Dr. YSR और जगन मोहन रेड्डी में क्या हैं अंतर और क्या हैं समानताएं.. !

What are the differences between YSR and Jagan Mohan Reddy and what are the similarities ..! - Sakshi Samachar

डॉ वाईएसआर व सीएम जगन में हैं ये समानताएं 

वाईएसआर व सीएम जगन में हैं ये असमानताएं 

हैदराबाद : राजनीति और राजनेता पर विश्वास करना अक्सर मुश्किल होता है और माना जाता है कि अपना मतलब निकालने और सत्ता हासिल करने के लिए ये राजनेता किसी भी हद तक जा सकते हैं और कुछ भी कर गुजरते हैं पर जब हमारी नजर संयुक्त आंध्र प्रदेश के दिवंगत मुख्यमंत्री डॉ वाईएस राजशेखर रेड्डी और उनके पुत्र वर्तमान में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी पर पड़ती है तो ये सारी बातें गलत साबित हो जाती है। 

इन दोनों को देखकर तो यही कहा जा सकता है कि जैसे पिता, वैसे ही पुत्र। दोनों में काफी समानताएं हैं तो कुछ अंतर भी। 

आइये पहले नजर डालते हैं वाईएसआर और सीएम जगन की समानताओं पर ......

1. जब भी वाईएसआर को याद किया जाता है तो एक जननेता के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने न सिर्फ जनता के हित के बारे में सोचा बल्कि जब तक जीवित रहे, जनता की भलाई व कल्याण के लिए ही काम करते रहे। वे जनता के लिए, जनता के बीच और जनता के साथ काम करके बेहद सुकून महसूस करते थे। वे अन्य राजनेताओं की तरह नहीं थे जो सिर्फ मंच से भाषण देते हैं और जनता के बीच जाने से कतराते हैं। 

वाईएसआर को अक्सर जनता के बीच, उनके साथ देखा जाता था। वे उनके बीच जाकर उनकी समस्याओं का पता लगाते और फिर उन समस्याओं को दूर करने के लिए काम करते थे। ये सारी बातें उनके पुत्र वाईएस जगन मोहन रेड्डी में भी साफतौर पर देखी जा सकती है। सीएम जगन भी बिलकुल अपने पिता की तरह गरीबों के कल्याण के लिए काम करते हैं। वे भी राजनीति से परे लोगों की समस्याओं को जानने और फिर उन्हें दूर करने में विश्वास करते हैं। 

2. वाईएस राजशेखर रेड्डी ने महात्मा गांधी की बात को चरितार्थ किया था, महात्मा गांधी कहते थे कि गरीबों के बीच जाकर, उनकी समस्याओं को जानकर ही उन्हें दूर किया जा सकता है। इसी बात को मानकर वाईएसआर ने पदयात्रा की थी। इस पदयात्रा के दौरान वे कई गांवों में गए, कई किसानों से मिले जिनमें कई गरीब थे, उनकी समस्याओं को जाना। 

इसी पदयात्रा की वजह से उन्होंने पहले तो लोगों का दिल जीता और फिर चुनाव। गरीब किसी नेता को अपने बीच पाकर निहाल हो गए थे और उन लोगों ने खुलकर अपनी समस्याएं वाईएसआर को बताई थी। वाईएसआर ने भी वादा किया था कि अगर वे चुनाव जीत गए तो उनके दुख दूर कर देंगे। 

इस तरह उन्होंने चुनाव भी जीता और लोगों का दिल भी। ठीक इसी तरह उनके पुत्र वाईएस जगन ने भी पदयात्रा की, लोगों के बीच गए, उनसे मिले, बात की, समस्याओं को जाना और जीतने पर मदद का वादा किया और फिर जीत गए। तो पिता-पुत्र की जोड़ी ने पदयात्रा से ही शुरू कर दी जनता की सेवा। 

3. वाईएस राजशेखर रेड्डी और उनके पुत्र वाईएस जगन में सबसे बड़ी समानता तो यह है कि दोनों की ही कथनी और करनी में अंतर नहीं है। जो कहा, वो किया। तभी तो मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही वाईएसआर ने किसानों को चौबीस घंटे मुफ्त बिजली देने की फाइल पर सबसे पहले हस्ताक्षर किए।  

वाईएसआर ने किसानों की समस्याओं को करीब से देखा था तो वे सबसे उन्हीं समस्याओं को दूर करना चाहते थे। ठीक इसी तरह सीएम जगन ने भी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही सबसे पहले वाईएसआर पेंशन स्कीम पर हस्ताक्षर किये। दोनों ने ही जनहित के काम में देरी न हो इसके लिए ऐसा किया।

