पदयात्रा से सत्ता हासिल करने वाले दक्षिण भारत के पहले राजनेता बने थे YSR

YSR first Political leader who became Chief Minister of AP Through Padayatra  - Sakshi Samachar

वाईएसआर ने की 1470 किलो मीटर लंबी पदयात्रा प्रजा प्रस्थानम

चंद्रबाबू नायडू ने 208 दिन में पूरी की 2800 किलो मीटर की पदयात्रा

वाईएस जगन ने 430 दिन में पूरी की अपनी प्रजा संकल्प यात्रा

अमरावती : आंध्र प्रदेश में वर्ष 2003 से पदयात्राओं के जरिए जनता का विश्वास जीतकर सत्ता हासिल करने का सिलसिला जारी है। सबसे पहले दिवंगत मुख्यमंत्री डॉ.वाईएस राजशेखर रेड्डी (वाईएसआर) दक्षिण भारत के एक ऐसे नेता रहे जो पदयात्रा के जरिए आम लोगों का समर्थन जुटाकर सत्ता पर काबिज हुए।

उन्होंने चंद्रबाबू नायडू के 10 वर्षों के शासनकाल में विभिन्न समस्याओं से त्रस्त आम लोगों से मिलने और उनकी परेशानियों को दूर करने का भरोसा देने का फैसला किया।  इसी के तहत उन्होंने 2003 में एकीकृत आंध्र प्रदेश में रंगारेड्डी जिले के चेवेल्ला निर्वाचन क्षेत्र से अपनी प्रजा प्रस्थानम पदयात्रा शुरू की और तीन महीने में कुल1475 किलो मीटर दूरी तय की। 

बाद में 2004 में हुए विधानसभा चुनाव में वाईएसआर 10 साल से सत्ता से बेदखल रही कांग्रेस पार्टी को बारी बहुमत के साथ सत्ता में लेकर आए। उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद कृषि और सिंचाई क्षेत्र के लिए सबसे अधिक महत्व दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में शपत लेने के तुरंत बाद किसानों को मुफ्त बिजली आपूर्ति से संबंधित फाइल और ऋण माफी के फाइल पर हस्ताक्षर कर लोगों में यह विश्वास जगा दिया कि वह जो कहते हैं उसे कर दिखाते हैं।

इसी तरह, वाईएसआर ने अनेक सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण शुरू करने के साथ गरीब बच्चों को उच्च शिक्षा हेतु फीस रिअंबर्समेंट स्कीम, वृद्धों के लिए आसरा, बीमार लोगों के लिए आरोग्यक्षी जैसी योजनाएं शुरू कीं, जिनकी आज भी पूरे देश में तारीफ होती है। 2009 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद वाईएसआर दोबारा राज्य के मुख्यमंत्री बने, लेकिन उसके कुछ ही महीने बाद रच्चाबंडा कार्यक्रम में भाग लेने जा रहे वाईएसआर का हेलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें उनकी मौत हो गई।

उसी तरह, एकीकृत आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद  2014 के विधानसभा चुनाव से पहले टीडीपी प्रमुख नारा चंद्रबाबू नायडू ने भी वाईएसआर के नक्शेकदम पर चलते हुए 2013 में 'वस्तुन्ना मी कोसम' के नाम पर राज्यभर में करीब 2,800 किलो मीटर की पदयात्रा 208 दिन में पूरी की।

हुए चुनाव में चंद्रबाबू ने बहुमत हासिल करने के साथ ही पृथक आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला। अपनी पदयात्रा के दौरान चंद्रबाबू नायडू ने लोगों से कई वायदे किए, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें पूरा करना भूल गए। चंद्रबाबू की जनविरोधी नीतियों व वादाखिलाफी की वजह से लोगों में उनके प्रति बढ़ते असंतोष को देखते हुए वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने भी लोगों के बीच पहुंच कर बाबू सरकार की वादा खिलाफी, विभिन्न भू घोटालों, टीडीपी नेताओं की अराजकता से अवगत कराने के साथ-साथ सत्ता में आने पर विभिन्न तबकों के लोगों के लिए कुछ न कुछ करने  का आश्वासन देने का फैसला किया।

इसी के तहत वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 6 नवंबर 2017 को अपने गृह जिला कडपा के इडुपुलापाया स्थित अपने पिता डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी की समाधि से अपनी प्रजा संकल्प यात्रा शुरू की। यह यात्रा राज्य के 13 जिलों के 125 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों से गुजरते हुए कुल 430 दिन में 3800 किलो मीटर की दूरी तय की। प्रजा संकल्प यात्रा श्रीकाकुलम जिले में खत्म हुई।

इस दौरान जगन की प्रजा संकल्प यात्रा को लोगों से व्यापक समर्थन मिला। जगन ने समाज के विभिन्न तबकों के लोगों से मिलकर उनकी परेशानियों को करीब से जाना और सत्ता में आने के बाद उनके लिए कुछ करने का भरोसा दिलाया। साथ ही जगन ने चंद्रबाबू सरकार के अनेक घोटालों और वादाखिलाफी से अवगत कराया। अगर हम वाईएसआर की प्रजा प्रस्थानम पदयात्रा, चंद्रबाबू नायडू की वस्तुन्ना मी कोसम तथा वाईएस जगन की प्रजा संकल्प यात्रा की तुलना करें, तो जगन की पदयात्रा में लोगों का व्यापक समर्थन देखने को मिला। 
यह बात मई 2019 में हुए विधानसभा व लोकसभा चुनाव में स्पष्ट देखने को मिली। सत्तारूढ़ टीडीपी सिर्फ 23 सीटों पर सिमट गई, जबकि वाईएस जगन 153 सीटों पर जीत के साथ बतौर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। वर्ष 2003 से राज्य में राजनीतिक दलों के नेताओं लंबी-लंबी पदयात्राओं के जरिए सत्ता हासिल की है। 

Related Tweets
Advertisement
Back to Top