चंद्रबाबू से निपटने में कितने सक्षम थे वाईएसआर और कितने सक्षम हैं वाईएस जगन

 Know YS Jagan is How much Capable to Handle Nara Chandrababu Naidu - Sakshi Samachar

टी. अंजय्या सरकार में चंद्रबाबू को बनवाया मंत्री 

जगन के खिलाफ रची साजिस

अपनी किए का खामियाजा भुगत रहे बाबू

अमरावती : आंध्र प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में दिवंगत मुखयमंत्री डॉ.वाईएस राजशेखर रेड्डी और टीडीपी के प्रमुख तथा पूर्व सीएम नारा चंद्रबाबू नायडू ऐसे नेता हैं जिन्होंने एक साथ 1978 में अपनी राजनीतिक करियर की शुरूआत की। दोनों शुरू में कांग्रेस पार्टी में थे और बताया जाता है कि उनके बीच गहरी दोस्ती थी। 1978 में वाईएसआर ने कडपा जिले के पुलिवेंदुला विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर जीत हासिल की और उन्हें कैबिनेट में मंत्री भी बनाया गया। चंद्रबाबू नायडू ने भी चित्तूर जिले के चंद्रगिरी विधानसभा सीट से चुनाव जीता, लेकिन उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली।

टी. अंजय्या सरकार में चंद्रबाबू को बनवाया मंत्री 

बताया जाता है कि वाईएसआर ने एडी-चोटी की जोर लगाकर 1980 में तत्ककालीन मुख्यमंत्री टी. अंजय्या के मंत्रिमंडल में चंद्रबाबू नायडू को मंत्री बनवाया था। लोग यह भी बताते हैं कि वाईएसआर ने चंद्रबाबू को अंजय्या कैबिनेट में मंत्री बनाकर उनकी राजनीति को धार दी थी। हालांकि बाद में चंद्रबाबू नायडू कांग्रेस छोड़ एनटी रामाराव के नेतृत्व में बनी तेलुगु देशम पार्टी में शामिल हो गए। उसके बाद वाईएसआर का चंद्रबाबू के यहां आना-जाना तो नहीं होता था, लेकिन बताते हैं कि बावजूद इसके बाबू के प्रति वाईएसआर सॉफ्ट कॉर्नर रखते थे और जहां कहीं भी दोनों एक-दूसरे से मिलते तो वाईएसआर के चेहरे पर मुस्कुराहट जरूर देखी जाती थी।

इसकी एक खास वजह थी कि दोनों की उम्र लगभग एक ही थी और दोनों ने एक ही बार राजनीति में कदम रखा और कुछ समय तक कांग्रेस पार्टी में रहे। साथ ही दोनों का व्यवहार फ्रेंडली था। दोनों परिवारों के बीच घर आना-जाना नहीं था, लेकिन विधानसभा में हो या फिर किसी अन्य कार्यक्रम में मिलते थे तो उनका हंसमुख अंदाज होता था। परंतु वाईएस जगन के मामले में ऐसा नहीं है। इसके कई कारण हो सकते हैं। पहले तो दोनों के बीच उम्र का अंतर है। चंद्रबाबू जगन के पिता की उम्र के हैं।

जगन के खिलाफ रची साजिस

बताया जाता है कि वाईएसआर की आकस्मिक मौत के बाद चंद्रबाबू ने किसी तरह जगन को दबाने और किसी तरह उनके राजनीतिक भविष्य को बर्बाद करने की योजना बनाई। इसी के तहत बाबू ने एक साजिश के तहत जगन को जेल भिजवाया और उनके खिलाफ कई गंभीर और बेबुनियाद मामले दर्ज कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके लिए बाबू ने राज्य व केंद्रीय स्तर पर सुरक्षा तंत्र का भी इस्तेमाल किया। परंतु बाबू ये बात भूल गए थे कि जगन वाईएसआर की तरह फ्रेंडली नहीं बल्कि अग्रेसिव हैं।

राज्य में बाबू के शासनकाल में विभिन्न परियोजनाओं में घपले, राजधानी के नाम पर भूमि घोटाले, विशाखापट्टणम में जमीन घोटाले, राजधानी के आस-पास टीडीपी नेताओं द्वारा हजारों एकड़ जमीन खरीदने और हड़पने जैसे मामलों की जांच शुरू हो चुकी है। यही वजह है कि विभिन्न घोटालों की जांच ईडी और सीबीआई को सौंपे जाने के बाद टीडीपी के पांच सांसद पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुके हैं। इसके अलावा पार्टी के कई नेताओं के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है। 

अपनी किए का खामियाजा भुगत रहे बाबू

हाल ही में टीडीपी सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे अच्चेन्नायडू को ईएसआई घोटाले में जेल भेजा जा चुका है और पार्टी के कई नेताओं को जेल भेजने की तैयारी चल रही है। इन्हीं सब कारणों से राज्य में तेलुगु देशम पार्टी कमजोर पड़ती जा रही है और उसके कुछ नेता पार्टी छोड़ चुके हैं और कुछ छोड़ने के फिराक में है।  एक ऐसा समय था न सिर्फ आंध्र प्रदेश बल्कि केंद्रीय स्तर पर अपना लोहा मनवा चुके चंद्रबाबू नायडू अपनी गलतियों और साजिशों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। जगन शुरू से अग्रेसिव हैं और उन्होंने राज्य में इतना सारा काम कर दिया है कि बाबू के राजनीतिक भविष्य पर अब सवाल उठने लगे हैं।

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