4. डॉ वाईएस राजशेखर रेड्डी ने मुख्यमंत्री बनकर राज्य की जैसे ही बागडोर संभाली वैसे ही उन्होंने गरीबों के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की। अन्य नेताओं को चिंता थी कि राज्य का खजाना खाली हो रहा है पर वाईएसआर उस समय भी गरीबों के बारे में सोच रहे थे। 

सीएम जगन ने भी यही किया है। जबसे मुख्यमंत्री का पदभार संभाला है तबसे अब तक गरीबों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की और लगातार करते जा रहे हैं। 

5. वाईएस राजशेखर रेड्डी ने चुनाव जीतकर चंद्रबाबू नायडू को करारी हार का मजा चखाया था तो ठीक उसी तरह सीएम जगन ने भी किया। चंद्रबाबू ने पिता-पुत्र दोनों के हाथों करारी हार का मुंह देखा है। 

6. वाईएसआर की शख्सियत ऐसी थी कि विरोधी दल के नेता भी उनका सम्मान व तारीफ किया करते थे। उनकी पहचान ही जननेता की हो चुकी थी। ठीक उसी तरह सीएम वाईएस जगन भी सिर्फ एक साल में ही अपने जन कल्याणकारी योजनाओं से लोकप्रिय हो चुके हैं। वहीं उनकी कई योजनाओं की वजह से उनके विरोधी भी तारीफ कर रहे हैं। 

7. आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ सरकार और आंध्रप्रदेश सरकार के सलाहकार के रूप में काम कर रहे हैं रामचंद्र मूर्ति का कहना है कि..

डॉ. राजशेखर रेड्डी और वाई एस जगनमोहन रेड्डी में सबसे बड़ी समानता यह है कि दोनों राजनेताओं की सोच आम जनता के लिए बेहतर से बेहतर सुशासन देना है और सरकार द्वारा शुरू की गई हर योजना का लाभ बिना किसी भेदभाव को आम जनता तक पहुंचाना है दोनों कि हमेशा यह मंशा रही कि लोगों के साथ चुने हुए मुख्यमंत्री को कभी भी भेदभाव नहीं करना चाहिए।

आइए अब जानते हैं कि दोनों में क्या असमानताएं हैं .....

1. डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी और सीएम जगन में सबसे बड़ा अंतर तो यह है कि वाईएसआर को राजनीति विरासत में नहीं मिली थी बल्कि उन्होंने दृढ़ संकल्प और कड़े संघर्ष से इसे हासिल किया था। वहीं सीएम जगन को अपने पिता से ये विरासत में मिली है और हालांकि उन्होंने अपने पिता से बहुत कुछ सीखा भी है। 

2. वहीं दोनों की असमानताओं के बारे में भी रामचंद्र मूर्ति ने कहा कि डॉ राजशेखर रेड्डी लगभग 54 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बने थे और उसके पहले उनको कांग्रेस पार्टी के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी थी। आंध्र प्रदेश के इतिहास में पदयात्रा करके सत्ता हासिल करने वाले वह पहले मुख्यमंत्री बने थे जबकि जगन मोहन रेड्डी उनसे 10 साल पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं और उनकी आयु लगभग 44 साल के आसपास है।  

3. डॉ. वाईएसआर अमेरिका में पढ़ाई करके एमबीबीएस डॉक्टर के रूप में भारत आए थे और उन्होंने अपना राजनीति को प्रोफेशन चुना।  उनके काम में कहीं भी विदेशीपन या विदेशा स्टाइल की  झलक नहीं दिखी जबकि जगनमोहन रेड्डी व्यावसायिक पृष्ठभूमि से राजनीति में आए और उन्हें राजनीति विरासत में मिली है।

4. डॉ. राजशेखर रेड्डी और जगन मोहन रेड्डी के बीच एक असमानता यह भी है कि जगनमोहन रेड्डी अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए कंप्यूटर और अन्य संसाधनों के द्वारा बहुत सारे काम खुद निपटा लिया करते हैं जबकि राजशेखर रेड्डी फेस टू फेस अफसरों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग करके कार्यों को निपटाया करते थे। 

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 ..............मीता,  सीनियर सब-एडिटर-सीनियर रिपोर्टर,  साक्षी समाचार​

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