किसान खुश रहने पर ही राज्य में छाएगी खुशहाली : वाईएस जगन

YS Jagan Mohan Reddy Review Meeting on Agriculture and  related Sectors - Sakshi Samachar

13,500 रुपए की फसल सहायता

कभी नहीं खरीदी गई ये फसलें..

फसल बोने से पहले ही समर्थन मूल्य

अगले वर्ष के आखिर तक जनता बाजार

 

अमरावती : आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित 'हमरा शासन आपके सुझाव' कार्यक्रम के दूसरे दिन मंगलवार को कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की समीक्षा की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि राज्य के लोग तभी खुश रह सकेंगे जब यहां के किसान खुश रहेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य किसान और कृषि मजदूरों में मुस्कुराहट देखना है। उन्होंने कहा, '3,648 किलो मीटर प्रजा संकल्प यात्रा के दौरान किसानों की मुश्किलों को करीब से देखा है और उनके कष्ट दूर करने की दिशा में ही चुनावी घोषणा पत्र तैयार किया था।

13,500 रुपए की फसल सहायता

खेती की लागत कम करने से ही किसानों को लाभ मिलेगा। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसानों की रक्षा को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। फसल को समर्थन मूल्य मिलने पर खेती फायदेमंद होती है और सरकार इसी दिशा में काम कर रही है। रैतु भरोसा-पीएम किसान योजना के जरिए 13,500 रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। शुरू में हमने 12,500 रुपए देने का वादा किया था, लेकिन ये राशि बढ़ाकर 13,500 रुपए कर दी गई है। यही नहीं, किसान इस योजना का लाभ चार नहीं बल्कि पांच साल तक उठा सकेंगे। 

सीएम ने कहा, 'पहले साल में 10,209 करोड़ रुपए किसानों को दिए गए। पिछली सरकार ने 87 हजार करोड़ रुपए के ऋण माफ करने का आश्वासन देकर पांच वर्षों में सिर्फ 15 हजार करोड़ रुपए माफ किए थे। किसानों के लिए मुफ्त फसल बीमा लागू की जा रही है।1,270 करोड़ रुपए की बीमा प्रीमियम का भुगतान किया जा चुका है। फसल नष्ट होने की स्थिति में किसान को मदद मिलनी चाहिए। पिछली सरकार ने सुन्नावड्डी योजना (ब्याजमुक्त ऋण) को गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन हमने किसानों के लिए वाईएसआर सुन्नावड्डी योजना शुरू की है।  

किसानों के लिए मुफ्त में बोरवेल खुदवाए जाएंगे। मुफ्त बिजली के जरिए हर किसान को सालाना करीब 49 हजार रुपए की मदद मिलेगी। इससे प्रति वर्ष सरकार पर 8,800 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। दिन में बिजली देने के लिए 1,700 करोड़ रुपए की लागत से फीडरों का आधुनिकीकरण किया गया है। इस खरीफ तक 82 फीसदी फीडरों में 9 घंटे मुफ्त बिजली उपलब्ध रहेगी और बाकी 18 फीसदी रबी मौसम तक इस्तेमाल में आ जाएगी। एक्वा किसानों के लिए केवल डेढ़ रुपए में बिजली दी जा रही है।

कभी नहीं खरीदी गई ये फसलें..

80,522 क्विंटल प्याज खरीदकर रैतु बाजारों में बेचा गया। कोविड के वक्त किसान को नुकसान से बचाने के लिए 1,100 करोड़ रुपए से उनकी फसलें खरीदी गई। इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने किसानों से मकई, टमाटर, केला आदि फसलें खरीदी और एक सप्ताह के भीतर किसानों को उसका भुगतान किया गया।

8 महीने में 5 लाख 60 हजार मैट्रिक टन कृषि उत्पादों की खरीदी की गई है। दरों के नियंत्रण के लिए 2,200 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। 12,672 करोड़ रुपए खर्च कर धान खरीदा गया है। पिछली सरकार के 384 करोड़ रुपए के बकाया ता भी भुगतान किया गया। ऑयल फार्म किसानों की भी मदद की जाएगी। 

फसल बोने से पहले ही समर्थन मूल्य

अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यकों को 50 फीसदी आरक्षण दिया गया। नॉमिनेटेड पदों में 50 फीसदी महिलाओं को आरक्षण दिया गया। पिछली सरकार में आत्महत्या कर चुके 400 किसान परिवारों को पांच-पांच लाख रुपए का मुआवजा दिया गया। इस महीने की 30 तारीख को राज्यभर में कुल 10,642 वाईएसआर रैतु भरोसा केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। आरबीके (रैतु भरोसा केंद्र) के जरिए बेहतर गुणवत्ता के बीज, कीटनाशक, उर्वरक मुहैया कराए जाएंगे।

कृषि के लिए जरूरी सुझाव व सलाह भी आरबीके मुहैया कराएंगे। आरबीके के जरिए ई क्रापिंग व्यवस्था शुरू करेंगे। फसल की खेती करने से पहले ही उसके लिए समर्थन मूल्य की घोषणा करेंगे। प्रति दिन सीएम एप के जरिए कृषि संबंधित जानकारी अपडेट करेंगे। आरबीके के पर्यवेक्षण के लिए हर जिले में ज्वाइंट कलेक्टर नियुक्त किए गए हैं।

अगले वर्ष के आखिर तक जनता बाजार

अगले वर्ष के आखिर तक गांवों में जनता बाजार स्थापित किए जाएंगे। खुद सरकार किसानों से कुल पैदावार की 30 फीसदी फसलें खरीदेगी और इन फसलों को सरकार जनता बाजारों में बेचेगी। आरबीके में लैब और कियोस्क उपलब्ध रहेंगे। राज्य, जिला व मंडल स्तर पर कृषि बोर्ड स्थापित किए जाएंगे। बिचौलिया व्यवस्था को खत्म करने के लिए आरबीके के जरिए क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएंगे।

तभी दोनों राज्यों के साथ समान न्याय होगा

रिवर्स टेंडरिंग के जरिए जल संसाधानों के विभाग के 1,095 करोड़ रुपए बचा पाए हैं। प्राथमिकता के आधार पर सिंचाई परियोजनाएं पूरी की जाएंगी। 2021 के आखिरी तक पोलवरम परियोजना को पूरा करेंगे। रायलसीमा में सूखा निवारण के लिए लाई जा रही परियोजनाओं को लेकर विवाद पैदा कर रहे हैं। चंद्रबाबू से ही नहीं, बल्कि ईनाडू, एबीएन, टीवी-5 जैसी बेकार व्यवस्थाओं के खिलाफ हम युद्ध कर रहे हैं।

श्रीशैलम डैम का जलस्तर 881 फूट होने पर हम 44 हजार क्येसूक पानी का इस्तेमाल कर सकेंगे, जबकि 854 फूट होने की स्थिति में सिर्फ 7 हजार क्यूसेक पानी ले सकेंगे। ऐसे में रायलसीमा के सूखे की समस्या का निवारण कैसे कर सकते हैं। डैम में जलस्तर 800 फूट होने पर तेलंगाना के लिए पानी मिल जाता है और उसी 800 फूट के जलस्तर पर हमारे लिए आवंटित पानी हम लेंगे। ऐसा करने से किसी को नुकसान नहीं होगा और तभी दोनों राज्यों के साथ समान न्याय होगा। पिछले एक दशक में इस बार सबसे अधिक कृषि पैदावा हुई है। खाद्यान्नों की पैदावार 150 लाख मैट्रिक टन से 172 लाख मैट्रिक टन तक बढ़ी है। 
 

Advertisement
Back to Top