संयुक्त आंध्र में राजशेखर रेड्डी ने कांग्रेस को दिया था चरमोत्कर्ष, सोनिया भी हो गयी थीं कायल

Seeing the political skills of Rajasekhara Reddy Sonia handed over the reins of Andhra Pradesh - Sakshi Samachar

जन नेता थे डॉ वाईएस राजशेखर रेड्डी

सोनिया गांधी भी करती थी उनका पूर्ण समर्थन

हैदराबाद : वाईएस राजशेखर रेड्डी ऐसे नेता थे जिन्हें जनता के साथ-साथ राजनेता भी बहुत मानते थे साथ ही जिन्हें पार्टी के आलाकमान का समर्थन भी प्राप्त था। वे ऐसे नेता थे जिन्होंने एकतरफ तो जनता के लिए काम किया, कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की वहीं दूसरी ओर राज्य में पार्टी को भी शीर्ष पर पहुंचाया। 

राजशेखर रेड्डी के समय कांग्रेस को मिटाने की तो बात ही दूसरी है हटाने के बारे में भी विपक्षी दल नहीं सोच सकते थे तभी तो आलाकमान यानी पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी उन्हें सारे अधिकार दे रखे थे और वे उनके हर फैसले के साथ होती थी। 

देखा जाए तो वाईएस राजशेखर रेड्डी के निधन के साथ ही कांग्रेस का भी बुरा समय शुरू हुआ तभी तो उनके जाने के इतने साल बाद भी कांग्रेस को एपी व तेलंगाना के लिए वैसा कद्दावर नेता नहीं मिल पाया और धीरे-धीरे यहां कांग्रेस खत्म होती जा रही है। राजशेखर रेड्डी के निधन के बाद राज्य कांग्रेस पार्टी में जो रिक्तता आई थी वह आज भी भर नहीं पाई है। 

राजशेखर रेड्डी के समय फल-फूल रही थी कांग्रेस

वाईएसआर ने चंद्रबाबू को हराकर संयुक्त आंध्र प्रदेश की सत्ता हासिल की थी। जहां चंद्रबाबू नायडू ने शहरी विकास और सूचना तकनीक क्रांति की बदौलत सत्ता हासिल की थी वहीं वाईएसआर ने ऐतिहासिक पदयात्रा करके विधानसभा चुनावों में बाज़ी मार ली थी जैसे उनके पुत्र वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने भी किया। 

2004 में वाईएसआर ने चुनाव में जीत दर्ज करवाई और फिर दस साल बाद आंध्र प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में लौटी और इसके बाद वाईएसआर ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। वे आगे बढ़ते रहे और कांग्रेस को आगे बढ़ाते रहे। 

वाईएसआर को मिला था सोनिया का पूर्ण समर्थन

वाईएसआर आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के इकलौते मुख्यमंत्री रहे, जिन्होंने पांच साल पूरे किए और इसके बाद दोबारा सत्ता में आए। उन्होंने इस बात को तय किया था कि राज्य में कहीं भी पार्टी के ख़िलाफ़ कोई स्वर न उभरे। उन्हें कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी का समर्थन भी हासिल था। सोनिया ने 2009 चुनाव में वाईएसआर को अपने तरीक़े से काम करने की खुली छूट दे रखी थी।

यहां तक कि तेलंगाना के अति संवेदनशील मुद्दे पर भी यूपीए सरकार और कांग्रेस पार्टी ने वाईएस राजशेखर रेड्डी के साथ ही चलने का फ़ैसला किया था। हालांकि इसकी वजह से तेलंगाना राष्ट्र समिति का साथ छूट गया। वाईएसआर का क़द तब और बढ़ गया, जब तेलंगाना क्षेत्र में कांग्रेस ने विधानसभा उपचुनाव में सात सीटें हासिल कर लीं थी।

इसके बाद तेलुगु सुपर स्टार चिरंजीवी ने आंध्र प्रदेश में प्रजाराज्यम नाम की पार्टी शुरू की थी। इसके बाद भी कांग्रेस ने अपने दम पर 2009 का चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया। वाईएसआर ने कांग्रेस को भरोसा दिलाया कि वह इसे सत्ता में वापस लाएंगे और उन्होंने ऐसा कर भी दिखाया।

यह एक बड़ी चुनौती थी। वाईएसआर के सामने एक तरफ़ चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाला महागठबंधन था, तो दूसरी तरफ़ चिरंजीवी की प्रजाराज्यम लेकिन इसके बाद भी राजशेखर रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के 294 में से 174 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने ख़राब प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों और नेताओं का पत्ता साफ़ कर दिया।

अपने पूर्व नेताओं से अलग रेड्डी को कांग्रेस के अंदर ज़्यादा विरोध नहीं झेलना पड़ा और वह पूरे पांच साल खुलेआम अपने फ़ैसले लेते रहे। इसी दौरान कांग्रेस हाईकमान में भी उनकी अच्छी छवि बनी रही।

जन नेता थे वाईएसआर

वाईएसआर जननेता रहे जो सत्ता में रहे हों या सत्ता से बाहर उन्होंने हमेशा ही लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए संघर्ष किया। वे अंतिम समय तक लोगों से सीधे उनके मुँह से समस्याएँ सुनने में दिलचस्पी रखते थे।

इतना ही नहीं, वाईएसआर का पसंदीदा मनोरंजन भी राजीव पल्ले बाटा नाम का सार्वजनिक संपर्क कार्यक्रम था जिसके तहत मुख्यमंत्री ऐसे स्थानों पर पहुँचते थे जहाँ किसी भी साधन के जरिये पहुँचना दुर्गम होता था। पर वे वहां भी पहुंचते और लोगों की समस्याएं सुनकर उनको दूर करने की कोशिश करते थे।

इस भी पढ़ें : 

 आंध्र प्रदेश में आउट सोर्सिंग स्टॉफ को अपॉइंटमेंट लेटर सौंपेगे सीएम जगन

AP में 108 एंबुलेंस ड्राइवर व टेक्नीशियन के वेतन में भारी बढ़ोत्तरी, जानकर दंग रह जाएंगे आप

                            ..............मीता,  सीनियर सब-एडिटर-सीनियर रिपोर्टर,  साक्षी समाचार

Advertisement
Back to Top