे हुआ है। उस व्यक्ति ने एक निजी डेयरी स्थापना किया जाना रहा है। उसे लाभदायक बनाए रखने के लिए पूरे सहकारी क्षेत्र को मार डाला है। 1974 तक डेयरी को सरकार द्वारा चलाया गया था। उसी साल डेयरी को विकास संस्था में शामिल किया गया। फिर 1981 में डेयरी क्षेत्र में थ्रीटायर सहकारी प्रणाली का गठन किया गया। इसके चलते 9 सहकारी समितियों का गठन किया गया। वहां से सब कुछ ठीक तरह से जारी रहा।"

'मैक्स' कानून 

मुख्यमंत्री ने कहा, "1995 में म्यूचुअल एड को-ऑपरेटिव्स (मैक्स) अधिनियम लागू हुआ। इसे चंद्रबाबू ने लाया था। इससे पहले यानी 1992 में चंद्रबाबू ने हेरिटेज की शुरुआत की थी। साल 1995 में सीएम बनते ही एपी मैक्स अधिनियम लेकर आये। 1999 में विशाखा डेयरी, 2001 में कृष्णा डेयरी, 1997 में गुंटूर डेयरी, 2002 में प्रकाशम डेयरी, 2002 में नेल्लोर डेयरी और 2002 में कर्नूल डेयरी को मैक्स कानून दायरे में लेकर आये। इस प्रकार चंद्रबाबू ने अपने शासनकाल के दौरान सब कुछ बदल दिया। इस तरह अन्याय करते गये है।"

Advertisement
Back to Top